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Sant Kabir Nagar News: जिला अस्पताल की इमरजेंसी में घायल को भर्ती करने में देरी पर सीएमओ सख्त
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जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे मरीज। संवाद
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में घायल को उपचार के लिए पहुंचाया गया। इस दौरान लापरवाही पर स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई। एंबुलेंस से लाए गए एक घायल को तत्काल भर्ती न किए जाने की सूचना मिलते ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रामानुज कनौजिया स्वयं जिला अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे एक घायल को एंबुलेंस कर्मियों द्वारा जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। मौके पर मौजूद एंबुलेंस कर्मियों ने आरोप लगाया कि मरीज के साथ कोई परिजन या अटेंडर मौजूद न होने के कारण भर्ती प्रक्रिया में देरी हुई, जिससे अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
मामले की जानकारी मिलते ही सीएमओ डॉ. रामानुज कनौजिया तत्काल अस्पताल पहुंचे और ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. एसके श्रीवास्तव से पूरे प्रकरण की जानकारी ली। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि आपातस्थिति में आने वाले किसी भी मरीज के इलाज में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।
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सीएमओ ने कहा कि मरीज के साथ अटेंडर या परिजन का होना उपचार की अनिवार्य शर्त नहीं हो सकता। आपातकालीन सेवाओं में प्रत्येक मरीज का इलाज प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देशित किया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो तथा स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
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जानकारी के अनुसार शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे एक घायल को एंबुलेंस कर्मियों द्वारा जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। मौके पर मौजूद एंबुलेंस कर्मियों ने आरोप लगाया कि मरीज के साथ कोई परिजन या अटेंडर मौजूद न होने के कारण भर्ती प्रक्रिया में देरी हुई, जिससे अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
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मामले की जानकारी मिलते ही सीएमओ डॉ. रामानुज कनौजिया तत्काल अस्पताल पहुंचे और ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. एसके श्रीवास्तव से पूरे प्रकरण की जानकारी ली। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि आपातस्थिति में आने वाले किसी भी मरीज के इलाज में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।
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सीएमओ ने कहा कि मरीज के साथ अटेंडर या परिजन का होना उपचार की अनिवार्य शर्त नहीं हो सकता। आपातकालीन सेवाओं में प्रत्येक मरीज का इलाज प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देशित किया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो तथा स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।