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Sant Kabir Nagar News: खेत में पड़ीं दरारें, किसानों की चिंता बढ़ी

Fri, 04 Aug 2023 11:34 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Fri, 04 Aug 2023 11:34 PM IST
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Cracks in the field, concern of farmers increased
बारिश न होने पर सूख रही धान की फसल।
-अवर्षण से सूखने लगी धान की फसल, डीजल की महंगाई किसानों की जेब पर पड़ रही भारी
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किसान बोले- यदि 15 दिनों तक नहीं हुई बारिश तो प्रभावित होगी धान की पैदावार
संवाद न्यूज़ एजेंसी
धनधटा/मेंहदावल। जुलाई माह व्यतीत हो गया और अगस्त महीने का एक सप्ताह जाने वाला है, लेकिन बारिश नहीं हो रही है। बारिश न होने से धान की फसल सूख रही हैं। खेत में दरारें देखकर लाचार किसानों की आंख से आंसू निकल रहे हैं।
क्षेत्र के रामकेवल, रामकेश, राजाराम, घनश्याम, जगन्नाथ, रामप्रसाद आदि किसानों का कहना है कि जून महीने के आखिरी समय में बारिश हुई तो उम्मीद जगी कि इस वर्ष अच्छी बारिश होगी। बारिश के पानी से तमाम किसानों ने धान की रोपाई की, लेकिन जब धान के बढ़ने का समय आया तो बारिश हो ही नहीं रही है। जिन किसानों के पास अपना साधन है, वे तो महंगे डीजल से सिंचाई इस उम्मीद के साथ कर रहे हैं कि आगे बारिश हो सकती है, लेकिन जिनके पास अपना संसाधन नहीं है वे 300 रुपये प्रति घंटे सिंचाई देकर धान की फसल बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। खेत में खरपतवार उग रहे हैं। अवर्षण से धान की फसल सूखने लगी है। किसानों का कहना है कि यदि 15 दिनों तक इसी तरह का मौसम रहा और बारिश नहीं हुई तो धान की पैदावार पर असर पड़ना तय है।
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बारिश के अभाव में मेंहदावल क्षेत्र में धान की फसल बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है। धान की फसल पीली होकर अब सूख रही है और खेतों में दरारें पड़ गई हैं। डीजल की महंगाई किसानों की जेब पर भारी पड़ रही है। बेलौली, घूरापाली, चिकनया डीह, विसौवा, रक्सा आदि क्षेत्रों में खेतों में दरारें पड़ गई हैं। फसलें तेजी से सूख रही हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसान देवेंद्र बहादुर सिंह, देवेंद्र तिवारी, कृष्णा नंद त्रिपाठी, रामकरण यादव, हरीश चंद यादव, उपेंद्र सिंह, योगेंद्र प्रताप सिंह, रणविजय शाही आदि लोगों का कहना है कि पंपिंग सेट से खेतों की सिंचाई करने में काफी लागत पड़ रहा है। डीजल की कीमत आसमान छू रही है। बारिश न होने के कारण फसलें सूख रही है। यही हाल रहा तो इस बार यह इस क्षेत्र के किसान सूखे की मार झेलेंगे। किसानों को कर्जदार बना पड़ेगा। धान की फसल करने से पहले जिन किसानों ने बैंक से केसीसी का लोन लिया है या किसी अन्य से कर्ज उठाया है, उन किसानों की मुसीबत बढ़ गई है।
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