{"_id":"648a050e0605f193c109b496","slug":"illigal-wine-drinking-khalilabad-news-c-7-1-206824-2023-06-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: जब तक चलेगा औपचारिक अभियान, कच्ची दारू पर नहीं लगेगी लगाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: जब तक चलेगा औपचारिक अभियान, कच्ची दारू पर नहीं लगेगी लगाम
विज्ञापन
संतकबीरनगर। धनघटा क्षेत्र के कुआनों नदी का किनारा और घाघरा नदी की तलहटी अवैध धंधे का हब बन गया है। अवैध रूप से बालू खनन का मामला हो या कच्ची दारू बनाने की फैक्ट्री, यहां धड़ल्ले के साथ वर्षों से संचालित होती चली आ रही है। इस पर रोक लगाने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग की टीम छापा मारती जरूर है, लेकिन धंधेबाज पुलिस पकड़ से दूर ही रहते हैं। जब तक औपचारिक रूप से छापे की कार्रवाई की जाएगी, तब तक नासूर बन चुके इस अवैध धंधे पर रोक लग पाना मुश्किल होगा। कुआनों नदी के किनारे बसने वाले अधिकतर गांवों में अवैध रूप से कच्ची शराब बनाने और बेचे जाने का धंधा चलता चला आ रहा है। मूडाडीहा, बरगदवा, मझौरा, नकहा, कटार मिश्र, बरपरवा, घोरांग, बसवारी गांव समेत कई गांव में कच्ची दारू बनाई और बेची जाती है। पिछले सप्ताह पुलिस ने घोरांग गांव में छापा मारकर कई भट्ठियों को नष्ट करते हुए आठ क्विंटल लाहन और 200 लीटर कच्ची दारू नष्ट करने का दावा किया था, लेकिन कार्रवाई के दौरान पुलिस के हाथ किसी कारोबारी के गिरेबान तक नहीं पहुंच पाए।
घाघरा नदी की तलहटी में बसे भोतहा, नारायनपुर, माझा चहोड़ा, छपरा मगरबी, आगापुर गुलरिहा, खालेपुरवा, नेतवापुर, तुरकौलिया नायक, जगदीशपुर, चपरा पूर्वी, बिडहर घाट, गायघाट दक्षिणी आदि गांव में बड़े स्तर पर कच्ची दारू के उत्पादन की चर्चा आम है। मजे की बात यह है कि बिडहर घाट जहां नदी के किनारे पुलिस चौकी भी है। 24 घंटे पुलिस का पहरा रहता है, लेकिन सर्वाधिक कच्ची दारू के उत्पादन और विक्रय का काम इसी स्थान पर हो रहा है। यहां कार्तिक पूर्णिमा, माघी अमावस्या के साथ-साथ प्रत्येक महीने के रविवार को काफी संख्या में लोग स्नान करने पहुंचते हैं, तो प्रतिदिन 60 से 70 लाशों का अंतिम संस्कार भी किया जाता है।
शराब पीने के शौकीन यहां चाय की दुकानों पर और दियारा में संचालित की जाने वाली कच्ची शराब की दुकानों पर आराम से शराब का सेवन करते हैं। बेचने वालों को भी पुलिस का जरा सा भय नहीं रहता है। लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव के समय क्षेत्र में मतदान को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए पुलिस अवैध कारोबारियों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करती है। जिलाधिकारी और एसपी के नेतृत्व में भी यहां समय-समय पर अभियान चलाया गया है, जिसमें काफी मात्रा में लाहन और कच्ची दारू के साथ शराब की भट्ठियों को नष्ट करने का दावा किया गया है, लेकिन कारोबारी पुलिस पकड़ में नहीं आते हैं।
विज्ञापन
इसका परिणाम है कि एक तरफ अभियान चलता है तो दूसरी तरफ शराब की भट्ठियां धधकती हैं। बिडहर घाट पर कच्ची शराब बेचे जाने से शराब के शौकीनों की काफी भीड़ लगती है। जिसका परिणाम है कि मंगलवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने गए धनघटा गांव निवासी अशोक उर्फ साधु यादव और सुनील उर्फ पप्पू वर्मा ने शराब पी और घर पहुंचने के बाद दम तोड़ दिया।
कटार मिश्र गांव निवासी राजेश (22) ने गांव में ही शराब का सेवन किया और देर शाम वह भी मौत का शिकार हो गया। अचानक हुई तीन मौतों से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। लोग अवैध शराब के कारोबारियों के विरुद्ध की जाने वाली पुलिसिया और आबकारी विभाग की कार्रवाई पर सवाल करने लगे हैं।
-- -- -- -- --
कच्ची शराब के खिलाफ छेड़ा गया था अभियान : शीला यादव
