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Sant Kabir Nagar News: गाजर घास मानव स्वास्थ्य, फसलों और पर्यावरण के लिए खतरा

Sun, 23 Aug 2026 10:40 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 23 Aug 2026 10:40 PM IST
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Carrot grass poses a threat to human health, crops, and the environment.
गाजर घास के बारे में जानकारी देते पदा​धिकारी। स्रोत-सूचना विभाग
संतकबीरनगर। कृषि विज्ञान केंद्र के तत्वावधान में कृषि विज्ञान केंद्र पर गाजर घास जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को गाजर घास के दुष्प्रभाव, नियंत्रण एवं उन्मूलन के प्रति जागरूक किया गया। विद्यार्थियों को गाजर घास के प्रसार को रोकने की शपथ भी दिलाई गई।
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कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सीपीएन गौतम ने कहा कि गाजर घास अत्यंत आक्रामक एवं तेजी से फैलने वाला खरपतवार है। विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में तेजी से बढ़ने, फूलने और बीज बनाने की क्षमता के कारण इसका प्रसार लगातार बढ़ रहा है। इससे फसलों की उत्पादकता के साथ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार ने कहा कि गाजर घास मानव स्वास्थ्य, पशुओं, कृषि फसलों तथा पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। इसके परागकणों के संपर्क में आने से एलर्जी, त्वचा संबंधी समस्याएं तथा श्वसन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने घर, विद्यालय और आसपास के क्षेत्रों में गाजर घास की पहचान कर इसके उन्मूलन के लिए लोगों को जागरूक करने की अपील की।
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कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि गाजर घास का पौधा सामान्यतः 3–4 फीट तक लंबा होता है तथा एक पौधा हजारों सूक्ष्म बीज पैदा कर सकता है। वैज्ञानिक डॉ. तरुण कुमार ने बताया कि गाजर घास को फूल आने से पहले उखाड़कर नष्ट करना, इसके प्रसार को रोकने का प्रभावी उपाय है। उन्होंने इसके अवशेषों के सुरक्षित प्रबंधन, कंपोस्ट निर्माण तथा प्राकृतिक खेती में जैविक संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया।

वैज्ञानिक डाॅ. दुर्गेश कुमार मौर्य ने बताया की बीज हवा और पानी के माध्यम से तेजी से फैलते हैं। धान, मक्का, ज्वार, सोयाबीन, मटर, तिल, गन्ना, बाजरा, मूंगफली, सब्जियों एवं उद्यानिकी फसलों में इसका प्रकोप देखा जाता है। इस दौरान वैज्ञानिक डॉ. अभिनव सिंह, डॉ. धर्मेंद्र कुमार आदि ने भी जानकारी दी।
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