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पूर्व सांसद भालचंद यादव छोड़ेंगे सपा का साथ
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Nov 2017 11:32 PM IST
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पूर्व सांसद भालचंद यादव।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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संतकबीरनगर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद भालचंद यादव जल्द ही सपा का दामन छोड़ देंगे। विधान सभा चुनाव, जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव, ब्लॉक प्रमुख के चुनाव और नगर पालिका खलीलाबाद के चुनाव में टिकट वितरण में हुई अनदेखी से वे काफी आहत हैं।
फिलहाल उन्होंने पार्टी का झंडा-बैनर उतार दिया है। पार्टी से इस्तीफे के पहले वह समर्थकों से विचार-विमर्श करना चाहते हैं। पूर्व सांसद के पार्टी छोड़ने से सपा को एक बड़ा झटका लग सकता है।
पूर्व सांसद भालचंद यादव एक बार सपा और एक बार बसपा से सांसद रह चुके हैं। इसके साथ ही 2008 में सपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़े और हार गए। उसके बाद भी लगातार दो बार वह सपा के ही टिकट पर सांसद का चुनाव लड़े और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। तब से वह सपा में ही जुड़े रहे।
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वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में अपने छोटे बेटे सुबोध यादव को सपा से टिकट दिलाने के लिए प्रयासरत रहे, लेकिन पार्टी ने उनके बेटे की जगह जावेद खान को प्रत्याशी बना दिया था। इसके साथ ही वर्ष 2015 में ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में हैंसर और खलीलाबाद ब्लॉक से अपने चहेते को टिकट दिलाने की जुगत में लगे रहे, लेकिन पार्टी ने उनके प्रतिद्वंद्वी को टिकट दे दिया।
यही हाल जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में रहा जहां पर वह अपने बड़े बेटे प्रमोद यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाना चाह रहे थे, लेकिन पार्टी ने संतोष यादव को टिकट दिया और संतोष यादव जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए। पार्टी में लगातार उपेक्षा के चलते वह आहत थे। इधर, नगर पालिका के चेयरमैन में अपने चहेते महेश गुप्ता को टिकट तो दिला दिया लेकिन एक ही दिन बाद पार्टी ने महेश गुप्ता का टिकट काट दिया।
इससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई। सूत्रों की मानें तो टिकट कटने के बाद पूर्व सांसद लखनऊ पहुंच गए और वहां महेश गुप्ता का टिकट वापस करने की पैरवी की, लेकिन उनकी पैरवी नाकाम रही। पूर्व सांसद भालचंद यादव ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि पार्टी में लगातार उनकी उपेक्षा की जा रही है।
पहले उनके बेटे को पार्टी ने विधान सभा और जिला पंचायत अध्यक्ष का टिकट नहीं दिया, फिर नगर पालिका में समर्थक महेश गुप्ता का टिकट काट कर दूसरे को दे दिया गया। जिससे आहत होकर वह पार्टी का बैनर, झंडा उतार दिए है। जल्द ही पार्टी भी छोड़ेंगे। इसके साथ ही शुभचिंतकों के साथ बैठक कर अगली रणनीति पर चर्चा करेंगे।
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फिलहाल उन्होंने पार्टी का झंडा-बैनर उतार दिया है। पार्टी से इस्तीफे के पहले वह समर्थकों से विचार-विमर्श करना चाहते हैं। पूर्व सांसद के पार्टी छोड़ने से सपा को एक बड़ा झटका लग सकता है।
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पूर्व सांसद भालचंद यादव एक बार सपा और एक बार बसपा से सांसद रह चुके हैं। इसके साथ ही 2008 में सपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़े और हार गए। उसके बाद भी लगातार दो बार वह सपा के ही टिकट पर सांसद का चुनाव लड़े और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। तब से वह सपा में ही जुड़े रहे।
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वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में अपने छोटे बेटे सुबोध यादव को सपा से टिकट दिलाने के लिए प्रयासरत रहे, लेकिन पार्टी ने उनके बेटे की जगह जावेद खान को प्रत्याशी बना दिया था। इसके साथ ही वर्ष 2015 में ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में हैंसर और खलीलाबाद ब्लॉक से अपने चहेते को टिकट दिलाने की जुगत में लगे रहे, लेकिन पार्टी ने उनके प्रतिद्वंद्वी को टिकट दे दिया।
यही हाल जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में रहा जहां पर वह अपने बड़े बेटे प्रमोद यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाना चाह रहे थे, लेकिन पार्टी ने संतोष यादव को टिकट दिया और संतोष यादव जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए। पार्टी में लगातार उपेक्षा के चलते वह आहत थे। इधर, नगर पालिका के चेयरमैन में अपने चहेते महेश गुप्ता को टिकट तो दिला दिया लेकिन एक ही दिन बाद पार्टी ने महेश गुप्ता का टिकट काट दिया।
इससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई। सूत्रों की मानें तो टिकट कटने के बाद पूर्व सांसद लखनऊ पहुंच गए और वहां महेश गुप्ता का टिकट वापस करने की पैरवी की, लेकिन उनकी पैरवी नाकाम रही। पूर्व सांसद भालचंद यादव ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि पार्टी में लगातार उनकी उपेक्षा की जा रही है।
पहले उनके बेटे को पार्टी ने विधान सभा और जिला पंचायत अध्यक्ष का टिकट नहीं दिया, फिर नगर पालिका में समर्थक महेश गुप्ता का टिकट काट कर दूसरे को दे दिया गया। जिससे आहत होकर वह पार्टी का बैनर, झंडा उतार दिए है। जल्द ही पार्टी भी छोड़ेंगे। इसके साथ ही शुभचिंतकों के साथ बैठक कर अगली रणनीति पर चर्चा करेंगे।