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पूर्व बीएसए, लेखाधिकारी पर मुकदमा दर्ज होगा
sant kabir nagar
Updated Wed, 20 Jul 2016 11:37 PM IST
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अनुचित लाभ प्राप्त कर अपंजीकृत एवं फर्जी सेवा प्रदाता एजेंसी के चयन के मामले में सीजेएम ने पूर्व बीएसए और सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी समेत छह लोगों पर केस दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश आरटीआई कार्यकर्ता विनोद प्रताप सिंह द्वारा दायर की गई अपील की सुनवाई के दौरान दी।
आरटीआई कार्यकर्ता विनोद प्रताप सिंह का आरोप था कि संतकबीरनगर विकास खंड संसाधन केंद्रों पर एक कंप्यूटर ऑपरेटर तथा एक सहायक लेखाकार का चयन सेवा प्रदाता के माध्यम से संविदा के आधार पर किया जाना था। जिसके चयन के लिए 25 मई 2011 को विज्ञापन प्रकाशित हुआ था।
तत्कालीन बीएसए रामशंकर ने छह जून 2011 को निविदा खोलने के लिए सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी सर्व शिक्षा अभियान जिला समन्वयक बेसिक शिक्षा , जिला समन्वयक प्रशिक्षण एवं उप बेसिक शिक्षा अधिकारी संतकबीरनगर को समिति का सदस्य बनाया। 10 जून 2011 को सेवा प्रदाता एजेंसी के प्रतिनिधियों के समक्ष निविदा खोला गया एवं सबसे कम सर्विस चार्ज के आधार पर मेसर्स कार्मिक मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ का चयन किया गया।
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फर्म ने बिना विज्ञापन प्रकाशित किए नौ कंप्यूटर आपरेटर तथा दस सहायक लेखाकारों का चयन मनमाने ढंग से किया। विनोद सिंह ने 29 सितंबर 2011 को डीएम को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर प्रकरण के जांच मांग की। शिकायती प्रार्थना पत्र को पूर्व बीएसए ने 26 नवंबर 2011 को निराधार और बेबुनियाद बताया। आरोप था कि सेवा प्रदाता एजेंसी का पंजीकरण केंद्रीय उत्पादन शुल्क विभाग एवं श्रम विभाम में नहीं है।
बीएसए रामशंकर एवं रामपाल के जरिए आख्या प्रस्तुत की गई है जिसका पता कार्मिक मैनेजमेंट 1/456 विराम खंड गोमती नगर लखनऊ व कार्मिक मैनेजमेंट सर्विसेज प्रथम तल एस चैंबर 11,5 पार्क रोड हजरतगंज लखनऊ है ,वह पंजीकृत नहीं है। सीजेएम संजय गौड़ ने प्रकरण की सुनवाई के बाद मामले को अत्यंत गंभीर अपराध की कोटि में मानते हुए 19 जुलाई को मुकदमा दर्ज करने का आदेश कोतवाली पुलिस को दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस मुकदमें की विवेचना इंसपेक्टर रैंक से नीचे के पद से कराया जाना उचित नहीं होगा। तत्कालीन बीएसए रमाशंकर वर्तमान में अमेठी डायट में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर तैनात हैं।
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आरटीआई कार्यकर्ता विनोद प्रताप सिंह का आरोप था कि संतकबीरनगर विकास खंड संसाधन केंद्रों पर एक कंप्यूटर ऑपरेटर तथा एक सहायक लेखाकार का चयन सेवा प्रदाता के माध्यम से संविदा के आधार पर किया जाना था। जिसके चयन के लिए 25 मई 2011 को विज्ञापन प्रकाशित हुआ था।
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तत्कालीन बीएसए रामशंकर ने छह जून 2011 को निविदा खोलने के लिए सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी सर्व शिक्षा अभियान जिला समन्वयक बेसिक शिक्षा , जिला समन्वयक प्रशिक्षण एवं उप बेसिक शिक्षा अधिकारी संतकबीरनगर को समिति का सदस्य बनाया। 10 जून 2011 को सेवा प्रदाता एजेंसी के प्रतिनिधियों के समक्ष निविदा खोला गया एवं सबसे कम सर्विस चार्ज के आधार पर मेसर्स कार्मिक मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ का चयन किया गया।
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फर्म ने बिना विज्ञापन प्रकाशित किए नौ कंप्यूटर आपरेटर तथा दस सहायक लेखाकारों का चयन मनमाने ढंग से किया। विनोद सिंह ने 29 सितंबर 2011 को डीएम को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर प्रकरण के जांच मांग की। शिकायती प्रार्थना पत्र को पूर्व बीएसए ने 26 नवंबर 2011 को निराधार और बेबुनियाद बताया। आरोप था कि सेवा प्रदाता एजेंसी का पंजीकरण केंद्रीय उत्पादन शुल्क विभाग एवं श्रम विभाम में नहीं है।
बीएसए रामशंकर एवं रामपाल के जरिए आख्या प्रस्तुत की गई है जिसका पता कार्मिक मैनेजमेंट 1/456 विराम खंड गोमती नगर लखनऊ व कार्मिक मैनेजमेंट सर्विसेज प्रथम तल एस चैंबर 11,5 पार्क रोड हजरतगंज लखनऊ है ,वह पंजीकृत नहीं है। सीजेएम संजय गौड़ ने प्रकरण की सुनवाई के बाद मामले को अत्यंत गंभीर अपराध की कोटि में मानते हुए 19 जुलाई को मुकदमा दर्ज करने का आदेश कोतवाली पुलिस को दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस मुकदमें की विवेचना इंसपेक्टर रैंक से नीचे के पद से कराया जाना उचित नहीं होगा। तत्कालीन बीएसए रमाशंकर वर्तमान में अमेठी डायट में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर तैनात हैं।