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Sant Kabir Nagar News: बिजली निगम को 50 हजार रुपये अदा करने का आदेश

Wed, 14 Jun 2023 12:43 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jun 2023 12:43 AM IST
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court news componcetion
संवाद न्यूज एजेंसी
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संतकबीरनगर। जिला उपभोक्ता फोरम ने बिजली निगम के खिलाफ फैसला सुनाया। पीड़ित के खिलाफ वसूली वारंट निरस्त कर दिया। संपूर्ण हिसाब करके पीड़ित को आदेश के दिन से 60 दिन के अंदर प्रदान करने का आदेश दिया। इसके साथ ही मानसिक सामाजिक हानि, मुकदमा खर्च के रूप में 50,000 रुपये पीड़ित को अदा करने को कहा।
अधिवक्ता राकेश कुमार पाठक ने बताया कि पुत्सर पोस्ट महोबरा तहसील धनघटा के रहने वाले सिद्धनाथ पांडेय ने जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद दाखिल किया, जिसमें कहा कि वह बिजली कनेक्शन धारक हैं। उक्त कनेक्शन 2008 में नलकूप, आटा चक्की व्यक्तिगत प्रयोग के लिए लिया। वर्ष 2013 तक नियमित रूप से बिजली बिल जमा करता रहे। वर्ष 2015 तक बिजली निगम का कोई भी बकाया नहीं था। दिसंबर 2013 में परिवादी के कनेक्शन पर बिजली निगम के जरिये लगाया गया मीटर खराब हो गया। इसकी सूचना परिवादी ने बिजली निगम को दिया। बिजली निगम ने परिवादी के खराब मीटर को नहीं बदला।
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दिसंबर 2013 में विद्युत मीटर खराब हो जाने से बिजली निगम के जरिये अनुमानित बिजली बिल परिवादी को भेजा जाने लगा। परिवादी का अधिकतम विद्युत बिल 3000 से 4000 रुपये तक महीना आता रहा। अचानक 10,000 से 12,000 रुपये तक अनुमानित बिल बिजली निगम द्वारा दिया जाने लगा। कई बार सुधार करने के लिए संपर्क किया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। परिवादी का बिजली कनेक्शन 2019 में काट दिया गया और परिवादी के विरुद्ध विद्युत बकाया वसूली वारंट 1356633 रुपये का भेजा गया। परेशान होकर परिवादी ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
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उपभोक्ता फोरम ने विपक्षीगण अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड खलीलाबाद तथा अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड मंडल खलीलाबाद बिजली निगम के विरुद्ध परिवादी का परिवाद पत्र स्वीकार किया। विपक्षी के विरुद्ध आदेश दिया कि पीड़ित के विरुद्ध जारी अधिभार सहित बिजली बिल और वसूली वारंट पांच जनवरी 2023 को निरस्त किया जाता है। बिजली निगम को यह भी निर्देश दिया कि वह वर्ष 2008 से 2023 तक का संपूर्ण हिसाब नियमानुसार करके परिवादी को निर्णय की तिथि से 60 दिन के अंदर अदा करें, जिससे परिवादी बकाया बिलों का भुगतान समय से कर सकें। इसके साथ ही मानसिक सामाजिक हानि क्षतिपूर्ति मुकदमा खर्च के रूप में 50,000 रुपये भी पीड़ित को बिजली निगम अदा करें।
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