{"_id":"599f247b4f1c1b53398b4ac7","slug":"91503601787-sant-kabir-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांव में जलजमाव बनी बांध पर रहने की मजबूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांव में जलजमाव बनी बांध पर रहने की मजबूरी
Updated Fri, 25 Aug 2017 12:39 AM IST
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संतकबीरनगर। पिछले तीन दिनों में घाघरा का जलस्तर जहां 75 सेंटीमीटर घटा है,वहीं 24 घंटे में राप्ती 39 सेंटीमीटर कम हुई है। वैसे राप्ती अभी भी खतरे के निशान से एक मीटर 11 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जबकि घाघरा खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर नीचे चली गई है। घाघरा के पानी से तबाह हुए 22 गांवों के लोग अभी भी परेशानहाल है। गांव में जलजमाव कायम होने की वजह से अभी भी कई गांव के लोग बांध पर डेरा डाले हुए है। हैंसर प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा का जलस्तर गुरुवार को 78 95 मीटर था। वैसे घाघरा तीन दिनों के भीतर 75 सेंटीमीटर घट गई है। घाघरा खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। घाघरा नदी की बाढ से तबाह होकर घर छोड कर बंधे पर शरण लेने वालों की पीडा नदी का जल स्तर घटने के बाद भी कम होने का नाम नही ले रही है । एक सप्ताह से एमबीडी बांध पर खुले आकाश के नीचे दिन में धूप और रात में शीत के थपेडो को सहते हुए पीडित परिवार जीवन गुजारने को विवश है । वैसे कुछ लोग अपने घरो को लौट चुके है, लेकिन अभी भी बहुत लोग बंधे पर ही जमे हुए है ।
अमर उजाला टीम के पहुंचते ही बाढ़ पीड़ितों की आंखें छलक आईं। सीयर गांव के रामू, शिवप्रसाद, रामबचन, ढोलबजा निवासी फागू, सीताराम, राम सुमेर, परशुराम आदि ने कहा कि आज बंधे पर रहते हुए आठवां दिन गुजरने वाला है, लेकिन न तो बच्चों को भर पेट भोजन मिला और न ही पशुओं को चारा नसीब हुआ। पीड़ितों का कहना है कि अभी तक प्रशासन माचिस तक मुहैया नही करा सका। भोजन की व्यवस्था करना तो दूर की बात है। बंधे से अपने घर लौट चुके गुनवतिया गांव के सरजू, पारस, कैलाशी, धर्मवीर आदि ने बताया कि घर भले लौट गए लेकिन वहां भी सुकून नहीं मिलने वाला है। घर में कीचड़ तो दरवाजे पर जलजमाव है। हैंडपंपों से निकलने वाले पानी से बदबू आ रही है। ऐसी स्थिति में गांव में रहना संभव नहीं है। रामशंकर, दयाराम, गोलू, रामनयन, रुदल आदि ने कहा कि संतकबीरनगर जिले की सीमा गोरखपुर जनपद के कम्हरिया घाट तक जाने के लिए बनी सड़क दियारावासियों के लिए अभिशाप हो गई है। जल निकासी के लिए पुलिया न होना खतरा बन गया है। पानी का बहाव न होने के कारण नदी का जलस्तर घटने के बाद भी गांव व गांव के चारों तरफ पानी भरा है। गांव वालों का कहना है कि अभी तक लोग बंधे पर इस कारण पड़े हुए हैं कि जमीन कीचड़युक्त है और पशुओं के चारे की व्यवस्था नहीं है।
मेंहदावल के प्रतिनिधियों के अनुसार, करमैनी-बेलौली तटबंध पर राप्ती का जलस्तर घटने के साथ ही ग्रामीण तटबंध को छोड़कर गांव की ओर रुख कर गए। तटबंध की सतत निगरानी अब भी ड्रेनेज खंड के अधिकारी लगातार कर रहे हैं उन्हें यह आशंका हो रही है कि तटबंध से पानी सटने के बाद घटने के कारण कही तटबंध बैठने की स्थिति न उत्पन्न हो जाए। दूसरी तरफ गांव में वापस होने वाले ग्रामीण नदी के जलस्तर से प्रभावित प्रदूषित जल पीने को मजबूर हैं।
