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घाघरा की कटान रोकने के लिए जूझ रहे अभियंता
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घाघरा की कटान रोकने के लिए जूझ रहे अभियंता
बालू भरीं बोरियां डालने का चल रहा कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। तीन दिन से घाघरा नदी की कटान को रोकने के प्रयास में जुटे सिंचाई विभाग के अफसरों के माथे पर उस समय पसीना आ गया जब कटान को रोकने के लिए लगाए गए बंबो कैरेट बांस की जाली को धराशायी कर नदी बांध की तरफ बढ़ गई। हालांकि, मिट्टी व बालू भरीं बोरियों का प्रयोग कटान को रोकने के लिए किया जा रहा है।
वर्ष 2013 में घाघरा नदी जिस स्थान पर कटान करके एमबीडी बांध को काट कर इलाके में भारी तबाही मचाई थी, उसी स्थान पर इस वर्ष भी नदी तेज गति से कटान कर रही है। बांध और कटान स्थल से मात्र 100 मीटर दूरी रह जाने के बाद सिंचाई विभाग की नींद खुली और वह पिछले तीन दिनों से कटान रोकने का प्रयास कर रहा है। शुक्रवार की सुबह कटान स्थल पर बंबो क्रेट में बालू व मिट्टी भरीं बोरियां डालकर कटान को रोकने का उपाय किया गया, लेकिन शुक्रवार की रात में ही बंबो क्रेट को धराशायी करके नदी 15 से 20 मीटर जमीन काटते हुए बांध की तरफ बढ़ गई। बांध पर ट्रॉली लगाकर मिट्टी गिराई जा रही है। जिसे बोरी में भरकर कटान स्थल पर रखा जा रहा है। तुर्कवलिया नायक गांव के प्रधान वीरेंद्र यादव, जयप्रकाश, शंभू, पवन कुमार, बाबूराम, जगदेव आदि का कहना है कि नदी की कटान को लेकर या तो अधिकारी गंभीर नहीं हैं या तो वह बांध को लेकर अति विश्वास में हैं। लोगों ने कहा कि वर्ष 2013 में भी इसी तरह का मामला था, अंत तक अधिकारी बांध को सुरक्षित रहने का दावा करते रहे, लेकिन जब बांध कट गया तो हाथ मलते रह गए थे। गांव वालों का कहना है कि यदि कटान को रोकने के लिए जल्द से जल्द बोल्डर नहीं लगाए गए तो इस वर्ष भी नदी वर्ष 2013 की पुनरावृत्ति कर सकती है। दूसरी तरफ सिंचाई विभाग के अभियंता अजय कुमार का कहना है कि नदी में सिल्ट पड़ने लगी है। इस कारण धारा भी मुड़ती दिखने लगी है। कटान को बांध से दूर रोक लिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो जियो ट्यूब व बोल्डर भी लगाए जाएंगे।
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बालू भरीं बोरियां डालने का चल रहा कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। तीन दिन से घाघरा नदी की कटान को रोकने के प्रयास में जुटे सिंचाई विभाग के अफसरों के माथे पर उस समय पसीना आ गया जब कटान को रोकने के लिए लगाए गए बंबो कैरेट बांस की जाली को धराशायी कर नदी बांध की तरफ बढ़ गई। हालांकि, मिट्टी व बालू भरीं बोरियों का प्रयोग कटान को रोकने के लिए किया जा रहा है।
वर्ष 2013 में घाघरा नदी जिस स्थान पर कटान करके एमबीडी बांध को काट कर इलाके में भारी तबाही मचाई थी, उसी स्थान पर इस वर्ष भी नदी तेज गति से कटान कर रही है। बांध और कटान स्थल से मात्र 100 मीटर दूरी रह जाने के बाद सिंचाई विभाग की नींद खुली और वह पिछले तीन दिनों से कटान रोकने का प्रयास कर रहा है। शुक्रवार की सुबह कटान स्थल पर बंबो क्रेट में बालू व मिट्टी भरीं बोरियां डालकर कटान को रोकने का उपाय किया गया, लेकिन शुक्रवार की रात में ही बंबो क्रेट को धराशायी करके नदी 15 से 20 मीटर जमीन काटते हुए बांध की तरफ बढ़ गई। बांध पर ट्रॉली लगाकर मिट्टी गिराई जा रही है। जिसे बोरी में भरकर कटान स्थल पर रखा जा रहा है। तुर्कवलिया नायक गांव के प्रधान वीरेंद्र यादव, जयप्रकाश, शंभू, पवन कुमार, बाबूराम, जगदेव आदि का कहना है कि नदी की कटान को लेकर या तो अधिकारी गंभीर नहीं हैं या तो वह बांध को लेकर अति विश्वास में हैं। लोगों ने कहा कि वर्ष 2013 में भी इसी तरह का मामला था, अंत तक अधिकारी बांध को सुरक्षित रहने का दावा करते रहे, लेकिन जब बांध कट गया तो हाथ मलते रह गए थे। गांव वालों का कहना है कि यदि कटान को रोकने के लिए जल्द से जल्द बोल्डर नहीं लगाए गए तो इस वर्ष भी नदी वर्ष 2013 की पुनरावृत्ति कर सकती है। दूसरी तरफ सिंचाई विभाग के अभियंता अजय कुमार का कहना है कि नदी में सिल्ट पड़ने लगी है। इस कारण धारा भी मुड़ती दिखने लगी है। कटान को बांध से दूर रोक लिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो जियो ट्यूब व बोल्डर भी लगाए जाएंगे।
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