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देवी के जयकारों के बीच विसर्जन
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Wed, 12 Oct 2016 10:55 PM IST
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विसऱ्जन
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में नवरात्र पर दुर्गा पूजा के लिए स्थापित प्रतिमाओं में से 618 का विसर्जन विजयदशमी के दिन मंगलवार और बुधवार को पूजन के बाद पास के नदी घाटोें पर शांतिपूर्ण ढंग से किया गया।
जिला मुख्यालय पर मंगलवार की देर शाम तक मूर्तियां नगर परिक्रमा के बाद मगहर के लिए प्रस्थान कीं, जिन्हें आमी नदी में विसर्जित किया गया। मगहर प्रतिनिधि के अनुसार मंगलवार को आयोजक समिति के सदस्य मूर्तियों के साथ कसबे में जुलूस की शक्ल में भ्रमण किए। इसके बाद प्रतिमाओं का आमी नदी के तट पर शांतिपूर्ण माहौल में विसर्जन किया गया। बघौली प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र की प्रतिमाओं का विसर्जन आमी नदी के तट पर बालूशासन घाट पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
बेलहर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन आमी नदी के राजघाट, पड़रिया घाट व गोनहा घाट पर हुआ। इसके साथ ही करीब डेढ़ दर्जन मूर्तियों का विसर्जन ढोढ़या स्थित झील में हुआ। इस बीच शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में दशहरा पर्व की रौनक बाजारों में दिखी। खलीलाबाद में नगर परिक्रमा के लिए निकली मूर्तियों के मां समय जी, रामजानकी मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर तथा डॉ. बंगाली द्वारा स्थापित प्रतिमा व उसके पीछे अन्य दुर्गा मंडपों की प्रतिमाएं निकलीं। जिनके पीछे नवयुवकों की टोलियां भक्ति गीतों के धुन पर नृत्य करती हुई देखी गई। अपने दरवाजे से होकर जाने पर श्रद्धालु मूर्तियों के जुलूस के देख रहे थे।
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मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार कसबे में नगर परिक्रमा के बाद प्रतिमाओं का शांतिपूर्ण ढंग से राप्ती और बखिरा झील में विसर्जन हुआ। सांथा प्रतिनिधि के अनुसार सांथा, गनवरिया, निघुरी में स्थापित मूर्तियों का विसर्जन झुडिया नाला पर विसर्जित हुई। धर्मसिंहवा प्रतिनिधि के अनुसार देवी की प्रतिमा छिबरा, गौरीराई, धर्मसिहवा, पुनया, बढ़या मेंहदूपार की गांव में भ्रमण के बाद बूढ़ी राप्ती में विसर्जित की गई। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि जनपद में 640 मूर्तिया स्थापित थीं। शांतिपूर्ण माहौल में मंगलवार को 501 और बुधवार को 117 मूर्तियों का विसर्जन हुआ। कुछ मूर्तियों रह गई है जिनका विसर्जन पूर्णिमा को होगा।
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जिला मुख्यालय पर मंगलवार की देर शाम तक मूर्तियां नगर परिक्रमा के बाद मगहर के लिए प्रस्थान कीं, जिन्हें आमी नदी में विसर्जित किया गया। मगहर प्रतिनिधि के अनुसार मंगलवार को आयोजक समिति के सदस्य मूर्तियों के साथ कसबे में जुलूस की शक्ल में भ्रमण किए। इसके बाद प्रतिमाओं का आमी नदी के तट पर शांतिपूर्ण माहौल में विसर्जन किया गया। बघौली प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र की प्रतिमाओं का विसर्जन आमी नदी के तट पर बालूशासन घाट पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
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बेलहर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन आमी नदी के राजघाट, पड़रिया घाट व गोनहा घाट पर हुआ। इसके साथ ही करीब डेढ़ दर्जन मूर्तियों का विसर्जन ढोढ़या स्थित झील में हुआ। इस बीच शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में दशहरा पर्व की रौनक बाजारों में दिखी। खलीलाबाद में नगर परिक्रमा के लिए निकली मूर्तियों के मां समय जी, रामजानकी मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर तथा डॉ. बंगाली द्वारा स्थापित प्रतिमा व उसके पीछे अन्य दुर्गा मंडपों की प्रतिमाएं निकलीं। जिनके पीछे नवयुवकों की टोलियां भक्ति गीतों के धुन पर नृत्य करती हुई देखी गई। अपने दरवाजे से होकर जाने पर श्रद्धालु मूर्तियों के जुलूस के देख रहे थे।
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मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार कसबे में नगर परिक्रमा के बाद प्रतिमाओं का शांतिपूर्ण ढंग से राप्ती और बखिरा झील में विसर्जन हुआ। सांथा प्रतिनिधि के अनुसार सांथा, गनवरिया, निघुरी में स्थापित मूर्तियों का विसर्जन झुडिया नाला पर विसर्जित हुई। धर्मसिंहवा प्रतिनिधि के अनुसार देवी की प्रतिमा छिबरा, गौरीराई, धर्मसिहवा, पुनया, बढ़या मेंहदूपार की गांव में भ्रमण के बाद बूढ़ी राप्ती में विसर्जित की गई। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि जनपद में 640 मूर्तिया स्थापित थीं। शांतिपूर्ण माहौल में मंगलवार को 501 और बुधवार को 117 मूर्तियों का विसर्जन हुआ। कुछ मूर्तियों रह गई है जिनका विसर्जन पूर्णिमा को होगा।