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बाढ़ ने छीन ली खरीफ की फसल, अब रबी की बुआई पर संकट
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बाढ़ ने छीन ली खरीफ की फसल, अब रबी की बुआई पर संकट
93 हजार हेक्टेयर में होनी है रबी की बुआई, नहीं मिल पा रही खाद
76 समितियों में सिर्फ 50 ही सक्रिय, कई पर लटके हैं ताले
सचिवों पर दो से तीन समितियों की जिम्मेदारी, भटक रहे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अतिवृष्टि और बाढ़ ने किसानों की खरीफ की फसल छीन ली। इससे किसान अभी उबर भी नहीं पाए हैं। इसी बीच रबी की बुआई पर भी संकट खड़ा हो गया है। कारण यह है कि कई समितियों पर खाद गायब हो गई है, तो कई पर ताला लटका हुआ है। आम किसान खाद के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारी सब कुछ ठीकठाक बता रहे हैं।
जनपद में इस सीजन में 93 हजार हेक्टेयर में रबी की बुआई होनी है। गेहूं की फसल के लिए करीब 12 हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है, जबकि 9500 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत जताई जा रही है। जहां तक खाद की उपलब्धता की बात है तो जिले में वर्तमान में 8500 मीट्रिक टन यूरिया मिली है। जबकि अभी तक 5230 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध हो पाई है। 15 नवंबर से 30 नवंबर तक रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुआई का पीक समय है, लेकिन खाद की किल्लत बनी हुई है। सबसे गंभीर बात यह है कि जिले में कुल 76 साधन सहकारी समितियां हैं, लेकिन वर्तमान में इनमें से मात्र 50 समितियां ही सक्रिय हैं। कई समितियों पर खाद की कमी बनी हुई तो कई पर ताले लटके हुए हैं। यही नहीं सचिवों पर दो से तीन समितियों की जिम्मेदारी है। ऐसे में एक समिति खुलती है तो दूसरी समिति बंद रहती है। ऐसे में किसान समितियों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन ताला बंद होने से निराश लौटने के लिए मजबूर हो रहे हैं। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साधन सहकारी समिति चकदही इस सीजन में एक भी दिन नहीं खुली। सोमवार को साधन सहकारी समिति धनघटा, बंडा बाजार, अजावं, रजनौली, भगवानपुर, बड़गों, खिरिया, नंदौर, पिपरा कला आदि समितियां या तो बंद रहीं या फिर खाद नहीं बंटी। यहां पहुंचने वालों किसानों को निराश होकर लौटना पड़ा। किसान रामकरन यादव, राधेश्याम, दिलीप कुमार आदि ने कहा कि खाद के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जहां खाद आ रही है, वहां पर भी रसूख वालों को तरजीह मिल रही है। आम किसानों को धक्के खाने पड़ रहे हैं।
इंसेट-
इफको डीएपी की एक रैक आई है, जिसका वितरण तीन से चार दिनों में शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही अन्य कंपनियों की डीएपी भी आ रही है। उन्होंने कहा कि दो नवंबर से 15 नवंबर तक सचिवों की हड़ताल के कारण दिक्कत आई थी, अब हड़ताल समाप्त हो गई है। सचिवों की कमी है, जिसके कारण सचिवों पर दो से तीन समितियों की जिम्मेदारी है। ऐसे में दिक्कत आ रही है। इसके बाद भी किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए विभाग कटिबद्ध है।
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-पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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93 हजार हेक्टेयर में होनी है रबी की बुआई, नहीं मिल पा रही खाद
76 समितियों में सिर्फ 50 ही सक्रिय, कई पर लटके हैं ताले
सचिवों पर दो से तीन समितियों की जिम्मेदारी, भटक रहे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अतिवृष्टि और बाढ़ ने किसानों की खरीफ की फसल छीन ली। इससे किसान अभी उबर भी नहीं पाए हैं। इसी बीच रबी की बुआई पर भी संकट खड़ा हो गया है। कारण यह है कि कई समितियों पर खाद गायब हो गई है, तो कई पर ताला लटका हुआ है। आम किसान खाद के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारी सब कुछ ठीकठाक बता रहे हैं।
जनपद में इस सीजन में 93 हजार हेक्टेयर में रबी की बुआई होनी है। गेहूं की फसल के लिए करीब 12 हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है, जबकि 9500 मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत जताई जा रही है। जहां तक खाद की उपलब्धता की बात है तो जिले में वर्तमान में 8500 मीट्रिक टन यूरिया मिली है। जबकि अभी तक 5230 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध हो पाई है। 15 नवंबर से 30 नवंबर तक रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुआई का पीक समय है, लेकिन खाद की किल्लत बनी हुई है। सबसे गंभीर बात यह है कि जिले में कुल 76 साधन सहकारी समितियां हैं, लेकिन वर्तमान में इनमें से मात्र 50 समितियां ही सक्रिय हैं। कई समितियों पर खाद की कमी बनी हुई तो कई पर ताले लटके हुए हैं। यही नहीं सचिवों पर दो से तीन समितियों की जिम्मेदारी है। ऐसे में एक समिति खुलती है तो दूसरी समिति बंद रहती है। ऐसे में किसान समितियों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन ताला बंद होने से निराश लौटने के लिए मजबूर हो रहे हैं। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साधन सहकारी समिति चकदही इस सीजन में एक भी दिन नहीं खुली। सोमवार को साधन सहकारी समिति धनघटा, बंडा बाजार, अजावं, रजनौली, भगवानपुर, बड़गों, खिरिया, नंदौर, पिपरा कला आदि समितियां या तो बंद रहीं या फिर खाद नहीं बंटी। यहां पहुंचने वालों किसानों को निराश होकर लौटना पड़ा। किसान रामकरन यादव, राधेश्याम, दिलीप कुमार आदि ने कहा कि खाद के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जहां खाद आ रही है, वहां पर भी रसूख वालों को तरजीह मिल रही है। आम किसानों को धक्के खाने पड़ रहे हैं।
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इफको डीएपी की एक रैक आई है, जिसका वितरण तीन से चार दिनों में शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही अन्य कंपनियों की डीएपी भी आ रही है। उन्होंने कहा कि दो नवंबर से 15 नवंबर तक सचिवों की हड़ताल के कारण दिक्कत आई थी, अब हड़ताल समाप्त हो गई है। सचिवों की कमी है, जिसके कारण सचिवों पर दो से तीन समितियों की जिम्मेदारी है। ऐसे में दिक्कत आ रही है। इसके बाद भी किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए विभाग कटिबद्ध है।
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-पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी