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Sant Kabir Nagar News: 17 साल में सरयू में समाए पांच गांव, सैकड़ों एकड़ जमीन

Thu, 20 Aug 2026 11:44 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:44 PM IST
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Five villages and hundreds of acres of land have been swallowed by the Saryu in 17 years.
संवाद न्यूज एजेंसी
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धनघटा। तहसील के दक्षिणी छोर से होकर बहने वाली सरयू ने 17 वर्षों में ग्रामीणों को काफी क्षति पहुंचाई है। नदी की तेज कटान अब तक पांच से ज्यादा गांव और उनके पुरवे के अस्तित्व समाप्त हो चुके हैं।
सरयू की कटान से सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि जहां नदी की धारा में समा चुकी है वहीं सैकड़ों परिवार पुश्तैनी घर छोड़कर दूसरे स्थानों पर बस्तियां बसाने को मजबूर हाे गए। कटान का सिलसिला आज भी जारी है। नदी का जलस्तर कम होने के बाद उपजाऊ जमीन कट कर नदी की धारा में समाती चली आ रही है। तटवर्ती गांव के लोग हर साल बाढ़ और कटान के भय के बीच जीवन बिताने को विवश हैं।
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धनघटा क्षेत्र में साल 2013 में कटान ने विकराल रूप धारण किया। कटान ने तुरकौलिया नायक गांव की अस्तित्व को मिटाते हुए 500 बीघा से अधिक जमीन काटकर नदी ने धारा में मिला लिया। वीरेंद्र यादव बताते हैं कि डेढ़ सौ से अधिक घर नदी की धारा में समा गए तो करीब दो किलोमीटर दूर रामजंगला में गांव के लोग बसाए गए। इसी तरह भिखारीपुर, गायघाट दक्षिणी, तुरकौलिया लाल, अशरफपुर गांव नदी की धारा में समाहित हो गए थे।
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भिखारीपुर करीब 200 बस्ती वाला गांव पूरी तरह नदी की धारा में समाहित हो गया था। भिखारीपुर निवासी रामलोचन बताते हैं कि कटान के कारण मूल बस्ती काटन के भेंट चढ़ गई। गायघाट दक्षिणी में सौ से अधिक मकान नदी के धारा में समा चुके हैं। दौलतपुर गांव निवासी शिवप्रसाद, रामदीन बताते हैं कि उनके गांव की करीब 200 बीघा उपजाऊ जमीन कट चुकी है। नदी का पानी जब घटता है तो कटान होती है।

गायघाट दक्षिणी के लोग करीब पांच किलोमीटर दूर जिगिना गांव के पास बसा तो दिए गए हैं लेकिन मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित हैं। इस वर्ष नदी को कटान नहीं कर रही लेकिन नदी का जलस्तर बढ़कर 10 से अधिक गांव के लोगों का रहना दुश्वार कर दिया है। घर से अभी तक किसी ने पलायन नहीं किया लेकिन दरवाजे और बरामदे में पानी भरा हुआ है। गायघाट दक्षिणी गांव के लोगों का कहना है कि कच्चे ईंट की दीवार और छप्पर गिरना शुरू हो गए हैं।
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