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कुपोषण रोकने विभाग के प्रयास नाकाफी
Updated Mon, 03 Dec 2018 12:27 AM IST
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जिले में 27 हजार बच्चे कुपोषित
फोटो
सांथा ब्लॉक में सर्वाधिक 4420 बच्चे हैं कुपोषित
बौद्धिक विकास रुकने और बौनापान होने की आशंका बढ़ी
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। कुपोषण रोकने के लिए शासन स्तर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। बावजूद इसके कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। अक्तूबर में हुए सर्वे में जिले में 27576 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। सांथा ब्लॉक में सर्वाधिक 4420 बच्चे कुपोषित हैं। यह आंकड़े और बढ़ सकते हैं। कुपोषित बच्चों की देखभाल यदि सही से नहीं हुई तो उनका बौद्धिक विकास तो रुकेगा ही साथ में बौनापन की आशंका बनी रहेगी।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से जुड़े कर्मियों पर बच्चों में कुपोषण की जांच करने और उसकी रोकथाम की जिम्मेदारी है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर इसके लिए बेबी मशीन उपलब्ध कराई गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रदेश में 40 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं। जबकि जिले में इनकी संख्या 22 प्रतिशत है। जिले में 1765 आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित है। अक्तूबर में हुए सर्वे के आंकड़ों पर गौर करें तो शून्य से छह वर्ष तक के जिले में 164393 बच्चे हैं। इनमें 27,576 बच्चे कुपोषित पाए गए। राष्ट्रीय पोषण मिशन के नोडल अधिकारी एके सिंह ने बताया कि अति कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई है। जहां बेबी मशीन ठीक नहीं है, वहां तो बदलवा दिए जाएंगे। कुपोषण रोकने के लिए शासन बेहद गंभीर है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी राय ने बताया कि कुपोषण बच्चों के स्वास्थ के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इनके मानसिक और शारीरिक विकास पर बुरा प्रभाव डालता है। बच्चों का दिमाग 80 प्रतिशत तक पहले तीन साल में ही विकसित हो जाता है। यदि बच्चा कुपोषित होगा तो उसकी बौद्धिक क्षमता कम होगी। बौनापन और कमजोर होगा। इसे रोकने के लिए गर्भवती मां का खानपान ठीक होना चाहिए। चिकित्सक से नियमित चेकअप करानी चाहिए। डिलिवरी से छह माह तक बच्चे को मां का दूध पिलाना चाहिए।
ब्लॉकवार हुए सर्वे में कुपोषित बच्चों के आंकड़े
ब्लॉक कुपोषित अति कुपोषित
खलीलाबाद 2057 524
नाथनगर 2965 1005
हैंसर 2366 499
मेंहदावल 1268 566
पौली 1148 678
बेलहर 1642 494
सेमरियावां 3014 956
सांथा 3442 978
बघौली 2454 359
खलीलाबाद शहर 828 333
कुपोषण रोकने के लिए होगी पहल
बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के तहत बच्चों का स्वास्थ्य चेकअप होगा। आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए इन्हें 120 की जगह 200 ग्राम पोषाहार दिया जाएगा। कुपोषित बच्चों के परिवार के सदस्य को स्वयं सहायता समूह से जोड़ा जाएगा। शौचालय का लाभ दिलाया जाएगा। परिजनों को मनरेगा के तहत रोजगार दिया जाएगा।
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सांथा ब्लॉक में सर्वाधिक 4420 बच्चे हैं कुपोषित
बौद्धिक विकास रुकने और बौनापान होने की आशंका बढ़ी
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। कुपोषण रोकने के लिए शासन स्तर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। बावजूद इसके कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। अक्तूबर में हुए सर्वे में जिले में 27576 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। सांथा ब्लॉक में सर्वाधिक 4420 बच्चे कुपोषित हैं। यह आंकड़े और बढ़ सकते हैं। कुपोषित बच्चों की देखभाल यदि सही से नहीं हुई तो उनका बौद्धिक विकास तो रुकेगा ही साथ में बौनापन की आशंका बनी रहेगी।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से जुड़े कर्मियों पर बच्चों में कुपोषण की जांच करने और उसकी रोकथाम की जिम्मेदारी है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर इसके लिए बेबी मशीन उपलब्ध कराई गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रदेश में 40 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं। जबकि जिले में इनकी संख्या 22 प्रतिशत है। जिले में 1765 आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित है। अक्तूबर में हुए सर्वे के आंकड़ों पर गौर करें तो शून्य से छह वर्ष तक के जिले में 164393 बच्चे हैं। इनमें 27,576 बच्चे कुपोषित पाए गए। राष्ट्रीय पोषण मिशन के नोडल अधिकारी एके सिंह ने बताया कि अति कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई है। जहां बेबी मशीन ठीक नहीं है, वहां तो बदलवा दिए जाएंगे। कुपोषण रोकने के लिए शासन बेहद गंभीर है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी राय ने बताया कि कुपोषण बच्चों के स्वास्थ के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इनके मानसिक और शारीरिक विकास पर बुरा प्रभाव डालता है। बच्चों का दिमाग 80 प्रतिशत तक पहले तीन साल में ही विकसित हो जाता है। यदि बच्चा कुपोषित होगा तो उसकी बौद्धिक क्षमता कम होगी। बौनापन और कमजोर होगा। इसे रोकने के लिए गर्भवती मां का खानपान ठीक होना चाहिए। चिकित्सक से नियमित चेकअप करानी चाहिए। डिलिवरी से छह माह तक बच्चे को मां का दूध पिलाना चाहिए।
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ब्लॉकवार हुए सर्वे में कुपोषित बच्चों के आंकड़े
ब्लॉक कुपोषित अति कुपोषित
खलीलाबाद 2057 524
नाथनगर 2965 1005
हैंसर 2366 499
मेंहदावल 1268 566
पौली 1148 678
बेलहर 1642 494
सेमरियावां 3014 956
सांथा 3442 978
बघौली 2454 359
खलीलाबाद शहर 828 333
कुपोषण रोकने के लिए होगी पहल
बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के तहत बच्चों का स्वास्थ्य चेकअप होगा। आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए इन्हें 120 की जगह 200 ग्राम पोषाहार दिया जाएगा। कुपोषित बच्चों के परिवार के सदस्य को स्वयं सहायता समूह से जोड़ा जाएगा। शौचालय का लाभ दिलाया जाएगा। परिजनों को मनरेगा के तहत रोजगार दिया जाएगा।
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