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जिले को ओडीएफ बनाने की राह आसान नहीं दिखती
Fri, 14 Dec 2018 11:44 PM IST
राकेश पांडेय
संतकबीरनगर
संतकबीरनगर
Published by: राकेश पांडेय
Updated Fri, 14 Dec 2018 11:44 PM IST
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जिले को ओडीएफ बनाने की राह आसान नहीं दिखती
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। जिले को संपूर्ण रूप से खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन महीने भर से कवायद कर रहा है, लेकिन हालात बदल ही नहीं रहे। जिले को 31 दिसंबर तक हर हाल में ओडीएफ घोषित जाना है और अब तक शत प्रतिशत गांवों की सत्यापन रिपोर्ट भी नहीं मिल पाई है, जिन गांवों की रिपोर्ट आई है वह भी संतोषजनक नहीं है। कई गांवों में अब काम शुरू हुआ है।
जिले के तीन लाख 33 हजार में से दो लाख 34 हजार घरों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शौचालय का निर्माण होना है। पंचायती राज विभाग के एमआईएस डाटा के अनुसार निर्माण हो चुका है लेकिन जियो टैगिंग (निर्माण की फोटो) अब भी करीब डेढ़ लाख शौचालयों की ही हो पाई है। इसके चलते ही जिला ओडीएफ घोषित नहीं हो पा रहा है। बीते 19 नवंबर को बस्ती मंडल के आयुक्त ने बैठक में अधिकारियों को हिदायत देते हुए नाराजगी जताई, तब जाकर निगरानी में तेजी आई। इसके बाद से ही डीपीआरओ समेत पूरा विभाग गांव-गांव घूमकर शौचालय निर्माण की जमीनी हकीकत देख रहा है। बावजूद इसके लक्ष्य अब भी दूर है। ओडीएफ घोषित करने के लिए जरूरी जिला स्तरीय सत्यापन का कार्य भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है। शुक्रवार तक जिले की 793 में से 611 ग्राम पंचायतों की ही सत्यापन रिपोर्ट मिल सकी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो आई रिपोर्ट में भी कई ग्राम पंचायतों को लेकर आपत्तियां हैं जिनको दूर किया जा रहा है। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि वह प्रतिदिन किसी न किसी ग्राम पंचायत का निरीक्षण कर रहे हैं। इसके अलावा सभी एडीओ पंचायत व ग्राम पंचायत अधिकारी भी अपने-अपने क्षेत्र में मॉनीटरिंग कर रहे हैं। जल्द ही जिले को ओडीएफ घोषित करा दिया जाएगा। सीडीओ हाकिम सिंह का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम शौचालय बन तो गए हैं, लेकिन जियो टैगिंग नहीं होने से दिक्कत आ रही है। इसीलिए कर्मचारियों को जियो टैगिंग में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लोगों को शौचालय प्रयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसका अच्छा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।
जिले के तीन लाख 33 हजार में से दो लाख 34 हजार घरों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शौचालय का निर्माण होना है। पंचायती राज विभाग के एमआईएस डाटा के अनुसार निर्माण हो चुका है लेकिन जियो टैगिंग (निर्माण की फोटो) अब भी करीब डेढ़ लाख शौचालयों की ही हो पाई है। इसके चलते ही जिला ओडीएफ घोषित नहीं हो पा रहा है। बीते 19 नवंबर को बस्ती मंडल के आयुक्त ने बैठक में अधिकारियों को हिदायत देते हुए नाराजगी जताई, तब जाकर निगरानी में तेजी आई। इसके बाद से ही डीपीआरओ समेत पूरा विभाग गांव-गांव घूमकर शौचालय निर्माण की जमीनी हकीकत देख रहा है। बावजूद इसके लक्ष्य अब भी दूर है। ओडीएफ घोषित करने के लिए जरूरी जिला स्तरीय सत्यापन का कार्य भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है। शुक्रवार तक जिले की 793 में से 611 ग्राम पंचायतों की ही सत्यापन रिपोर्ट मिल सकी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो आई रिपोर्ट में भी कई ग्राम पंचायतों को लेकर आपत्तियां हैं जिनको दूर किया जा रहा है। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि वह प्रतिदिन किसी न किसी ग्राम पंचायत का निरीक्षण कर रहे हैं। इसके अलावा सभी एडीओ पंचायत व ग्राम पंचायत अधिकारी भी अपने-अपने क्षेत्र में मॉनीटरिंग कर रहे हैं। जल्द ही जिले को ओडीएफ घोषित करा दिया जाएगा। सीडीओ हाकिम सिंह का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम शौचालय बन तो गए हैं, लेकिन जियो टैगिंग नहीं होने से दिक्कत आ रही है। इसीलिए कर्मचारियों को जियो टैगिंग में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लोगों को शौचालय प्रयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसका अच्छा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।
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