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Sant Kabir Nagar News: राह बन जाएगी तुम चलो तो सही, चाह बन जाएगी तुम चलो तो सही

Sun, 28 May 2023 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Sun, 28 May 2023 11:23 PM IST
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cultural activity organized
खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में आयोजित जन साहित्यक मंच के काव्य गोष्ठी में काव्य पाठ करते कवि।संवाद
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में कवि गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें मुख्य अतिथि एवं युवा कवि राजेश मृदुल ने अपनी रचना-राह बन जाएगी तुम चलो तो सही, चाह बन जाएगी तुम चलो तो सही। सुनाकर वाहवाही लूटी।
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विशिष्ट अतिथि मजहर खलीलाबादी ने वहशियों ने घेर रखा है चमन, हाथ रखे बैठे हैं हम हाथ पर। सुनाकर चमन पर मंडरा रहे खतरे की ओर इशारा किया। ओम प्रकाश गौतम ने- कर चुका मैं कितना करता हौसला, दो कदम की मेरी जानिब न चला, सुनाया, जिसे सराहा गया।
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गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमल ने- डगमग लगता है मुझे तेरी अब तो चाल, अब पन सौंवा नोट भी बदल चुका है हाल। सुनाकर बार-बार हो रही नोट बंदी पर तंज कसा। सरदार हरिभजन सिंह ने प्रभु तेरे रहमतों के सार जब से करीब आए, राहों में थे अंधेरे अब तारे जगमगाए। सुनाकर वाहवाही लूटी। डॉ. सईद अख्तर बस्तवी ने- फूल भी महकते हैं डालियां महकती हैं, यूूं बहार आई है वादियां महकती हैं, सुनाकर प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया।
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वयोवृद्ध रचनाकार छविराज राज ने, खतरे से बेखबर सोते को जगाकर देखो, दिल के दरम्यान से नफरत भगाकर देखो। सुनाकर नेक काम करने की सलाह दी। सूरज कुुंवर सरस ने- अध्यक्ष को कोई भाई नहीं है, सभासद में कोई सपाई नहीं है। सुनाकर सबको खूब हंसाया। पवन सबा ने- रात कब ढल गई कब सहर हो गई, ख्वाब में नींद यूूं बेखबर हो गई, सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुंचाया।
गोष्ठी का संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने- आओ अपने वतन की बात करें, प्यारे-प्यारे चमन की बात करें। सुनाकर देश प्रेम की भावना को जागृत किया। राधेश्याम मिश्र श्याम ने- राजा कैसे बन जाएं वो सोचें दिनरात, हो जाते हैं वो दुखी दे विपक्ष ना साथ। सुनाकर राजतंत्र की ओर बढ़ रहे आकर्षण की ओर इशारा किया। शारिक खलीलाबादी ने - काश ऐसा मेरी आंखों में भी जादू आए, आइना जब भी मैं देखूं तो नजर तू आए। सुनाकर माहौल को रोमांटिक बना दिया। राजेंद्र बहादुर सिंह हंस ने- लोग अब भी यातनाएं सह रहे हैं, और गंदी बस्तियों में रह रहे हैं, सुनाकर गरीबों की याद दिलाई।

फिरोज बशर ने मेरी आदत हैं कि मैं जुर्म से लड़ जाता हूं, क्या बताऊं कि मेरे खून के अंदर क्या है। सुनाकर अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया। गोष्ठी में अकील अहमद, शिखा पांडेय, अवनीश कुमार, शुभेंद्र कुमार यादव ने भी अपनी रचना प्रस्तुत की।
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