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आबकारी विभाग का हाल
Updated Sat, 07 Jul 2018 11:00 PM IST
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कच्ची शराब का गढ़ बन रहा जिला
संसाधन की कमी से कमजोर पड़ रही आबकारी विभाग की मुहिम
राजस्व का लक्ष्य बढ़ा पर नहीं बढ़ीं सुविधाएं, धक्का देकर स्टार्ट होती है जीप
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। आबकारी विभाग की मुहिम कमजोर पड़ने से जिला कच्ची शराब का गढ़ बनता जा रहा है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि केवल राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य बढ़ाया जा रहा है, संसाधन नहीं। धक्का देकर स्टार्ट होने वाली सरकारी जीप ऊबड़-खाबड़ जगहों पर कच्ची शराब के अड्डों पर पहुंच ही नहीं पाती है। वैसे विभाग की ओर से कच्ची शराब के धंधे पर रोक लगाने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन हकीकत इससे उलट है।
आबकारी विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष अप्रैल से जून तक 6120 लीटर कच्ची शराब बरामद हुई थी और 233 लोगों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। जबकि इस वर्ष अप्रैल से जून तक सिर्फ 519 लीटर कच्ची शराब पकड़ी गई है और 39 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। जिले के लगभग सभी थाना क्षेत्रों में कच्ची शराब का धंधा चल रहा है।
आबकारी विभाग की ओर से कच्ची शराब के धंधों केलिए चिह्नित जगहों में खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के जूरी, अशरफपुर, बंजरिया, कोलकी, अमहवा, डिहुलिया, मेंहदावल तहसील क्षेत्र के भिडौरा-पिकौरा, भगौसा, बढ़या ठाठर, सोनबरसा, चिरैयाडाड़, भगौसा, अव्वल केवटलिया, पक्का पोखरा और धनघटा तहसील क्षेत्र के घोरांग, कोचरी, सोनाड़ी, बालमपुर, पड़रिया, चपरा पूर्वी और मूड़ाडीहा शामिल है। इसके अलावा जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित ईंट-भट्ठों पर भी कच्ची शराब बनाई और बेची जाती है। आबकारी विभाग के पास उपलब्ध संसाधन के नाम पर सिर्फ दो इंस्पेक्टर हैं। इंस्पेक्टर का एक पद रिक्त है। क्लर्क के दो पदों में एक रिक्त है। संविदा पर एक गाड़ी थी, जिसे पिछले साल हटा दिया गया था। विभाग के पास 2001 मॉडल की एक सरकारी जीप है, जिसे धक्का देकर स्टार्ट किया जाता है।
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राजस्व की बात करें तो पिछले वर्ष 95.6 करोड़ का लक्ष्य था और विभाग ने 112 करोड़ की वसूली की। इस साल राजस्व का लक्ष्य बढ़ा कर 182 करोड़ कर दिया गया है। अप्रैल से जून तक 46.85 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष विभाग ने 37.65 करोड़ की वसूली कर ली है। यह पिछले साल की तुलना में 12 करोड़ अधिक है। जिला आबकारी अधिकारी प्रकाश सिंह ने कहा कि यह सच है कि पिछले साल संविदा की गाड़ी हटा ली गई है। जो सरकारी जीप है, उसे धक्का देना पड़ता है। सरकारी जीप को कंडम घोषित कर नीलाम कराने की कार्रवाई चल रही है। वैसे गाड़ी समेत रिक्त पदों को भरने के बाबत आबकारी आयुक्त को पत्र भेजा गया है। वैसे कच्ची शराब के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कच्ची शराब के धंधे को बंद कराने का पूरा प्रयास हो रहा है। जो लोग कच्ची के धंधे में संलिप्त पाए जाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।
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संसाधन की कमी से कमजोर पड़ रही आबकारी विभाग की मुहिम
राजस्व का लक्ष्य बढ़ा पर नहीं बढ़ीं सुविधाएं, धक्का देकर स्टार्ट होती है जीप
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। आबकारी विभाग की मुहिम कमजोर पड़ने से जिला कच्ची शराब का गढ़ बनता जा रहा है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि केवल राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य बढ़ाया जा रहा है, संसाधन नहीं। धक्का देकर स्टार्ट होने वाली सरकारी जीप ऊबड़-खाबड़ जगहों पर कच्ची शराब के अड्डों पर पहुंच ही नहीं पाती है। वैसे विभाग की ओर से कच्ची शराब के धंधे पर रोक लगाने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन हकीकत इससे उलट है।
आबकारी विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष अप्रैल से जून तक 6120 लीटर कच्ची शराब बरामद हुई थी और 233 लोगों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। जबकि इस वर्ष अप्रैल से जून तक सिर्फ 519 लीटर कच्ची शराब पकड़ी गई है और 39 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। जिले के लगभग सभी थाना क्षेत्रों में कच्ची शराब का धंधा चल रहा है।
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आबकारी विभाग की ओर से कच्ची शराब के धंधों केलिए चिह्नित जगहों में खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के जूरी, अशरफपुर, बंजरिया, कोलकी, अमहवा, डिहुलिया, मेंहदावल तहसील क्षेत्र के भिडौरा-पिकौरा, भगौसा, बढ़या ठाठर, सोनबरसा, चिरैयाडाड़, भगौसा, अव्वल केवटलिया, पक्का पोखरा और धनघटा तहसील क्षेत्र के घोरांग, कोचरी, सोनाड़ी, बालमपुर, पड़रिया, चपरा पूर्वी और मूड़ाडीहा शामिल है। इसके अलावा जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित ईंट-भट्ठों पर भी कच्ची शराब बनाई और बेची जाती है। आबकारी विभाग के पास उपलब्ध संसाधन के नाम पर सिर्फ दो इंस्पेक्टर हैं। इंस्पेक्टर का एक पद रिक्त है। क्लर्क के दो पदों में एक रिक्त है। संविदा पर एक गाड़ी थी, जिसे पिछले साल हटा दिया गया था। विभाग के पास 2001 मॉडल की एक सरकारी जीप है, जिसे धक्का देकर स्टार्ट किया जाता है।
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राजस्व की बात करें तो पिछले वर्ष 95.6 करोड़ का लक्ष्य था और विभाग ने 112 करोड़ की वसूली की। इस साल राजस्व का लक्ष्य बढ़ा कर 182 करोड़ कर दिया गया है। अप्रैल से जून तक 46.85 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष विभाग ने 37.65 करोड़ की वसूली कर ली है। यह पिछले साल की तुलना में 12 करोड़ अधिक है। जिला आबकारी अधिकारी प्रकाश सिंह ने कहा कि यह सच है कि पिछले साल संविदा की गाड़ी हटा ली गई है। जो सरकारी जीप है, उसे धक्का देना पड़ता है। सरकारी जीप को कंडम घोषित कर नीलाम कराने की कार्रवाई चल रही है। वैसे गाड़ी समेत रिक्त पदों को भरने के बाबत आबकारी आयुक्त को पत्र भेजा गया है। वैसे कच्ची शराब के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कच्ची शराब के धंधे को बंद कराने का पूरा प्रयास हो रहा है। जो लोग कच्ची के धंधे में संलिप्त पाए जाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।