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Sant Kabir Nagar News: साफ पानी की बढ़ी मांग... गुणवत्ता का ध्यान नहीं, जानलेवा बीमारी का खतरा
Wed, 27 Nov 2024 11:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 27 Nov 2024 11:15 PM IST
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संतकबीरनगर। सहागल का समय चल रहा है। इसमें पानी की डिमांड बढ़ गई है, लेकिन गुणवत्ता पर किसी का ध्यान नहीं है। आरओ के नाम पर लोग मानकविहीन पानी पी रहे हैं। इस समय शहर से देहात तक करीब 50 आरओ प्लांट धड़ल्ले से जार में पानी की सप्लाई कर रहे हैं। इस पानी की गुणवत्ता की न जांच होती है और न ही आरओ प्लांट पर साफ-सफाई की कोई निगरानी होती है।
डॉक्टर के मुताबिक साफ पानी में रासायनिक पदार्थों की अधिकता से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी होने का खतरा है। शहर के विभिन्न मोहल्लों सहित आसपास के क्षेत्रों में आरओ प्लांट लगाए गए हैं। यह प्लांट बिना पंजीकरण के ही चल रहे हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर आरओ प्लांट स्थापित किए गए हैं। एक आरओ प्लांट से औसतन कम से कम तीन से चार हजार लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है, जबकि 15 लीटर पानी के जार की कीमत 20 से 30 रुपये तक लिए जा रहे हैं। मानकाें की बात करें तो कोई भी प्लांट भूगर्भ जल विभाग में पंजीकृत नहीं है।
ऐसे में आरओ प्लांट से किस मानक के पानी की आपूर्ति की जा रही है, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। इसके अलावा पानी के डिब्बों पर रसायन की मात्रा, उत्पादन तिथि और खराबी की तिथि तक नहीं लिखी जा रही है। ऐसे में शुद्ध पानी के नाम पर लोगों को सिर्फ ठंडा पानी ही पिलाया जा रहा है।
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डॉक्टर के मुताबिक साफ पानी में रासायनिक पदार्थों की अधिकता से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी होने का खतरा है। शहर के विभिन्न मोहल्लों सहित आसपास के क्षेत्रों में आरओ प्लांट लगाए गए हैं। यह प्लांट बिना पंजीकरण के ही चल रहे हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर आरओ प्लांट स्थापित किए गए हैं। एक आरओ प्लांट से औसतन कम से कम तीन से चार हजार लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है, जबकि 15 लीटर पानी के जार की कीमत 20 से 30 रुपये तक लिए जा रहे हैं। मानकाें की बात करें तो कोई भी प्लांट भूगर्भ जल विभाग में पंजीकृत नहीं है।
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ऐसे में आरओ प्लांट से किस मानक के पानी की आपूर्ति की जा रही है, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। इसके अलावा पानी के डिब्बों पर रसायन की मात्रा, उत्पादन तिथि और खराबी की तिथि तक नहीं लिखी जा रही है। ऐसे में शुद्ध पानी के नाम पर लोगों को सिर्फ ठंडा पानी ही पिलाया जा रहा है।
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