अखिल भारतीय महिला महासभा की प्रदेश अध्यक्ष शीला यादव का कहना है कि क्षेत्र में अवैध रूप से बिकने वाली कच्ची दारू पर रोक लगाने के लिए महिला महासभा के लोग कई बार पुलिस से शिकायत कर चुकी हैं। इसके साथ धरना प्रदर्शन भी हुआ है। कच्ची दारू के कारण मूडाडीहा गांव में कई बहनें विधवा हो चुकी हैं। शीला का आरोप है कि पुलिस और आबकारी विभाग की टीम ईमानदारी के साथ अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई करे तो निश्चित रूप से इस इलाके का यह अभिशाप समाप्त हो जाएगा, लेकिन पुलिस भी औपचारिक रूप से छापा डाल कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही है, जिसका नतीजा है कि कच्ची शराब के कारण लोग मौत का शिकार हो रहे हैं। ऐसे लोगों का नाम पुलिस की डायरी में नहीं आ पाता है।
विज्ञापन
घाघरा नदी की तलहटी में बसे भोतहा, नारायनपुर, माझा चहोड़ा, छपरा मगरबी, आगापुर गुलरिहा, खालेपुरवा, नेतवापुर, तुरकौलिया नायक, जगदीशपुर, चपरा पूर्वी, बिडहर घाट, गायघाट दक्षिणी आदि गांव में बड़े स्तर पर कच्ची दारू के उत्पादन की चर्चा आम है। मजे की बात यह है कि बिडहर घाट जहां नदी के किनारे पुलिस चौकी भी है। 24 घंटे पुलिस का पहरा रहता है, लेकिन सर्वाधिक कच्ची दारू के उत्पादन और विक्रय का काम इसी स्थान पर हो रहा है। यहां कार्तिक पूर्णिमा, माघी अमावस्या के साथ-साथ प्रत्येक महीने के रविवार को काफी संख्या में लोग स्नान करने पहुंचते हैं, तो प्रतिदिन 60 से 70 लाशों का अंतिम संस्कार भी किया जाता है।
विज्ञापन
शराब पीने के शौकीन यहां चाय की दुकानों पर और दियारा में संचालित की जाने वाली कच्ची शराब की दुकानों पर आराम से शराब का सेवन करते हैं। बेचने वालों को भी पुलिस का जरा सा भय नहीं रहता है। लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव के समय क्षेत्र में मतदान को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए पुलिस अवैध कारोबारियों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करती है। जिलाधिकारी और एसपी के नेतृत्व में भी यहां समय-समय पर अभियान चलाया गया है, जिसमें काफी मात्रा में लाहन और कच्ची दारू के साथ शराब की भट्ठियों को नष्ट करने का दावा किया गया है, लेकिन कारोबारी पुलिस पकड़ में नहीं आते हैं।
विज्ञापन
इसका परिणाम है कि एक तरफ अभियान चलता है तो दूसरी तरफ शराब की भट्ठियां धधकती हैं। बिडहर घाट पर कच्ची शराब बेचे जाने से शराब के शौकीनों की काफी भीड़ लगती है। जिसका परिणाम है कि मंगलवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने गए धनघटा गांव निवासी अशोक उर्फ साधु यादव और सुनील उर्फ पप्पू वर्मा ने शराब पी और घर पहुंचने के बाद दम तोड़ दिया।
कटार मिश्र गांव निवासी राजेश (22) ने गांव में ही शराब का सेवन किया और देर शाम वह भी मौत का शिकार हो गया। अचानक हुई तीन मौतों से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। लोग अवैध शराब के कारोबारियों के विरुद्ध की जाने वाली पुलिसिया और आबकारी विभाग की कार्रवाई पर सवाल करने लगे हैं।
कच्ची शराब के खिलाफ छेड़ा गया था अभियान : शीला यादव
अखिल भारतीय महिला महासभा की प्रदेश अध्यक्ष शीला यादव का कहना है कि क्षेत्र में अवैध रूप से बिकने वाली कच्ची दारू पर रोक लगाने के लिए महिला महासभा के लोग कई बार पुलिस से शिकायत कर चुकी हैं। इसके साथ धरना प्रदर्शन भी हुआ है। कच्ची दारू के कारण मूडाडीहा गांव में कई बहनें विधवा हो चुकी हैं। शीला का आरोप है कि पुलिस और आबकारी विभाग की टीम ईमानदारी के साथ अवैध शराब के विरुद्ध कार्रवाई करे तो निश्चित रूप से इस इलाके का यह अभिशाप समाप्त हो जाएगा, लेकिन पुलिस भी औपचारिक रूप से छापा डाल कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही है, जिसका नतीजा है कि कच्ची शराब के कारण लोग मौत का शिकार हो रहे हैं। ऐसे लोगों का नाम पुलिस की डायरी में नहीं आ पाता है।