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Sant Kabir Nagar News: अपार आईडी बनने की धीमी प्रगति पर बीएसए सख्त
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संतकबीरनगर। परिषद विद्यालयों में अध्ययनरत 309186 विद्यार्थियों में से अभी तक 194325 विद्यार्थियों की अपार आईडी बनी है। इसमें से 114861 विद्यार्थियों की अपार आईडी नहीं बन पाई है। शेष विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने के काम में धीमी प्रगति पर विभाग ने नाराजगी जताई है। संबंधित प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए कि प्राथमिकता से शेष विद्यार्थियों की आईडी बनाएं।
एमईएस इंचार्ज शिव प्रसाद चौधरी ने बताया कि परिषद द्वारा संचालित सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत 111279 विद्यार्थियों में से 94974 की, एडेड स्कूलों में अध्ययनरत 2989 में से 2698 की अपार आईडी बन चुकी है। इसमें क्रमशः 15305 करीब 16.95 प्रतिशत व 291 करीब 9.74 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी नहीं बन पाई है।
निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत 78421 बच्चों में से मात्र 37421 की और अन्य जगहों से माइग्रेटेड 9810 बच्चों में से केवल 3544 बच्चों की ही अपार आईडी बन सकी है। इस प्रकार इन विद्यालयों में से क्रमशः 40703 करीब 52.11 प्रतिशत और 6266 करीब 63.87 प्रतिशत बच्चों की अपार आईडी अभी भी पेंडिंग अवस्था में है।
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इस प्रकार अभी निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की अपार आईडी बनने की प्रक्रिया बहुत धीमी है। उन्होंने बताया कि अपार आईडी बनाने में सरकारी स्कूल आगे व निजी स्कूल पीछे हैं।
अधिकारियों के कड़े निर्देश के बाद भी निजी विद्यालय इसमें अपेक्षित रुचि नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपार आईडी से काफी लाभ मिलता है। इससे हमें ऑउट ऑफ स्कूल बच्चों को आसानी से चिह्नित करने में काफी आसानी होती है। बच्चों को डिजीलॉकर की सहायता से अकादमिक अभिलेख भी मिल सकेंगे।
प्रधानाध्यापकों को अपार आईडी से बचे बच्चों के अभिभावकों से सहमति पत्र लेकर विद्यालय स्तर पर सुरक्षित रखते हुए नामांकित सभी बच्चों की शत-प्रतिशत आईडी बनाने की कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
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एमईएस इंचार्ज शिव प्रसाद चौधरी ने बताया कि परिषद द्वारा संचालित सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत 111279 विद्यार्थियों में से 94974 की, एडेड स्कूलों में अध्ययनरत 2989 में से 2698 की अपार आईडी बन चुकी है। इसमें क्रमशः 15305 करीब 16.95 प्रतिशत व 291 करीब 9.74 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी नहीं बन पाई है।
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निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत 78421 बच्चों में से मात्र 37421 की और अन्य जगहों से माइग्रेटेड 9810 बच्चों में से केवल 3544 बच्चों की ही अपार आईडी बन सकी है। इस प्रकार इन विद्यालयों में से क्रमशः 40703 करीब 52.11 प्रतिशत और 6266 करीब 63.87 प्रतिशत बच्चों की अपार आईडी अभी भी पेंडिंग अवस्था में है।
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इस प्रकार अभी निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की अपार आईडी बनने की प्रक्रिया बहुत धीमी है। उन्होंने बताया कि अपार आईडी बनाने में सरकारी स्कूल आगे व निजी स्कूल पीछे हैं।
अधिकारियों के कड़े निर्देश के बाद भी निजी विद्यालय इसमें अपेक्षित रुचि नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपार आईडी से काफी लाभ मिलता है। इससे हमें ऑउट ऑफ स्कूल बच्चों को आसानी से चिह्नित करने में काफी आसानी होती है। बच्चों को डिजीलॉकर की सहायता से अकादमिक अभिलेख भी मिल सकेंगे।
प्रधानाध्यापकों को अपार आईडी से बचे बच्चों के अभिभावकों से सहमति पत्र लेकर विद्यालय स्तर पर सुरक्षित रखते हुए नामांकित सभी बच्चों की शत-प्रतिशत आईडी बनाने की कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया गया है।