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19.2 किलोमीटर लंबा करमैनी-तटबंध पर राप्ती नदी का जलस्तर लगातार घट रहा हैं। गुरुवार को नदी का जलस्तर घटकर 80.61 पर पहुंच गया हैं। नदी खतरे के निशान 79.50 मीटर है। नदी खतरे के निशान से एक मीटर 11 सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं। जिला प्रशासन ने मेरठ से आई 46 बटालियन पीएससी की तैनाती बेलौली, बढ़या में है। पीएसपी के जवान मोटरबोट से नदी की निगरानी कर रहे हैं। जलस्तर घटने के साथ ही तटबंध पर शरण लिए बेलौहा, नौंगो, तिवारीपुर, छपिया पराग, जोरवा, विशुनपुर बांगर, बानडूमर के ग्रामीण तटबंध को छोड़कर गांव में अपने घरों पर लौट गए हैं, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण क्षेत्र में लगे इंडिया मार्का व साधारण हैंडपंप दूषित जल दे रहे हैं। ग्रामीण संदीप सिंह, ग्राम प्रधान जगदीश पांडेय, ग्राम प्रधान शिवमूरत निषाद, दयासागर यादव, सपा नेता अर्जुन यादव आदि ने बताया कि जलस्तर घटने से लांग वापस आ गए हैं, पर दूषित जल सबसे बड़ी परेशानी है। ड्रेनेज खंड के एक्सईएन आरएन सिंह यादव ने बताया कि करमैनी-बेलौली तटबंध पर जलस्तर तेजी से घट रहा हैं। वर्तमान में नदी का जलस्तर 80.61 मीटर पर पहुंच गया है, जो खतरे के निशान से अभी तक 1.11 मीटर ऊपर है। जबकि घाघरा खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। कहीं से भी तटबंध को कोई खतरा नहीं हैं। तटबंध की सतत निगरानी की जा रही हैं।
इंसेट
पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मदन नरायण सिंह ने गुरुवार को करमैनी-बेलौली तटबंध का निरीक्षण किया औंर ड्रेनेज खंड के अधिकारियों से बात कर तटबंध पर बाढ़ निरोधक कार्यों की जानकारी ली। साथ ही सीएचसी के डाक्टरों के मेडिकल कैंप का जायजा लिया। उन्होंने बेहतर मेडिकल सुविधा के साथ ही गांव में छिड़काव कराने का निर्देश दिया। सीएमओ डॉक्टर एसी श्रीवास्तव, डॉक्टर आलोक सिन्हा टीम के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र धनघटा के नगवा और पौली के पास गए। जहां लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराएं।
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अमर उजाला टीम के पहुंचते ही बाढ़ पीड़ितों की आंखें छलक आईं। सीयर गांव के रामू, शिवप्रसाद, रामबचन, ढोलबजा निवासी फागू, सीताराम, राम सुमेर, परशुराम आदि ने कहा कि आज बंधे पर रहते हुए आठवां दिन गुजरने वाला है, लेकिन न तो बच्चों को भर पेट भोजन मिला और न ही पशुओं को चारा नसीब हुआ। पीड़ितों का कहना है कि अभी तक प्रशासन माचिस तक मुहैया नही करा सका। भोजन की व्यवस्था करना तो दूर की बात है। बंधे से अपने घर लौट चुके गुनवतिया गांव के सरजू, पारस, कैलाशी, धर्मवीर आदि ने बताया कि घर भले लौट गए लेकिन वहां भी सुकून नहीं मिलने वाला है। घर में कीचड़ तो दरवाजे पर जलजमाव है। हैंडपंपों से निकलने वाले पानी से बदबू आ रही है। ऐसी स्थिति में गांव में रहना संभव नहीं है। रामशंकर, दयाराम, गोलू, रामनयन, रुदल