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Sant Kabir Nagar News: मौसम में बदलाव के साथ बढ़े माहू, आंखों को कर रहे जख्मी, रोजाना आ रहे 15 मरीज
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सीएचसी पर बच्ची के आंख में पड़े माहो को निकालते चिकित्सक-संवाद
- आंखों में पड़ने से हो जा रही लाली, लोगों का आना-जाना भी हो रहा दूभर
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। मौसम में हो रहे बदलाव से फसलों पर माहू कीट का प्रभाव बढ़ गया है। यह कीट साइकिल, बाइक से चल रहे लोगों की आंखों में पड़ रहे हैं, जिससे आंखें लाल होने के साथ ही अन्य समस्याएं हो रही हैं। माहू कीट के प्रकोप से लोगों का आवागमन दूभर हो गया है।
सीएचसी खलीलाबाद के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि ओपीडी में प्रतिदिन 60 से 70 मरीज आते हैं। इनमें से इस समस्या से पीड़ित 15 से 20 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। उन्हें सलाह दी जा रही कि माहू कीट से बचने के लिए चश्मा या हेलमेट का प्रयोग करें, वरना आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।
उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव के बाद माहू कीट की संख्या में वृद्धि हो जाती है। दोपहर बाद यह पौधों को छोड़कर उड़ान भरने लगते हैं। यह आंख के लिए काफी नुकसानदेह हैं। कई दिनों से इनके प्रकोप से लोगों की आंखों को नुकसान पहुंच रहा है। उड़ने के बाद यह आंखों को जख्मी कर दे रहे हैं।
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एकाएक आंख में पड़ने पर मिर्च जैसी चुभन होती है, और देखते ही देखते व्यक्ति आंखों काे मलने लगता है, जिससे आंखें लाल होने के साथ ही उसमें सूजन भी आ जा रही है। ऐसे में अगर कीट पड़ते हैं तो आंख को बार-बार न मलें और बिना चिकित्सा के परामर्श से आई ड्रॉप न डालें। चिकित्सक को दिखाने के बाद ही दवा लें।
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बिना डॉक्टर की सलाह के न डालें आई ड्रॉप
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि इस मौसम में कीटों की प्रजनन दर बढ़ जाती है। इसमें कई प्रकार के कीट पैदा होते हैं, जो पौधों पर रहते हैं फिर उड़ते हैं। इनके आंख में पड़ने से जलन महसूस होती है। ऐसे में अगर कीट पड़ते हैं तो आंख को बार-बार न मलें और बिना चिकित्सा के परामर्श से आई ड्रॉप न डालें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। मौसम में हो रहे बदलाव से फसलों पर माहू कीट का प्रभाव बढ़ गया है। यह कीट साइकिल, बाइक से चल रहे लोगों की आंखों में पड़ रहे हैं, जिससे आंखें लाल होने के साथ ही अन्य समस्याएं हो रही हैं। माहू कीट के प्रकोप से लोगों का आवागमन दूभर हो गया है।
सीएचसी खलीलाबाद के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि ओपीडी में प्रतिदिन 60 से 70 मरीज आते हैं। इनमें से इस समस्या से पीड़ित 15 से 20 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। उन्हें सलाह दी जा रही कि माहू कीट से बचने के लिए चश्मा या हेलमेट का प्रयोग करें, वरना आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।
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उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव के बाद माहू कीट की संख्या में वृद्धि हो जाती है। दोपहर बाद यह पौधों को छोड़कर उड़ान भरने लगते हैं। यह आंख के लिए काफी नुकसानदेह हैं। कई दिनों से इनके प्रकोप से लोगों की आंखों को नुकसान पहुंच रहा है। उड़ने के बाद यह आंखों को जख्मी कर दे रहे हैं।
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एकाएक आंख में पड़ने पर मिर्च जैसी चुभन होती है, और देखते ही देखते व्यक्ति आंखों काे मलने लगता है, जिससे आंखें लाल होने के साथ ही उसमें सूजन भी आ जा रही है। ऐसे में अगर कीट पड़ते हैं तो आंख को बार-बार न मलें और बिना चिकित्सा के परामर्श से आई ड्रॉप न डालें। चिकित्सक को दिखाने के बाद ही दवा लें।
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बिना डॉक्टर की सलाह के न डालें आई ड्रॉप
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि इस मौसम में कीटों की प्रजनन दर बढ़ जाती है। इसमें कई प्रकार के कीट पैदा होते हैं, जो पौधों पर रहते हैं फिर उड़ते हैं। इनके आंख में पड़ने से जलन महसूस होती है। ऐसे में अगर कीट पड़ते हैं तो आंख को बार-बार न मलें और बिना चिकित्सा के परामर्श से आई ड्रॉप न डालें।