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जागरूक होंगी महिलाएं, तभी आएगा बदलाव
Thu, 07 Mar 2019 11:41 PM IST
राकेश पांडेय
संतकबीरनगर
संतकबीरनगर
Published by: राकेश पांडेय
Updated Thu, 07 Mar 2019 11:41 PM IST
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जागरूक होंगी महिलाएं, तभी आएगा बदलाव
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। जब तक महिलाएं खुद जागरूक नहीं होंगी, उनकी स्थिति में बदलाव नहीं आएगा। महिलाओं को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे अभियान का असर दिखने लगा है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं की हालत में सुधार हो रहा है। ये बातें बृहस्पतिवार को खलीलाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सभागार में अमर उजाला फाउंडेशन के अभियान अपराजिता के तहत आयोजित महिला सशक्तिकरण गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीपी पांडेय ने कहीं।
डॉक्टर पांडेय ने कहा कि महिलाएं संकोची स्वभाव की होती हैं। इस संकोच ने उन्हें धीरे-धीरे दब्बू बना दिया है। महिलाएं अपनी इच्छाएं जाहिर नहीं कर पाती हैं। अपमान व प्रताड़ना चुपचाप बर्दाश्त करती हैं। इससे मुक्ति तभी मिलेगी जब महिलाएं शैक्षिक व आर्थिक रूप से मजबूत होंगी। ब्लॉक सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक महेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि गांवों में अब आशा कार्यकर्ता महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के साथ-साथ उत्पीड़न के मामलों में सलाहकार की भूमिका में भी नजर आएंगी। आशा कर्मचारी यूनियन की जिलाध्यक्ष सरोज यादव ने कहा कि महिलाएं अभी अपने परिवार में ही संघर्ष कर रही हैं। वैसे बदलाव आ रहा है, लेकिन गति काफी धीमी है। कार्यक्रम में गोरख यादव, ललिता देवी, संयोगिता, गंगोत्री, बासमती, पुष्पलता, नर्वदा देवी, गुड्डी, ऊषा चौधरी, चिंता मणि, परमशीला, इंद्रावती, ललिता, सुधा, रेनू, राधिका, कैलाशी, मनीषा, उर्मिला, सुभावती, प्रियंका समेत तमाम महिलाएं मौजूद रहीं।
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डॉक्टर पांडेय ने कहा कि महिलाएं संकोची स्वभाव की होती हैं। इस संकोच ने उन्हें धीरे-धीरे दब्बू बना दिया है। महिलाएं अपनी इच्छाएं जाहिर नहीं कर पाती हैं। अपमान व प्रताड़ना चुपचाप बर्दाश्त करती हैं। इससे मुक्ति तभी मिलेगी जब महिलाएं शैक्षिक व आर्थिक रूप से मजबूत होंगी। ब्लॉक सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक महेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि गांवों में अब आशा कार्यकर्ता महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के साथ-साथ उत्पीड़न के मामलों में सलाहकार की भूमिका में भी नजर आएंगी। आशा कर्मचारी यूनियन की जिलाध्यक्ष सरोज यादव ने कहा कि महिलाएं अभी अपने परिवार में ही संघर्ष कर रही हैं। वैसे बदलाव आ रहा है, लेकिन गति काफी धीमी है। कार्यक्रम में गोरख यादव, ललिता देवी, संयोगिता, गंगोत्री, बासमती, पुष्पलता, नर्वदा देवी, गुड्डी, ऊषा चौधरी, चिंता मणि, परमशीला, इंद्रावती, ललिता, सुधा, रेनू, राधिका, कैलाशी, मनीषा, उर्मिला, सुभावती, प्रियंका समेत तमाम महिलाएं मौजूद रहीं।
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