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बालक की हत्या के आरोपियों को उम्रकैद
Fri, 29 Mar 2019 11:46 PM IST
राकेश पांडेय
संतकबीरनगर
संतकबीरनगर
Published by: राकेश पांडेय
Updated Fri, 29 Mar 2019 11:46 PM IST
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संतकबीरनगर। मेंहदावल क्षेत्र के वरनापुर गांव से गई एक बरात में शामिल 11 वर्षीय बालक की हत्या के मामले में तीन लोगों को जिला जज ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों को 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इस मामले में एक अभियुक्त फरार है। जबकि एक अभियुक्त पहले से ही बस्ती जिला कारागार में है।
वरनापुर गांव निवासी सुधा सिंह ने 22 अप्रैल-2016 को मेंहदावल पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनके गांव से एक बारात दुधारा गई थी। इसमें उनका 11 वर्षीय बेटा आवाज सिंह भी गया था। बढ़या ठाठर गांव निवासी इंद्रजीत यादव बेटे को बरात से ही कहीं ले गए और उसकी हत्या कर दी। मेंहदावल पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचक ने इस मामले में अभियुक्त इंद्रजीत यादव के अलावा दो और लोगों रविंदर यादव, सुमित्रा के खिलाफ भी रिपोर्ट दाखिल की। मामले की सुनवाई जिला जज की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से साक्षी के रूप में सुधा सिंह ,नैंसी सिंह, रुंधति देवी, कृष्ण, विवेचक सुधीर कुमार सिंह और डॉ. रामदास कुशवाहा का बयान अंकित कराया गया। बालक का शव नहीं मिला था। बाद में मिले कंकाल तथा उसकी माता के खून का नमूना लेकर डीएनए टेस्ट कराया गया। डीएनए टेस्ट में पुष्टि के बाद मामले में सुनवाई आगे बढ़ी। जिला जज रामानंद ने मामले की गंभीरता और साक्ष्य के आधार पर अभियुक्तगण इंद्रजीत यादव, रविंद्र यादव और सुमित्रा को आजीवन कारावास तथा 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इनमें से अभियुक्त रविंद्र यादव फरार चल रहा है जिसके विरुद्ध दोष सिद्ध वारंट जारी किया गया। दूसरा अभियुक्त इंद्रजीत पहले से ही जिला कारागार बस्ती में बंद है। सजा सुनाने के बाद तीसरी अभियुक्त सुमित्रा को जेल भेज दिया गया।
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वरनापुर गांव निवासी सुधा सिंह ने 22 अप्रैल-2016 को मेंहदावल पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनके गांव से एक बारात दुधारा गई थी। इसमें उनका 11 वर्षीय बेटा आवाज सिंह भी गया था। बढ़या ठाठर गांव निवासी इंद्रजीत यादव बेटे को बरात से ही कहीं ले गए और उसकी हत्या कर दी। मेंहदावल पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचक ने इस मामले में अभियुक्त इंद्रजीत यादव के अलावा दो और लोगों रविंदर यादव, सुमित्रा के खिलाफ भी रिपोर्ट दाखिल की। मामले की सुनवाई जिला जज की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से साक्षी के रूप में सुधा सिंह ,नैंसी सिंह, रुंधति देवी, कृष्ण, विवेचक सुधीर कुमार सिंह और डॉ. रामदास कुशवाहा का बयान अंकित कराया गया। बालक का शव नहीं मिला था। बाद में मिले कंकाल तथा उसकी माता के खून का नमूना लेकर डीएनए टेस्ट कराया गया। डीएनए टेस्ट में पुष्टि के बाद मामले में सुनवाई आगे बढ़ी। जिला जज रामानंद ने मामले की गंभीरता और साक्ष्य के आधार पर अभियुक्तगण इंद्रजीत यादव, रविंद्र यादव और सुमित्रा को आजीवन कारावास तथा 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इनमें से अभियुक्त रविंद्र यादव फरार चल रहा है जिसके विरुद्ध दोष सिद्ध वारंट जारी किया गया। दूसरा अभियुक्त इंद्रजीत पहले से ही जिला कारागार बस्ती में बंद है। सजा सुनाने के बाद तीसरी अभियुक्त सुमित्रा को जेल भेज दिया गया।
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