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Sant Kabir Nagar News: गुमनाम मौत ने बनाया लावारिस...तर्पण से भी महरूम

Fri, 19 Sep 2025 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Fri, 19 Sep 2025 11:43 PM IST
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Anonymous death made him unclaimed, deprived of even tarpan.
संतकबीरनगर। वर्तमान में चल रहे पितृ पक्ष में हर कोई अपने पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान कर उनकी आत्मा की शांति के लिए कर्मकांड करता है। मृतक का अंतिम संस्कार हो जाने के बाद उसका पिंड दान और तर्पण जरूरी होता है। अज्ञात शव के मामले में यह संभव नहीं हो पाता है। पहचान न होने पर पुलिस निगरानी में अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। पिछले तीन साल में 62 शव को अपनी पहचान नहीं मिल पाई है। इस साल भी अभी तक जिले में 21 शव की शिनाख्त नहीं हो पाया है।
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जिले में ऐसे कई लोग हैं जिन्हें मरने के बाद भी अपनी पहचान तक नसीब नहीं हुआ। वर्ष 2023 में 14, वर्ष 2024 में 27 और वर्ष 2023 में अब तक 21 अज्ञात शव मिले। पुलिस के काफी प्रयास के बाद भी उनका पहचान नहीं हो पाया। जिसके बाद पुलिस ने उन शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। अंतिम संस्कार के बाद उनके श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की कोई व्यवस्था नहीं होती है। आचार्य गोरेलाल मिश्र का कहना है कि मृतक के अंतिम संस्कार के बाद उसका पिंंडदान और तर्पण जरूरी है।
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उन्होंने बताया कि तर्पण के लिए मृतक का नाम, जन्मस्थान, कुल, मृत्यु की तिथि या अंतिम संस्कार की तिथि जैसी कोई एक पहचान होना जरूरी है। बिना पहचान के किया गया कर्मकांड अधूरा माना जाता है। अज्ञात शव का अंतिम संस्कार पुलिस कर देती है, लेकिन इनके पिंडदान की पहल के लिए सामाजिक संस्था के लोगों को आगे आना होगा।
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इस वर्ष लावारिस 21 शवों का किया गया अंतिम संस्कार
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक लावारिस शव सड़क दुर्घटना, ट्रेन हादसा, नदी-नालों व तालाबों से बरामद होते हैं। कई मामलों में यह शव महीनों पहचान से वंचित रह जाते हैं। इनमें महिला, बच्चे व पुरुष भी शामिल हैं। कई लापता लोग भी इन्हीं अज्ञात शव में शामिल हो जाते हैं। परिजन उनकी वापसी की आस लगाए रहते हैं, जबकि वह अनजाने में लावारिस की तरह अंतिम संस्कार के बाद गुमनाम हो जाते हैं। पुलिस रिकॉर्ड की मानें तो इस वर्ष 21 ऐसे लावारिस शव का अंतिम संस्कार जनपद पुलिस ने किया। जिनका शिनाख्त नहीं हो सका।
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