{"_id":"675b249ab22588c4960147ac","slug":"council-school-exams-from-23rd-december-khalilabad-news-c-209-1-sgkp1040-125407-2024-12-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: परिषदीय विद्यालयों की परीक्षा 23 दिसंबर से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: परिषदीय विद्यालयों की परीक्षा 23 दिसंबर से
Thu, 12 Dec 2024 11:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 12 Dec 2024 11:31 PM IST
विज्ञापन
सोनभद्र। रेडियोलॉजिस्ट विहीन जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा को नियमित रखने के लिए निजी केंद्रों को जिम्मेदारी दी गई है। शेड्यूल के तहत रोजाना एक-एक निजी केंद्र के रेडियोलॉजिस्ट की जिला अस्पताल में ड्यूटी लगाई गई है, मगर ज्यादातर केंद्रों से सिर्फ टेक्नीशियन ही जिला अस्पताल में भेजे जा रहे हैं। वही मरीजों की जांच कर रहे हैं और रिपोर्ट दे रहे हैं। इससे न सिर्फ जांच की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि मरीजों का जीवन भी खतरे में है।
जिले में 52 अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं। सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को निशुल्क सेवा निर्बाध रूप से मुहैया कराने के लिए पूर्व डीएम चंद्रविजय सिंह ने यह व्यवस्था बनाई थी कि प्रत्येक निजी केंद्र के चिकित्सक एक-एक दिन जिला अस्पताल में भी अपनी सेवा देंगे। इससे धनाभाव में मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। शुरुआत में सख्ती के बाद कुछ दिनों तक यह व्यवस्था चली, मगर अब ज्यादातर केंद्र सिर्फ औपचारिकता ही निभा रहे हैं। उनकी ओर से चिकित्सक के बजाय टेक्नीशियन को भेजा जा रहा है। इसकी बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि ज्यादातर केंद्रों पर डॉक्टर हैं ही नहीं। दूसरे जिले में तैनात किसी डॉक्टर से किराये पर डिग्री लेकर उन्होंने अल्ट्रासाउंड केंद्र का पंजीकरण करा लिया है, जबकि संचालन वहां बिना डिग्री वाला व्यक्ति ही करता है। इससे मरीजों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ उन्हें विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिल रही तो दूसरी ओर इसी रिपोर्ट से उपचार में उनकी सेहत पर भी खतरा बना हुआ है।
टेक्नीशियन ही करता रहा जांच
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए अनपरा स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर के चिकित्सक की ड्यूटी लगी थी। लेकिन करीब साढ़े दस बजे चिकित्सक के बजाए केंद्र का संचालक, टेक्नीशियन के साथ अस्पताल पहुंचा। टेक्नीशियन ही अधिकांश मरीजों की जांच करता रहा। मरीजाें को इसकी कोई जानकारी नहीं थी।
विज्ञापन
एक चिकित्सक के डिग्री पर दो केंद्र, दूरी 135 किमी
जिले में किस तरह से डिग्री के भरोसे मानक को दरकिनार कर अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत कर दिए गए हैं, इसे दो सेंटरों की दूरी से समझा जा सकता है। दुद्धी बाजार स्थित मिशन डायग्नोस्टिक सेंटर का डॉ. एमके सिन्हा के नाम पर पंजीकरण किया गया है, जबकि घोरावल बाजार स्थित समर डायग्नोस्टिक सेंटर का पंजीकरण भी इन्हीं चिकित्सक के भरोसे हैं। दोनों केंद्रों के बीच की दूरी 135 किमी से अधिक हैं। एक सेंटर से दूसरे सेंटर जाने में पहाड़ी इलाके होने के कारण चार घंटे लगते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि एक ही चिकित्सक दो जगह कैसे बैठ सकता है।
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड व्यवस्था के संचालन के लिए निजी केंद्रों के चिकित्सकों की एक-एक दिन ड्यूटी लगाई जाती है। उन्हें समय पर आकर जांच करनी है। अगर किसी तरह की लापरवाही बरती जा रही है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।
-- --
विज्ञापन
जिले में 52 अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं। सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को निशुल्क सेवा निर्बाध रूप से मुहैया कराने के लिए पूर्व डीएम चंद्रविजय सिंह ने यह व्यवस्था बनाई थी कि प्रत्येक निजी केंद्र के चिकित्सक एक-एक दिन जिला अस्पताल में भी अपनी सेवा देंगे। इससे धनाभाव में मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। शुरुआत में सख्ती के बाद कुछ दिनों तक यह व्यवस्था चली, मगर अब ज्यादातर केंद्र सिर्फ औपचारिकता ही निभा रहे हैं। उनकी ओर से चिकित्सक के बजाय टेक्नीशियन को भेजा जा रहा है। इसकी बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि ज्यादातर केंद्रों पर डॉक्टर हैं ही नहीं। दूसरे जिले में तैनात किसी डॉक्टर से किराये पर डिग्री लेकर उन्होंने अल्ट्रासाउंड केंद्र का पंजीकरण करा लिया है, जबकि संचालन वहां बिना डिग्री वाला व्यक्ति ही करता है। इससे मरीजों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ उन्हें विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिल रही तो दूसरी ओर इसी रिपोर्ट से उपचार में उनकी सेहत पर भी खतरा बना हुआ है।
विज्ञापन
टेक्नीशियन ही करता रहा जांच
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए अनपरा स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर के चिकित्सक की ड्यूटी लगी थी। लेकिन करीब साढ़े दस बजे चिकित्सक के बजाए केंद्र का संचालक, टेक्नीशियन के साथ अस्पताल पहुंचा। टेक्नीशियन ही अधिकांश मरीजों की जांच करता रहा। मरीजाें को इसकी कोई जानकारी नहीं थी।
विज्ञापन
एक चिकित्सक के डिग्री पर दो केंद्र, दूरी 135 किमी
जिले में किस तरह से डिग्री के भरोसे मानक को दरकिनार कर अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत कर दिए गए हैं, इसे दो सेंटरों की दूरी से समझा जा सकता है। दुद्धी बाजार स्थित मिशन डायग्नोस्टिक सेंटर का डॉ. एमके सिन्हा के नाम पर पंजीकरण किया गया है, जबकि घोरावल बाजार स्थित समर डायग्नोस्टिक सेंटर का पंजीकरण भी इन्हीं चिकित्सक के भरोसे हैं। दोनों केंद्रों के बीच की दूरी 135 किमी से अधिक हैं। एक सेंटर से दूसरे सेंटर जाने में पहाड़ी इलाके होने के कारण चार घंटे लगते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि एक ही चिकित्सक दो जगह कैसे बैठ सकता है।
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड व्यवस्था के संचालन के लिए निजी केंद्रों के चिकित्सकों की एक-एक दिन ड्यूटी लगाई जाती है। उन्हें समय पर आकर जांच करनी है। अगर किसी तरह की लापरवाही बरती जा रही है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।