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होठ तो फड़फड़ाते हैं पर बरसतीं नहीं आंखें
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Thu, 22 Nov 2018 10:47 PM IST
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धनघटा क्षेत्र के दुधरा कला गांव में बिलखते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
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हैंसर (संतकबीरनगर)। घर में धमाचौकड़ी मचाना, कभी छोटे भाइयों संग खेलना तो कभी उनके खिलौने लेकर भागना। ऐसे में जब कभी वह गिरता तो एक आंचल उसके शरीर पर लगे धूल-मिट्टी साफ करते। सिर पर चपत पड़ती तो कभी कान उमेठा जाता, लेकिन आज वह आंचल छिन गया। इस सदमे ने नौ साल के मासूम संदीप को जड़ बना दिया है। उसके होठ तो फड़फड़ाते हैं पर आंखें नहीं बरसतीं। पिता का साया पहले ही सिर से उठ चुका है। अब तो दो छोटे भाइयों की जिम्मेदारी भी आन पड़ी है।
धनघटा तहसील क्षेत्र के गांव दुघरा कला निवासी विंध्याचल की लगभग आठ माह पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह मजदूरी कर लौटते वक्त मुड़ाडीहा मार्ग पर ट्रक की चपेट में आ गए थे। लाश जब घर पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी रंजू और तीन मासूम बच्चों पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार में कोई और न था जो उनका सहारा बनता। बड़े बेटे संदीप ने पिता को मुखाग्नि दी। समय के साथ संदीप, मंदीप (7) और मनीष (5) के घाव भरने लगे पर सदमे ने रंजू का बीमार कर दिया। तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो उसने खाट पकड़ ली। घर की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि बेहतर इलाज हो पाता। आस-पड़ोस और रिश्तेदारों की मदद से थोड़ा-बहुत इलाज हुआ, लेकिन रंजू की तबीयत नहीं सुधरी और बृहस्पतिवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। मां की मौत मंदीप और मनीष तो फूट-फूटकर रो पड़े पर संदीप जड़ बना बैठा रहा। बीच-बीच में छोटे भाइयों को देख उसके होठ हिलते, लेकिन न तो वह कुछ बोलता और न ही उसकी आंखों से आंसू टपकते। दिन में गांव वालों की मदद से रंजू का अंतिम संस्कार कर दिया गया। संदीप ने मां को मुखाग्नि दी। माता-पिता दोनों को खो चुके संदीप पर अब दो छोटे भाइयों की जिम्मेदारी है, जबकि वह खुद मासूम है। उम्र महज नौ साल है।
एसडीएम बोले, दिलाई जाएगी मदद
संदीप की आपबीती सुन एसडीएम धनघटा बाबूराम भी गमगीन हो गए। उन्होंने कहा कि वह खुद शुक्रवार को गांव जाएंगे और बच्चों को देखेंगे। उन्होंने कहा कि तीनों मासूमों के भोजन, पढ़ाई और दवाई का इंतजाम कराया जाएगा। उन्हें सरकारी योजनाओं का भी लाभ दिलाया जाएगा। उधर, गांव निवासी जिला पंचायत सदस्य संतोष चौहान और अन्य ग्रामीणों रामदीन चौहान, रोहित, ओमबीर, श्यामलाल, रामजीत आदि ने बताया कि सबने मिलकर रंजू का अंतिम संस्कार तो कर दिया, लेकिन अब बच्चों को देखने वाला कोई नहीं। घर की हालत भी ऐसी नहीं कि दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो जाए।
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धनघटा तहसील क्षेत्र के गांव दुघरा कला निवासी विंध्याचल की लगभग आठ माह पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह मजदूरी कर लौटते वक्त मुड़ाडीहा मार्ग पर ट्रक की चपेट में आ गए थे। लाश जब घर पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी रंजू और तीन मासूम बच्चों पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार में कोई और न था जो उनका सहारा बनता। बड़े बेटे संदीप ने पिता को मुखाग्नि दी। समय के साथ संदीप, मंदीप (7) और मनीष (5) के घाव भरने लगे पर सदमे ने रंजू का बीमार कर दिया। तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो उसने खाट पकड़ ली। घर की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि बेहतर इलाज हो पाता। आस-पड़ोस और रिश्तेदारों की मदद से थोड़ा-बहुत इलाज हुआ, लेकिन रंजू की तबीयत नहीं सुधरी और बृहस्पतिवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। मां की मौत मंदीप और मनीष तो फूट-फूटकर रो पड़े पर संदीप जड़ बना बैठा रहा। बीच-बीच में छोटे भाइयों को देख उसके होठ हिलते, लेकिन न तो वह कुछ बोलता और न ही उसकी आंखों से आंसू टपकते। दिन में गांव वालों की मदद से रंजू का अंतिम संस्कार कर दिया गया। संदीप ने मां को मुखाग्नि दी। माता-पिता दोनों को खो चुके संदीप पर अब दो छोटे भाइयों की जिम्मेदारी है, जबकि वह खुद मासूम है। उम्र महज नौ साल है।
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एसडीएम बोले, दिलाई जाएगी मदद
संदीप की आपबीती सुन एसडीएम धनघटा बाबूराम भी गमगीन हो गए। उन्होंने कहा कि वह खुद शुक्रवार को गांव जाएंगे और बच्चों को देखेंगे। उन्होंने कहा कि तीनों मासूमों के भोजन, पढ़ाई और दवाई का इंतजाम कराया जाएगा। उन्हें सरकारी योजनाओं का भी लाभ दिलाया जाएगा। उधर, गांव निवासी जिला पंचायत सदस्य संतोष चौहान और अन्य ग्रामीणों रामदीन चौहान, रोहित, ओमबीर, श्यामलाल, रामजीत आदि ने बताया कि सबने मिलकर रंजू का अंतिम संस्कार तो कर दिया, लेकिन अब बच्चों को देखने वाला कोई नहीं। घर की हालत भी ऐसी नहीं कि दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो जाए।
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