फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sant Kabir Nagar News ›   bad conditions of pwerloom bussiness

महंगाई की मार से चौपट हो रहा पॉवरलूम का कारोबार

Fri, 25 Feb 2022 11:02 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 25 Feb 2022 11:02 PM IST
विज्ञापन
bad conditions of pwerloom bussiness
महंगाई की मार से चौपट हो रहा पॉवरलूम का कारोबार
विज्ञापन

बुनकरों की समस्या कभी नहीं बन पाई चुनावी मुद्दा
हर सप्ताह बढ़ रहा सूत का दाम, तैयार माल भी डंप
बिजली और पूंजी की कमी से भी प्रभावित हो रहा व्यवसाय
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरगर। कभी पॉवरलूम कारोबार से आबाद रहा जिला अब बुनकरों की आह से कराह रहा है। पीढ़ियों से हूनरमंद हाथों से लिबास बुनने वाली यह जमात अब संसाधनों की कमी और सियासतदानों की बेरुखी से व्यथित है। हर सप्ताह बढ़ती सूत की महंगाई और तैयार माल की खपत नहीं होने से धंधा चौपट हो रहा है। अधिकांश पॉवरलूम बंद हो चुके हैं और नई पीढ़ी धंधे से तौबा कर रही है। बुनकरों की यही पीड़ा है कि कभी उनकी समस्या चुनावी मुद्दा नहीं बन पाती है।
बुनकर बहुल बस्तियों की गिनती में आगे रहा जिला अपनी उस पहचान को कायम रखने में शायद ही कामयाब रहे। वजह साफ है कि इन बस्तियों में हथकरघे और पॉवरलूम की तेज आवाज थम गई है। अपने पुरनियों से सीखी कपड़ा बुनने की कलाकारी, अब उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए तरसा रही है। बढ़ती सूत की महंगाई ने कारोबार पर ग्रहण लगा दिया है। जिले के खलीलाबाद, अमरडोभा, लेडुआ-महुआ, मेंहदावल कस्बा, बेलहर कला, मगहर कस्बे की गलियों में अपनी कारीगरी से कपड़ा बुनते बुनकरों की बेबसी देखी जा सकती है। समय की मार और सरकारों की उपेक्षा ने इलाके के सैकड़ों परिवारों को बदहाली की कगार पर ला दिया है। धागों की गठजोड़ से सबके लिए तन ढकने का इंतजाम करने वाले बुनकरों की जिंदगी इन्हीं धागों के बीच उलझ कर रह गई है। कभी इन गलियों के बीच चहकती जिंदगी अब बेरंग है। बुनकरों की मानें तो सूबे की सरकारों से लेकर दिल्ली की सरकारों तक ने इनके लिए कुछ नहीं किया। पुरानी पीढ़ी के दौर में हथकरघे तकनीक की भेंट चढ़ गए तो नए जमाने में पॉवरलूम सूत की महंगाई से थम गए हैं। कोविड काल के बाद से चौपट हुआ धंधा अभी पटरी पर लौट नहीं पा रहा है। चुनाव आता है तो उम्मीद बंधती है, लेकिन बुनकरों की समस्या कभी चुनावी मुद्दा नहीं बन पाती है।
विज्ञापन

सूत के दाम लगातार बढ़ने से समस्या खड़ी हो गई है। तैयार माल का खपत नहीं हो पा रहा है। जिससे बुनकरों की पूंजी फंस गई है। बरईपार में बुनकरों के लिए अलग से बिजली से फीडर बन रहा है, जिसकी गति सुस्त है। इसके बन जाने से बिजली की समस्या समाप्त हो जाएगी। लेडुआ, महुआ बुनकर बहुल है और यहां एक भी जूनियर हाईस्कूल नहीं है। बंद मगहर कताई मिल और प्रोसेस हाउस खलीलाबाद को चालू कराना चाहिए। चुनाव में यह मुद्दा बनना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- हाजी इमामुद्दीन अंसारी, जिलाध्यक्ष बुनकर सभा
यह धंधा उनके पुर्खे भी करते थे। 1972 से पुश्तैनी धंधे को वह आगे बढ़ा रहे थे। गमछा, लुंगी, शर्टिग बनाते हैं। एक साल के भीतर सूत का दाम हर सप्ताह बढ़ता है। तैयार माल की खपत नहीं हो पा रही है। जिसकी वजह से पॉवरलूम बंद होते जा रहे हैं। बुनकरों की समस्या चुनाव में मुद्दा बनना चाहिए।
- बदरुज्जमा अंसारी, अंसार टोला
पीढ़ियों से यह परिवार का धंधा रहा है। मोहल्ले में 90 प्रतिशत से अधिक कारखाने बंद हो गए हैं। जिसकी वजह सूत की महंगाई है। दो साल के भीतर प्रति बंडल सूत का दाम 600 रुपये बढ़ गया है। सूत के बंडल पर मूल्य भी अंकित नहीं रहता है। महाजन मनमाने दर पर बेचते हैं। बिजली का जो प्लैट दर है, उसमें सब्सिडी की रकम की कटौती विद्युत निगम नहीं कर रहा है। जिसकी वजह से समस्या बढ़ती ही जा रही है।

- वसी अहमद अंसारी, अंसार टोला
सूत की महंगाई और बिजली की समस्या ने धंधे को चौपट कर दिया है। उनके पास पहले चार पॉवरलूम था, जिसमें से तीन बंद हो चुका है। सिर्फ एक पॉवरलूम चल रहा है। तैयार माल डंफ पड़ा है। हर सप्ताह सूत का दाम बढ़ना, चिंता का विषय बन गया है। सरकारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- सरफुदुज्जा अंसारी, अंसार टोला
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed