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Sant Kabir Nagar News: साजिश, राजनीति, पुलिस लापरवाही या कुछ और...
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संतकबीरनगर। बखिरा थाना क्षेत्र के अमरडोभा चौराहे पर गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान हुए विवाद के बाद जिले का सियासी पारा भी चढ़ गया है। घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पूरी घटना सियासी साजिश, राजनीति, पुलिस लापरवाही या कुछ और के बीच चक्कर लगा रही है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने जिले के एक पूर्व जन प्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं घटना को लेकर भाजपा नेताओं ने चुप्पी साध रखी है। जबकि पूर्व जन प्रतिनिधि का भी कोई बयान सामने नहीं आया है। वहीं अब इस प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है।
सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद और जुलूस में शामिल लोगों के बीच हुए विवाद में दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद मामला अपहरण और हत्या की साजिश के आरोप तक पहुंच गया। सांसद के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने वाले संतोषपुर निवासी विशाल कुमार को अगवा कर हत्या करने की साजिश रचने के आरोप में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने विशाल को सांसद के घर ले जाने के बहाने बुलाया था। आरोप है कि वहां नोटरी पर हस्ताक्षर कराने के बाद उसे कार से अयोध्या ले जाकर हत्या करने की साजिश थी। पुलिस ने सोमवार देर रात कांटे के पास से विशाल को बरामद कर लिया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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विसर्जन जुलूस में हुए विवाद से लेकर प्राथमिकी में नामजदगी और फिर शिकायतकर्ता के लापता होने तक की घटनाओं ने जिले का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
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पर्ची व चालान की अफवाह को लेकर पहले पुलिस से हुई तनातनी
स्थानीय लोगों व प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो शाम करीब छह बजे विसर्जन के लिए मूर्ति लेकर श्रद्धालु निकले और स्कूल तिराहे पर पहुंचे। विसर्जन के लिए मूर्ति की नंबरिंग करके पुलिस ने पर्ची आयोजन मंडल को सौंपी थी। कई मूर्तियों पर एक नंबर मिलने के बाद मूर्ति आगे पीछे होने से विवाद शुरू हो गया। पुलिस और आयोजक मंडल एक दूसरे पर आरोप मढ़ने लगे। नाम न छापने की शर्त पर कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इसी बीच एक अधिकारी के द्वारा किसी डीजे के चालान की अफवाह फैली। इसके बाद अन्य डीजे संचालक धीरे-धीरे वहां से अपना डीजे लेकर खिसकने लगे। किसी तरह आयोजक मंडल अमरडोभा तिराहे तक पहुंचे और वहां बुरी तरह से जाम लग गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लोगों की मान मनौव्वल में जुट गए।
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बैरिकेडिंग पर नहीं रुका सांसद का काफिला
प्रत्यक्षदर्शियों की बात पर भरोसा करें, तो अमरडोभा चौराहे पर जाम लगने के बाद पुलिस ने स्कूल तिराहा के पास बैरिकेडिंग की। इसी दौरान सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद समर्थकों के साथ तीन-चार गाड़ियों के काफिले में पहुंचे। पुलिसकर्मी आगे बढ़कर उन्हें रोकने का प्रयास कर ही रहे थे कि काफिले की गाड़ियां हूटर बजाते हुए तेज रफ्तार से आगे बढ़कर जुलूस के बीच से निकलने लगीं। आरोप है कि इसी दौरान विशाल एक गाड़ी की चपेट में आकर गिर गया और बेहोश हो गया। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद लोग नाराज हो गए। दोनों से विवाद हुआ और पूरी घटना सामने आई। पुलिस ने किसी तरह से मामला शांत कराकर उन्हें वहां से हटाया। करीब 50 मीटर आगे जाकर सांसद और उनके समर्थक बीच सड़क में धरने पर बैठ गए। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने उन्हें समझाबुझाकर शांत कराया और थाने लेकर गए। वहां सांसद व उनके समर्थकों का पुलिस ने मेडिकल कराने का प्रयास किया तो उन लोगों ने मना कर दिया और घर चले गए।
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कार्रवाई की मांग पर अड़े सपाई
अगले दिन सपा नेता कार्रवाई की मांग पर अड़ गए। डीएम और एसपी ने मिलकर कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही सपा नेताओं ने एक पूर्व जन प्रतिनिधि पर इस घटना को लेकर तरह-तरह का आरोप मढ़ना शुरू कर दिए। इसके बाद शनिवार आधी रात के बाद पुलिस ने पहले विशाल और फिर सांसद की तहरीर पर एक दूसरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच व अन्य विधिक कार्रवाई शुरू कर दी।
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सांसद पर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद चढ़ा सियासी पारा
