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वांरट तामील न कराने पर मानीटरिंग सेल के प्रभारी पर केस दर्ज करने का आदेश
Tue, 21 May 2019 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
Santkabirnagar
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 May 2019 11:23 PM IST
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Decision of court
- फोटो : amar ujala
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संतकबीरनगर। खलीलाबाद के कोतवाल कुशलपाल सिंह को सीजेएम दीपकांत मणि ने 15 मई को एक महिला के प्रकरण में सुनवाई करते हुए एक माह के कारावास की सजा सुनाई थी। जिसका वारंट तामील के लिए एसपी कार्यालय में तैनात मानीटरिंग सेल के प्रभारी अशोक कुमार यादव को नियुक्त किया गया था। वारंट तामिल में देरी होने पर सीजेएम ने मानीटरिंग सेल के प्रभारी के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश कोतवाल खलीलाबाद को दिया है।
सीजेएम कोर्ट ने 11 फरवरी 2015 को 156(3) सीआरपीसी के तहत वादिनी शाकिरा खातून के प्रकरण में कोतवाल को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। परंतु चार वर्ष बीत जाने के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इस मामले में पूर्व में भी कई बार नोटिस जारी हो चुका था। सीजेएम दीपकांत मणि ने बीते आठ मई को कोतवाल को अपना पक्ष रखने हेतु अंतिम अवसर प्रदान किया था परंतु उनके द्वारा कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। न्यायालय ने कोतवाल को कर्तव्य व दायित्व के निर्वहन में लापरवाही मानते हुए पुलिस अधिनियम की धारा 29 के तहत आदेश सुनाया। कोर्ट ने माना है कि कुशलपाल सिंह ने जानबूझकर समस्त तथ्यों से अवगत होते हुए प्राथमिकी दर्ज करने में देरी की जिससे न्याय की आस लगाए पीड़िता को न्याय से वंचित रखा गया तथा अभियुक्तगण के अनुचित प्रभाव में न्यायालय के आदेश की अवहेलना एवं विधि के निर्देश की अवज्ञा एवं पुलिस उच्चाधिकारी के निर्देश की उपेक्षा की गई तथा जानबूझकर मौलिक अधिकार का हनन कर पीड़ा दी गई। सीजेएम दीपकांत मणि ने 15 मई को सुनवाई करते हुए कोतवाल कुशलपाल सिंह को दोषी मानते हुए एक माह के कारावास से दंडित किए जाने का आदेश दिया। इसके साथ ही वारंट तामील के लिए मानीटरिंग सेल के प्रभारी अशोक यादव को आदेश दिया था। मानीटरिंग सेल के प्रभारी ने वांरट तामील समय से नहीं कराया। जिस पर कोतवाल छुट्टी पर चले गए। सीजेएम दीपकांत मणि ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए मानीटरिंग सेल के प्रभारी अशोक यादव की लापरवाही मानते हुए कोतवाली पुलिस को केस दर्ज करने का आदेश जारी किया है।
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सीजेएम कोर्ट ने 11 फरवरी 2015 को 156(3) सीआरपीसी के तहत वादिनी शाकिरा खातून के प्रकरण में कोतवाल को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। परंतु चार वर्ष बीत जाने के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इस मामले में पूर्व में भी कई बार नोटिस जारी हो चुका था। सीजेएम दीपकांत मणि ने बीते आठ मई को कोतवाल को अपना पक्ष रखने हेतु अंतिम अवसर प्रदान किया था परंतु उनके द्वारा कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। न्यायालय ने कोतवाल को कर्तव्य व दायित्व के निर्वहन में लापरवाही मानते हुए पुलिस अधिनियम की धारा 29 के तहत आदेश सुनाया। कोर्ट ने माना है कि कुशलपाल सिंह ने जानबूझकर समस्त तथ्यों से अवगत होते हुए प्राथमिकी दर्ज करने में देरी की जिससे न्याय की आस लगाए पीड़िता को न्याय से वंचित रखा गया तथा अभियुक्तगण के अनुचित प्रभाव में न्यायालय के आदेश की अवहेलना एवं विधि के निर्देश की अवज्ञा एवं पुलिस उच्चाधिकारी के निर्देश की उपेक्षा की गई तथा जानबूझकर मौलिक अधिकार का हनन कर पीड़ा दी गई। सीजेएम दीपकांत मणि ने 15 मई को सुनवाई करते हुए कोतवाल कुशलपाल सिंह को दोषी मानते हुए एक माह के कारावास से दंडित किए जाने का आदेश दिया। इसके साथ ही वारंट तामील के लिए मानीटरिंग सेल के प्रभारी अशोक यादव को आदेश दिया था। मानीटरिंग सेल के प्रभारी ने वांरट तामील समय से नहीं कराया। जिस पर कोतवाल छुट्टी पर चले गए। सीजेएम दीपकांत मणि ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए मानीटरिंग सेल के प्रभारी अशोक यादव की लापरवाही मानते हुए कोतवाली पुलिस को केस दर्ज करने का आदेश जारी किया है।
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