{"_id":"5c096d77bdec2220567c8bf7","slug":"durgaati-s-yatim-took-care-of-the-upbringing-of-children","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुर्गावती के यतीम बच्चों के पालन-पोषण का जिम्मा लिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुर्गावती के यतीम बच्चों के पालन-पोषण का जिम्मा लिया
संतकबीरनगर
Updated Fri, 07 Dec 2018 12:11 AM IST
विज्ञापन
दुर्गावती के यतीम बच्चों के पालन-पोषण का जिम्मा लिया
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
धनघटा (संतकबीरनगर)। महुली थाना क्षेत्र के ग्राम कोदवट के अनाथ हुए तीन बच्चों के पालन-पोषण का जिम्मा गांव के प्रधान ने ले लिया है। बुधवार को इनकी मां का शव कमरे में फंदे से लटकता मिला था। पति की मौत, दिव्यांग बेटे की लाचारी व आर्थिक तंगी से जूझ रही महिला की मौत से बच्चों की परवरिश के लिए संकट आ गया था।
ग्राम कोदवट निवासी प्रमोद की दो वर्ष पहले ट्रेन हादसे में मौत हो गई थी। पत्नी दुर्गावती तीन बच्चों 10 वर्षीय अंशिका, आठ वर्षीय अंश और तीन वर्षीय अंकित की परवरिश के लिए मजदूरी करती थी। किसी तरह से बेटी अंशिका को पढ़ने के लिए हैंसर ब्लॉक के कोचरी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भेजा था। दोनों बेटों अंश व अंकित के साथ रहती थी। छोटा बेटा अंकित मूक बधिर है।
बुधवार को दुर्गावती का शव घर के एक कमरे में फंदे से लटकता मिला था। गांव के लोगों का कहना था कि आर्थिक तंगी व मानसिक परेशानियों के चलते उसने आत्महत्या कर ली थी। बृहस्पतिवार की सुबह ग्राम प्रधान आशा देवी के प्रतिनिधि संजय यादव बच्चों की खोज खबर लेने पहुंचे और तीनों बच्चों की परवरिश की घोषणा की। संजय यादव ने कहा कि इन बच्चों के भोजन, आवास व पढ़ाई पर जो भी खर्च होगा वह खुद वहन करेंगे।
ग्राम कोदवट निवासी प्रमोद की दो वर्ष पहले ट्रेन हादसे में मौत हो गई थी। पत्नी दुर्गावती तीन बच्चों 10 वर्षीय अंशिका, आठ वर्षीय अंश और तीन वर्षीय अंकित की परवरिश के लिए मजदूरी करती थी। किसी तरह से बेटी अंशिका को पढ़ने के लिए हैंसर ब्लॉक के कोचरी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भेजा था। दोनों बेटों अंश व अंकित के साथ रहती थी। छोटा बेटा अंकित मूक बधिर है।
विज्ञापन
बुधवार को दुर्गावती का शव घर के एक कमरे में फंदे से लटकता मिला था। गांव के लोगों का कहना था कि आर्थिक तंगी व मानसिक परेशानियों के चलते उसने आत्महत्या कर ली थी। बृहस्पतिवार की सुबह ग्राम प्रधान आशा देवी के प्रतिनिधि संजय यादव बच्चों की खोज खबर लेने पहुंचे और तीनों बच्चों की परवरिश की घोषणा की। संजय यादव ने कहा कि इन बच्चों के भोजन, आवास व पढ़ाई पर जो भी खर्च होगा वह खुद वहन करेंगे।
विज्ञापन