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Sant Kabir Nagar News: महंगाई ने बिगाड़ा रसोई बजट, मिठास हुई गायब
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बाजार में बिक रहा दाल-संवाद
लोहरैया। त्योहारों के आते ही खाद्य सामग्रियों की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। महंगाई की मार से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का रसोई बजट बिगड़ने लगा है। रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं के दाम बढ़ने से लोगों के सामने घर का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में त्योहारों की खुशियां भी महंगाई के बोझ तले दबती नजर आ रही हैं।
खाद्य सामग्रियों की कीमतों में हुई वृद्धि का असर गरीब परिवारों की थाली पर भी पड़ रहा है। पहले से सीमित आय में घर चलाने वाले लोगों को अब जरूरी सामान खरीदने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। लोहरैया निवासी दीनानाथ, जय प्रकाश आदि का कहना है कि आमदनी में खास बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जबकि खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में बचत करना तो दूर, रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बनता जा रहा है।
स्थानीय बाजार में चीनी की कीमत पहले जहां 52 रुपये किलो थी, वहीं अब बढ़कर 60 रुपये किलो हो गई है। इसी तरह पुखराज दाल का भाव 105 रुपये से बढ़कर 140 रुपये किलो हो गया है। सरसों के तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है।
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बैल कोल्हू का सरसों का तेल जो 185 रुपये किलो था, अब 195 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
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त्योहार की तैयारी पर भी असर
नवरात्र और अन्य त्योहारों के दौरान घरों में मिठाई, पकवान और विशेष व्यंजन बनाने की परंपरा है लेकिन चीनी, दाल और तेल जैसी खाद्य सामग्रियों के महंगे होने से त्योहारों की खरीदारी भी प्रभावित हो रही है। गरीब परिवारों के लिए अब त्योहार पर मीठा बनाना और जरूरत के मुताबिक राशन खरीदना पहले की तुलना में महंगा पड़ रहा है। लोगों की चिंता है कि यदि इसी तरह आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ती रहीं तो सीमित आय में परिवार का खर्च चलाना और कठिन हो जाएगा। महंगाई के इस दौर में आम आदमी को राहत मिलने की उम्मीद है, ताकि त्योहारों की खुशियां उसकी जेब पर भारी न पड़ें।
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खाद्य सामग्रियों की कीमतों में हुई वृद्धि का असर गरीब परिवारों की थाली पर भी पड़ रहा है। पहले से सीमित आय में घर चलाने वाले लोगों को अब जरूरी सामान खरीदने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। लोहरैया निवासी दीनानाथ, जय प्रकाश आदि का कहना है कि आमदनी में खास बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जबकि खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में बचत करना तो दूर, रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बनता जा रहा है।
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स्थानीय बाजार में चीनी की कीमत पहले जहां 52 रुपये किलो थी, वहीं अब बढ़कर 60 रुपये किलो हो गई है। इसी तरह पुखराज दाल का भाव 105 रुपये से बढ़कर 140 रुपये किलो हो गया है। सरसों के तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है।
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त्योहार की तैयारी पर भी असर
नवरात्र और अन्य त्योहारों के दौरान घरों में मिठाई, पकवान और विशेष व्यंजन बनाने की परंपरा है लेकिन चीनी, दाल और तेल जैसी खाद्य सामग्रियों के महंगे होने से त्योहारों की खरीदारी भी प्रभावित हो रही है। गरीब परिवारों के लिए अब त्योहार पर मीठा बनाना और जरूरत के मुताबिक राशन खरीदना पहले की तुलना में महंगा पड़ रहा है। लोगों की चिंता है कि यदि इसी तरह आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ती रहीं तो सीमित आय में परिवार का खर्च चलाना और कठिन हो जाएगा। महंगाई के इस दौर में आम आदमी को राहत मिलने की उम्मीद है, ताकि त्योहारों की खुशियां उसकी जेब पर भारी न पड़ें।