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कॉलेज शिक्षकों ने काली पट्टा बांधी, धरना दिया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Feb 2018 12:21 AM IST
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एचआरपीजी कॉलेज में अपनी मांगो को लेकर धरना देते महाविद्यालय शिक्षक संघ के पदाधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों और पुरानी पेंशन स्कीम को लागू किए जाने समेत 24 सूत्रीय मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक के बैनर तले शिक्षकों ने सोमवार को कार्य बहिष्कार कर एचआरपीजी कॉलेज में काली पट्टा बांध कर धरना दिया। मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन रजिस्टर्ड डाक से भेजा।
महाविद्यालय शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष डॉ. विजय कृष्ण ओझा ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू न कर सरकार शिक्षकों के साथ अन्याय कर रही है। इसे महाविद्यालय शिक्षक महासंघ बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने मानदेय शिक्षकों की समस्याओं के साथ ही पुरानी पेंशन स्कीम बहाली का मुद्दा उठाया।
नई पेंशन स्कीम से आच्छादित शिक्षकों की तुरंत कटौती शुरू करने की मांग की। कॅरियर प्रोन्नति योजना के अंतर्गत महाविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों को प्रोफेसर पदनाम देने की वकालत की। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह ने कहा कि प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को मेडिकल की सुविधा नहीं मिल रही है।
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उन्हें भी राज्य कर्मचारियों की तरह सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने, सभी शिक्षकों को ग्रेच्युटी, अवकाश, नकदीकरण एवं पीएचडी वेतन वृद्धि का लाभ देने की मांग की। सभी शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति एचआरए देने और महाविद्यालय में रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति की मांग उठाई।
इस दौरान उपाध्यक्ष डॉ. डीएन पांडेय, डॉ. प्रत्यूष दुबे, मंत्री डॉ. दिनेश कुमार गुप्त, डॉ. प्रताप विजय कुमार, डॉ. मंजू मिश्रा, डॉ. गणेश श्रीवास्तव, डॉ. बृजेश कुमार त्रिपाठी, डॉ. संध्या राय, हेमंत कुमार गौतम, डॉ. नेहा सिंह, अमित भारती, डॉ. अनुभव श्रीवास्तव, डॉ. महेंद्र कुमार सुल्तानिया, डॉ. योगेश पाल आदि मौजूद रहे।
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महाविद्यालय शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष डॉ. विजय कृष्ण ओझा ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू न कर सरकार शिक्षकों के साथ अन्याय कर रही है। इसे महाविद्यालय शिक्षक महासंघ बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने मानदेय शिक्षकों की समस्याओं के साथ ही पुरानी पेंशन स्कीम बहाली का मुद्दा उठाया।
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नई पेंशन स्कीम से आच्छादित शिक्षकों की तुरंत कटौती शुरू करने की मांग की। कॅरियर प्रोन्नति योजना के अंतर्गत महाविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों को प्रोफेसर पदनाम देने की वकालत की। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह ने कहा कि प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को मेडिकल की सुविधा नहीं मिल रही है।
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उन्हें भी राज्य कर्मचारियों की तरह सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने, सभी शिक्षकों को ग्रेच्युटी, अवकाश, नकदीकरण एवं पीएचडी वेतन वृद्धि का लाभ देने की मांग की। सभी शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति एचआरए देने और महाविद्यालय में रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति की मांग उठाई।
इस दौरान उपाध्यक्ष डॉ. डीएन पांडेय, डॉ. प्रत्यूष दुबे, मंत्री डॉ. दिनेश कुमार गुप्त, डॉ. प्रताप विजय कुमार, डॉ. मंजू मिश्रा, डॉ. गणेश श्रीवास्तव, डॉ. बृजेश कुमार त्रिपाठी, डॉ. संध्या राय, हेमंत कुमार गौतम, डॉ. नेहा सिंह, अमित भारती, डॉ. अनुभव श्रीवास्तव, डॉ. महेंद्र कुमार सुल्तानिया, डॉ. योगेश पाल आदि मौजूद रहे।