{"_id":"57cc5faf4f1c1be242317565","slug":"by-observing-the-life-of-the-husband-wished","type":"story","status":"publish","title_hn":"व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना की
sant kabir nagar
Updated Sun, 04 Sep 2016 11:23 PM IST
विज्ञापन
हरितालिका तीज के अवसर पर रविवार को महिलाओं ने दिनभर निर्जल व्रत रखकर शाम को गौरीशंकर की पूजा की।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरितालिका तीज के अवसर पर रविवार को महिलाओं ने दिनभर निर्जल व्रत रखकर शाम को गौरीशंकर की पूजा की। साथ सुहागिनों ने पति के दीर्घायु की काम की। वहीं युवतियों ने मनवांछित वर की कामना के लिए व्रत रखा।
मान्यता है कि भाद्र पद शुक्ल पक्ष की तीज को देवी पार्वती ने निर्जल व्रत रहते हुए शिव की उपासना की और मनवांछित वर पाया था।
दिनभर निर्जला व्रत के बाद महिलाएं सजधज कर शिवमंदिरों में जुटीं। यहां भगवान गौरीश्ंाकर की फल-फूल, सुहाग के वस्त्र, चूड़ी, सिंदूर आदि चढ़ाकर पूजन किया। इस दौरान मंगलगीत का गायन किया। खलीलाबाद शहर की रहने वाली मंजूसा, राजलक्ष्मी, वंदना, प्रियंका आदि ने बताया कि भोर में दान करने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।
पंडित वाचस्पति द्विवेदी के अनुसार हरितालिका तीज के दिन ही मां पार्वती ने शिव लिंग की स्थापना करके भगवान शिव को पति के रूप में पाने की कठिन तपस्या आरंभ की थी। कई वर्षों तक कठिन तपस्या के बाद मां पार्वती को भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त हुए। इस पवित्र व्रत को करने से पति का प्रेम प्राप्त होता है। भगवान शिव और मां पार्वती को एक साथ प्रसन्न करने का विशेष अवसर होता है। पंडित हरि प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि जो महिला बीमार या गर्भवती है। यह व्रत उनके पति रह सकते हैं। इस व्रत की खासियत है कि इस व्रत की परंपरा नहीं टूटनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
मान्यता है कि भाद्र पद शुक्ल पक्ष की तीज को देवी पार्वती ने निर्जल व्रत रहते हुए शिव की उपासना की और मनवांछित वर पाया था।
दिनभर निर्जला व्रत के बाद महिलाएं सजधज कर शिवमंदिरों में जुटीं। यहां भगवान गौरीश्ंाकर की फल-फूल, सुहाग के वस्त्र, चूड़ी, सिंदूर आदि चढ़ाकर पूजन किया। इस दौरान मंगलगीत का गायन किया। खलीलाबाद शहर की रहने वाली मंजूसा, राजलक्ष्मी, वंदना, प्रियंका आदि ने बताया कि भोर में दान करने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।
विज्ञापन
पंडित वाचस्पति द्विवेदी के अनुसार हरितालिका तीज के दिन ही मां पार्वती ने शिव लिंग की स्थापना करके भगवान शिव को पति के रूप में पाने की कठिन तपस्या आरंभ की थी। कई वर्षों तक कठिन तपस्या के बाद मां पार्वती को भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त हुए। इस पवित्र व्रत को करने से पति का प्रेम प्राप्त होता है। भगवान शिव और मां पार्वती को एक साथ प्रसन्न करने का विशेष अवसर होता है। पंडित हरि प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि जो महिला बीमार या गर्भवती है। यह व्रत उनके पति रह सकते हैं। इस व्रत की खासियत है कि इस व्रत की परंपरा नहीं टूटनी चाहिए।
विज्ञापन