सपा सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की सूचना के बाद सियासी पारा चढ़ गया। चर्चा है कि रविवार को देर शाम समाजवादी पार्टी के पूर्व विधान सभा प्रत्याशी जय राम पांडेय बखिरा थाने पहुंचे। उन्होंने विशाल के भाई से बात की और विभिन्न प्रकार के आरोप प्रत्यारोप का दौर चला। उधर दिन से ही विशाल गायब था और देर रात को पुलिस ने विशाल के भाई ओम प्रकाश की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर विशाल की खोज शुरू की। इसके बाद एसपी ने पूरी घटना का खुलासा किया।
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सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद और जुलूस में शामिल लोगों के बीच हुए विवाद में दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद मामला अपहरण और हत्या की साजिश के आरोप तक पहुंच गया। सांसद के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने वाले संतोषपुर निवासी विशाल कुमार को अगवा कर हत्या करने की साजिश रचने के आरोप में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
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पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने विशाल को सांसद के घर ले जाने के बहाने बुलाया था। आरोप है कि वहां नोटरी पर हस्ताक्षर कराने के बाद उसे कार से अयोध्या ले जाकर हत्या करने की साजिश थी। पुलिस ने सोमवार देर रात कांटे के पास से विशाल को बरामद कर लिया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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विसर्जन जुलूस में हुए विवाद से लेकर प्राथमिकी में नामजदगी और फिर शिकायतकर्ता के लापता होने तक की घटनाओं ने जिले का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
पर्ची व चालान की अफवाह को लेकर पहले पुलिस से हुई तनातनी
स्थानीय लोगों व प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो शाम करीब छह बजे विसर्जन के लिए मूर्ति लेकर श्रद्धालु निकले और स्कूल तिराहे पर पहुंचे। विसर्जन के लिए मूर्ति की नंबरिंग करके पुलिस ने पर्ची आयोजन मंडल को सौंपी थी। कई मूर्तियों पर एक नंबर मिलने के बाद मूर्ति आगे पीछे होने से विवाद शुरू हो गया। पुलिस और आयोजक मंडल एक दूसरे पर आरोप मढ़ने लगे। नाम न छापने की शर्त पर कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इसी बीच एक अधिकारी के द्वारा किसी डीजे के चालान की अफवाह फैली। इसके बाद अन्य डीजे संचालक धीरे-धीरे वहां से अपना डीजे लेकर खिसकने लगे। किसी तरह आयोजक मंडल अमरडोभा तिराहे तक पहुंचे और वहां बुरी तरह से जाम लग गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लोगों की मान मनौव्वल में जुट गए।
बैरिकेडिंग पर नहीं रुका सांसद का काफिला
प्रत्यक्षदर्शियों की बात पर भरोसा करें, तो अमरडोभा चौराहे पर जाम लगने के बाद पुलिस ने स्कूल तिराहा के पास बैरिकेडिंग की। इसी दौरान सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद समर्थकों के साथ तीन-चार गाड़ियों के काफिले में पहुंचे। पुलिसकर्मी आगे बढ़कर उन्हें रोकने का प्रयास कर ही रहे थे कि काफिले की गाड़ियां हूटर बजाते हुए तेज रफ्तार से आगे बढ़कर जुलूस के बीच से निकलने लगीं। आरोप है कि इसी दौरान विशाल एक गाड़ी की चपेट में आकर गिर गया और बेहोश हो गया। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद लोग नाराज हो गए। दोनों से विवाद हुआ और पूरी घटना सामने आई। पुलिस ने किसी तरह से मामला शांत कराकर उन्हें वहां से हटाया। करीब 50 मीटर आगे जाकर सांसद और उनके समर्थक बीच सड़क में धरने पर बैठ गए। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने उन्हें समझाबुझाकर शांत कराया और थाने लेकर गए। वहां सांसद व उनके समर्थकों का पुलिस ने मेडिकल कराने का प्रयास किया तो उन लोगों ने मना कर दिया और घर चले गए।
कार्रवाई की मांग पर अड़े सपाई
अगले दिन सपा नेता कार्रवाई की मांग पर अड़ गए। डीएम और एसपी ने मिलकर कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही सपा नेताओं ने एक पूर्व जन प्रतिनिधि पर इस घटना को लेकर तरह-तरह का आरोप मढ़ना शुरू कर दिए। इसके बाद शनिवार आधी रात के बाद पुलिस ने पहले विशाल और फिर सांसद की तहरीर पर एक दूसरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच व अन्य विधिक कार्रवाई शुरू कर दी।
सांसद पर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद चढ़ा सियासी पारा
सपा सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की सूचना के बाद सियासी पारा चढ़ गया। चर्चा है कि रविवार को देर शाम समाजवादी पार्टी के पूर्व विधान सभा प्रत्याशी जय राम पांडेय बखिरा थाने पहुंचे। उन्होंने विशाल के भाई से बात की और विभिन्न प्रकार के आरोप प्रत्यारोप का दौर चला। उधर दिन से ही विशाल गायब था और देर रात को पुलिस ने विशाल के भाई ओम प्रकाश की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर विशाल की खोज शुरू की। इसके बाद एसपी ने पूरी घटना का खुलासा किया।