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Sant Kabir Nagar News: मदरसा प्रबंधन की मदद से ब्रिटिश मौलाना ने गबन किया सरकारी धन
Wed, 12 Nov 2025 01:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 12 Nov 2025 01:25 AM IST
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संतकबीरनगर। ब्रिटिश मौलाला शमशुल हुदा खान ने आजमगढ़ जनपद के मुबारकपुर स्थित दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम के प्रबंधतंत्र व प्रधानाचार्य के साथ मिलकर सरकारी धन का गबन किया। मदरसे से 5 वर्ष 7 माह 3 दिन तक का अवैतनिक अवकाश लिया था।
इसके साथ ही 1 वर्ष 4 माह 17 दिन का चिकित्सीय अवकाश स्वीकृत हुआ था। जो नियम विरुद्ध था। एडीएम, एएसपी, उप निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आजगमगढ़ की जांच में इसका खुलासा हुआ था। विभाग की तरफ से मौलाना को वर्ष 2012 से 2016 तक लगातार 5 वर्ष तक बिना सेवा पुस्तिका सत्यापित किए वेतन वृद्धि भी दे दी गई थी।
मौलाना शमशुल हुदा खान की शिकायत संज्ञान में आने के बाद दिसंबर 2023 में तत्कालीन एडीएम, एएसपी व अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने मामले की गहनता से जांच की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, विभागीय जिम्मेदारों की शह पर शमशुल ने अपने मनमाफिक काम किया। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2007-2008 से ही वह ब्रिटेन में ही रह रहा था। जबकि, उसे वर्ष 2013 में ब्रिटेन की नागरिकता प्राप्त हुई। भारतीय नागरिक न रहने पर भी तथ्य छिपाकर मौलाना ने आजमगढ़ जनपद के मुबारकपुर स्थित दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम के प्रबंध तंत्र व प्रधानाचार्य के साथ मिलीभगत कर सेवा में बना रहा।
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6 नवंबर 2023 की जांच आख्या के अनुसार, एक जनवरी 2007 से 12 जुलाई 2017 के बीच मौलाना ने 5 वर्ष 7 माह 3 दिन का अवैतनिक अवकाश लिया। मदरसे के प्रधानाचार्य ने 30 दिसंबर 2012 से 27 जुलाई 2016 के बीच में भिन्न-भिन्न तिथियों में एक वर्ष 4 माह 17 दिन का चिकित्सकीय अवकाश भी स्वीकृत किया था। जबकि, किसी शासकीय अथवा शासकीय सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान में किसी कर्मी को पूरी सेवा अवधि में 365 दिन का ही चिकित्सकीय अवकाश अनुमन्य है।
जांच टीम को उपलब्ध कराई गई सेवा पुस्तिका में 8 सितंबर 2012 से लेकर 1 जुलाई 2016 तक लगातार 5 वर्ष तक बिना सेवा सत्यापित किए वेतन वृद्धि दी गई। जबकि, अभिलेख के अनुसार उस अवधि में शमशुल हुदा खान ने अध्यापन का कार्य नहीं किया था। चिकित्सकीय अवकाश भी सेवा पुस्तिका में दर्ज नहीं था। नियमत: इसे सेवा पुस्तिका में दर्ज किया जाना चाहिए था। सेवा पुस्तिका में वर्ष 2007 से लेकर 2017 तक किसी भी वर्ष की सेवा सत्यापित नहीं मिली।
उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी और फारसी मदरसा मान्यता प्रशासन सेवा नियमावली के विपरीत 1 जुलाई 2017 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रदान कर दी गई और विधिवत पेंशन की भी स्वीकृति दे दी गई।
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इसके साथ ही 1 वर्ष 4 माह 17 दिन का चिकित्सीय अवकाश स्वीकृत हुआ था। जो नियम विरुद्ध था। एडीएम, एएसपी, उप निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आजगमगढ़ की जांच में इसका खुलासा हुआ था। विभाग की तरफ से मौलाना को वर्ष 2012 से 2016 तक लगातार 5 वर्ष तक बिना सेवा पुस्तिका सत्यापित किए वेतन वृद्धि भी दे दी गई थी।
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मौलाना शमशुल हुदा खान की शिकायत संज्ञान में आने के बाद दिसंबर 2023 में तत्कालीन एडीएम, एएसपी व अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने मामले की गहनता से जांच की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, विभागीय जिम्मेदारों की शह पर शमशुल ने अपने मनमाफिक काम किया। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2007-2008 से ही वह ब्रिटेन में ही रह रहा था। जबकि, उसे वर्ष 2013 में ब्रिटेन की नागरिकता प्राप्त हुई। भारतीय नागरिक न रहने पर भी तथ्य छिपाकर मौलाना ने आजमगढ़ जनपद के मुबारकपुर स्थित दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम के प्रबंध तंत्र व प्रधानाचार्य के साथ मिलीभगत कर सेवा में बना रहा।
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6 नवंबर 2023 की जांच आख्या के अनुसार, एक जनवरी 2007 से 12 जुलाई 2017 के बीच मौलाना ने 5 वर्ष 7 माह 3 दिन का अवैतनिक अवकाश लिया। मदरसे के प्रधानाचार्य ने 30 दिसंबर 2012 से 27 जुलाई 2016 के बीच में भिन्न-भिन्न तिथियों में एक वर्ष 4 माह 17 दिन का चिकित्सकीय अवकाश भी स्वीकृत किया था। जबकि, किसी शासकीय अथवा शासकीय सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान में किसी कर्मी को पूरी सेवा अवधि में 365 दिन का ही चिकित्सकीय अवकाश अनुमन्य है।
जांच टीम को उपलब्ध कराई गई सेवा पुस्तिका में 8 सितंबर 2012 से लेकर 1 जुलाई 2016 तक लगातार 5 वर्ष तक बिना सेवा सत्यापित किए वेतन वृद्धि दी गई। जबकि, अभिलेख के अनुसार उस अवधि में शमशुल हुदा खान ने अध्यापन का कार्य नहीं किया था। चिकित्सकीय अवकाश भी सेवा पुस्तिका में दर्ज नहीं था। नियमत: इसे सेवा पुस्तिका में दर्ज किया जाना चाहिए था। सेवा पुस्तिका में वर्ष 2007 से लेकर 2017 तक किसी भी वर्ष की सेवा सत्यापित नहीं मिली।
उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी और फारसी मदरसा मान्यता प्रशासन सेवा नियमावली के विपरीत 1 जुलाई 2017 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रदान कर दी गई और विधिवत पेंशन की भी स्वीकृति दे दी गई।