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Sant Kabir Nagar News: हैंडओवर के पेच में फंसी पेयजल परियोजनाएं, नहीं हो सकीं चालू
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आठ साल पहले मेंहदावल और छह साल पहले हरिहरपुर में परियोजनाओं पर हुआ था काम
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। नगर पंचायत मेंहदावल में आठ साल और हरिहरपुर में छह साल पहले बनकर तैयार हुईं पेयजल परियोजनाएं नगर प्रशासन को हैंडओवर नहीं हो पाई। इसकी वजह से नगर वासियों को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। जल निगम शहरी, जल निगम ग्रामीण अपना-अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। ऐसे में लोगों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
आठ साल पहले 4.50 करोड़ रुपये की लागत से नगर पंचायत मेंहदावल में परियोजना को स्वीकृति मिली थी। जल निगम ग्रामीण के जरिए कार्य कराया गया था। वाटर टैंक निर्माण के बाद पाइप लाइन बिछाई गई, लेकिन ट्रायल में व्यवस्था फेल हो गई। इस दौरान पाइप लाइन में कई जगह लीकेज हो गया था। वहीं कई वार्डों में पाइप लाइन का कार्य भी अधूरा कराया गया। तत्कालीन ईओ प्रदीप कुमार ने जल निगम को पत्र लिखकर यथाशीघ्र कार्य पूर्ण कराकर नगर पंचायत प्रशासन को हैंडओवर करने को कहा था, लेकिन आठ साल बीतने के बाद भी न तो अधूरा कार्य पूरा हुआ और न ही परियोजना हैंडओवर हो पाई। इसी तरह छह साल पहले नगर पंचायत हरिहरपुर के वार्ड छह जगदीशपुर में बनकर तैयार हुई पानी की टंकी नगर प्रशासन को हस्तांतरित नहीं हो सकी। स्थिति यह है कि नगर के लोगों को पानी मिलना तो दूर अब वाटर हेडटैंक का संचालन भी ठप पड़ा हुआ है। परिसर में उगीं झाड़ियां परियोजना के दुर्दशा की गवाही दे रही हैं। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां कोई कर्मचारी नहीं आता है। दस वार्डों में बंटे नगर पंचायत हरिहरपुर में पांच सौ किलो लीटर क्षमता का वाटर हेडटैंक से पानी की सप्लाई दी जा रही है। जो इतनी बड़ी आबादी के लिए नाकाफी है। हरिहरपुर के जगदीशपुर में बनी पानी की टंकी से सप्लाई न होने के कारण नगर में पेयजल संकट बना हुआ है। गर्मी के मौसम में लोगों को जलापूर्ति की किल्लत से जूझना पड़ता है। क्षेत्र के अमित कुमार, सुनील कुमार आदि लोगों ने बताया कि जगह-जगह पाइप लाइन टूटने के चलते ट्रायल के समय ही सप्लाई फेल हो गई थी। जल निगम शहरी एक्सईएन सुदेश कुमार ने कहा कि नगर पंचायत हरिहरपुर और मेंहदावल की परियोजना अभी तक शहरी जल निगम को हस्तांतरित नहीं हुई है। जल निगम ग्रामीण के जरिए इन परियोजनाओं पर कार्य कराया गया था, जो कार्य कराया है, वही बता सकता है कि परियोजना क्यों नहीं चली और कब तक चलेगी।
पेयजल परियोजनाओं को चालू कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अवर अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं, जो भी कमियां हैं, उन्हें तत्काल दूर कराएं।
संजय जायसवाल, अधिशासी अभियंता जल निगम
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। नगर पंचायत मेंहदावल में आठ साल और हरिहरपुर में छह साल पहले बनकर तैयार हुईं पेयजल परियोजनाएं नगर प्रशासन को हैंडओवर नहीं हो पाई। इसकी वजह से नगर वासियों को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। जल निगम शहरी, जल निगम ग्रामीण अपना-अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं। ऐसे में लोगों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
आठ साल पहले 4.50 करोड़ रुपये की लागत से नगर पंचायत मेंहदावल में परियोजना को स्वीकृति मिली थी। जल निगम ग्रामीण के जरिए कार्य कराया गया था। वाटर टैंक निर्माण के बाद पाइप लाइन बिछाई गई, लेकिन ट्रायल में व्यवस्था फेल हो गई। इस दौरान पाइप लाइन में कई जगह लीकेज हो गया था। वहीं कई वार्डों में पाइप लाइन का कार्य भी अधूरा कराया गया। तत्कालीन ईओ प्रदीप कुमार ने जल निगम को पत्र लिखकर यथाशीघ्र कार्य पूर्ण कराकर नगर पंचायत प्रशासन को हैंडओवर करने को कहा था, लेकिन आठ साल बीतने के बाद भी न तो अधूरा कार्य पूरा हुआ और न ही परियोजना हैंडओवर हो पाई। इसी तरह छह साल पहले नगर पंचायत हरिहरपुर के वार्ड छह जगदीशपुर में बनकर तैयार हुई पानी की टंकी नगर प्रशासन को हस्तांतरित नहीं हो सकी। स्थिति यह है कि नगर के लोगों को पानी मिलना तो दूर अब वाटर हेडटैंक का संचालन भी ठप पड़ा हुआ है। परिसर में उगीं झाड़ियां परियोजना के दुर्दशा की गवाही दे रही हैं। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां कोई कर्मचारी नहीं आता है। दस वार्डों में बंटे नगर पंचायत हरिहरपुर में पांच सौ किलो लीटर क्षमता का वाटर हेडटैंक से पानी की सप्लाई दी जा रही है। जो इतनी बड़ी आबादी के लिए नाकाफी है। हरिहरपुर के जगदीशपुर में बनी पानी की टंकी से सप्लाई न होने के कारण नगर में पेयजल संकट बना हुआ है। गर्मी के मौसम में लोगों को जलापूर्ति की किल्लत से जूझना पड़ता है। क्षेत्र के अमित कुमार, सुनील कुमार आदि लोगों ने बताया कि जगह-जगह पाइप लाइन टूटने के चलते ट्रायल के समय ही सप्लाई फेल हो गई थी। जल निगम शहरी एक्सईएन सुदेश कुमार ने कहा कि नगर पंचायत हरिहरपुर और मेंहदावल की परियोजना अभी तक शहरी जल निगम को हस्तांतरित नहीं हुई है। जल निगम ग्रामीण के जरिए इन परियोजनाओं पर कार्य कराया गया था, जो कार्य कराया है, वही बता सकता है कि परियोजना क्यों नहीं चली और कब तक चलेगी।
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पेयजल परियोजनाओं को चालू कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अवर अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं, जो भी कमियां हैं, उन्हें तत्काल दूर कराएं।
संजय जायसवाल, अधिशासी अभियंता जल निगम