आदि ने कहा कि संतकबीरनगर जिले की सीमा गोरखपुर जनपद के कम्हरिया घाट तक जाने के लिए बनी सड़क दियारावासियों के लिए अभिशाप हो गई है। जल निकासी के लिए पुलिया न होना खतरा बन गया है। पानी का बहाव न होने के कारण नदी का जलस्तर घटने के बाद भी गांव व गांव के चारों तरफ पानी भरा है। गांव वालों का कहना है कि अभी तक लोग बंधे पर इस कारण पड़े हुए हैं कि जमीन कीचड़युक्त है और पशुओं के चारे की व्यवस्था नहीं है।
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मेंहदावल के प्रतिनिधियों के अनुसार, करमैनी-बेलौली तटबंध पर राप्ती का जलस्तर घटने के साथ ही ग्रामीण तटबंध को छोड़कर गांव की ओर रुख कर गए। तटबंध की सतत निगरानी अब भी ड्रेनेज खंड के अधिकारी लगातार कर रहे हैं उन्हें यह आशंका हो रही है कि तटबंध से पानी सटने के बाद घटने के कारण कही तटबंध बैठने की स्थिति न उत्पन्न हो जाए। दूसरी तरफ गांव में वापस होने वाले ग्रामीण नदी के जलस्तर से प्रभावित प्रदूषित जल पीने को मजबूर हैं।
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19.2 किलोमीटर लंबा करमैनी-तटबंध पर राप्ती नदी का जलस्तर लगातार घट रहा हैं। गुरुवार को नदी का जलस्तर घटकर 80.61 पर पहुंच गया हैं। नदी खतरे के निशान 79.50 मीटर है। नदी खतरे के निशान से एक मीटर 11 सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं। जिला प्रशासन ने मेरठ से आई 46 बटालियन पीएससी की तैनाती बेलौली, बढ़या में है। पीएसपी के जवान मोटरबोट से नदी की निगरानी कर रहे हैं। जलस्तर घटने के साथ ही तटबंध पर शरण लिए बेलौहा, नौंगो, तिवारीपुर, छपिया पराग, जोरवा, विशुनपुर बांगर, बानडूमर के ग्रामीण तटबंध को छोड़कर गांव में अपने घरों पर लौट गए हैं, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण क्षेत्र में लगे इंडिया मार्का व साधारण हैंडपंप दूषित जल दे रहे हैं। ग्रामीण संदीप सिंह, ग्राम प्रधान जगदीश पांडेय, ग्राम प्रधान शिवमूरत निषाद, दयासागर यादव, सपा नेता अर्जुन यादव आदि ने बताया कि जलस्तर घटने से लांग वापस आ गए हैं, पर दूषित जल सबसे बड़ी परेशानी है। ड्रेनेज खंड के एक्सईएन आरएन सिंह यादव ने बताया कि करमैनी-बेलौली तटबंध पर जलस्तर तेजी से घट रहा हैं। वर्तमान में नदी का जलस्तर 80.61 मीटर पर पहुंच गया है, जो खतरे के निशान से अभी तक 1.11 मीटर ऊपर है। जबकि घाघरा खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। कहीं से भी तटबंध को कोई खतरा नहीं हैं। तटबंध की सतत निगरानी की जा रही हैं।
इंसेट
पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मदन नरायण सिंह ने गुरुवार को करमैनी-बेलौली तटबंध का निरीक्षण किया औंर ड्रेनेज खंड के अधिकारियों से बात कर तटबंध पर बाढ़ निरोधक कार्यों की जानकारी ली। साथ ही सीएचसी के डाक्टरों के मेडिकल कैंप का जायजा लिया। उन्होंने बेहतर मेडिकल सुविधा के साथ ही गांव में छिड़काव कराने का निर्देश दिया। सीएमओ डॉक्टर एसी श्रीवास्तव, डॉक्टर आलोक सिन्हा टीम के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र धनघटा के नगवा और पौली के पास गए। जहां लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराएं।