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घाघरा की कटान से पांच घर नदी में समाहित
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गायघाट दक्षिणी गांव के पास कटान करती घाघरा नदी।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
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घाघरा की कटान से पांच घर नदी में समाहित
गायघाट दक्षिणी गांव पर बढ़ता जा रहा संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। घाघरा नदी की बाढ़ में कमी आई तो कटान तेज हो गई। नदी ने कटान करके शनिवार की सुबह गायघाट दक्षिणी निवासी पांच लोगों के मकान को अपने में समाहित कर लिया। कटान करती हुई नदी तेजी के साथ गांव में एक के बाद घर को समाहित करती जा रही है। इससे लोगों में डर का माहौल है।
दो दिन पहले नदी की बाढ़ के कारण गायघाट दक्षिणी गांव के लोग परेशान थे। बाढ़ का पानी कम हुआ तो वह राहत की सांस लेते कि नदी ने तेजी से कटान करना शुरू कर दी। नदी ने कटान करके नागेंद्र, किशोरी, बालेंद्र, तारचंद, टिकोरी के मकान और जमीन को अपने में समाहित कर लिया। प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू ने बताया कि गनीमत यह है कि लोग कटान और बाढ़ को देखते हुए मकान को पहले ही खाली कर चुके थे। प्रधान का कहना है कि 300 घर वाले गायघाट दक्षिणी के पिछले साल से इस साल तक 22 लोगों का मकान कटान के कारण नदी के धारा में समाहित हो चुके हैं। जिनका मकान कट चुका है वह या तो एमबीडी बांध पर या अपने रिश्तेदार के घर शरण लेने को विवश है। धीरे-धीरे कटान करती हुई नदी एक-एक घर को काटती जा रही है। नदी की बाढ़ और कटान से खेती पहले ही नष्ट हो चुकी है। अब मकान पर आफत आई है। तहसीलदार रत्नेश तिवारी का कहना है कि बाढ़ और कटान को देखते हुए गांव को खाली करने के लिए लोगों से पहले ही कहा जा चुका है। कुछ लोग मकान खाली करके तिघरा बाढ़ राहत शिविर में रह रहे हैं।
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गायघाट दक्षिणी गांव पर बढ़ता जा रहा संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। घाघरा नदी की बाढ़ में कमी आई तो कटान तेज हो गई। नदी ने कटान करके शनिवार की सुबह गायघाट दक्षिणी निवासी पांच लोगों के मकान को अपने में समाहित कर लिया। कटान करती हुई नदी तेजी के साथ गांव में एक के बाद घर को समाहित करती जा रही है। इससे लोगों में डर का माहौल है।
दो दिन पहले नदी की बाढ़ के कारण गायघाट दक्षिणी गांव के लोग परेशान थे। बाढ़ का पानी कम हुआ तो वह राहत की सांस लेते कि नदी ने तेजी से कटान करना शुरू कर दी। नदी ने कटान करके नागेंद्र, किशोरी, बालेंद्र, तारचंद, टिकोरी के मकान और जमीन को अपने में समाहित कर लिया। प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू ने बताया कि गनीमत यह है कि लोग कटान और बाढ़ को देखते हुए मकान को पहले ही खाली कर चुके थे। प्रधान का कहना है कि 300 घर वाले गायघाट दक्षिणी के पिछले साल से इस साल तक 22 लोगों का मकान कटान के कारण नदी के धारा में समाहित हो चुके हैं। जिनका मकान कट चुका है वह या तो एमबीडी बांध पर या अपने रिश्तेदार के घर शरण लेने को विवश है। धीरे-धीरे कटान करती हुई नदी एक-एक घर को काटती जा रही है। नदी की बाढ़ और कटान से खेती पहले ही नष्ट हो चुकी है। अब मकान पर आफत आई है। तहसीलदार रत्नेश तिवारी का कहना है कि बाढ़ और कटान को देखते हुए गांव को खाली करने के लिए लोगों से पहले ही कहा जा चुका है। कुछ लोग मकान खाली करके तिघरा बाढ़ राहत शिविर में रह रहे हैं।
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