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गांव में न तो हुई दवा का छिडकाव न सभी को मिल सकी राहत सामग्री
Updated Fri, 01 Sep 2017 11:16 PM IST
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हैंसर। करीब एक पखवारे तक बाढ़ का दंश झेल चुके 22 गांवों के लोग जब अपने घर लौटे तो उनकी दुश्वारियां कम होने की जगह बढ़ गई। गांव में लगाए गए इंडिया मार्क हैंड पंपों में या तो तमाम खराब पड़े हैं या फिर दूषित जल उगल रहे हैं। घर के सामने कीचड़ और उससे उठने वाला दुर्गंध तमाम तरह की संक्रामक बीमारियों को दावत दे रही है। इतना ही नही प्रशासन तो कहने के लिए सभी को राहत सामग्री वितरित कर दिया है, लेकिन कई परिवार ऐसे है, जिन्हें माचिस तक नसीब नहीं हुआ है।
धनघटा तहसील क्षेत्र के घाघरा और एमबीडी बांध के बीच बसे 22 गांवों के लोग प्रभावित हुए थे। घरों में पानी घुस जाने के कारण करीब 1000 परिवार एमबीडी बांध पर जगह- जगह शरण लेकर करीब 15 दिनों तक गुज बसर किए। उसके बाद नदी का जल स्तर घटा तो लोग अपने घरों को लौट गए। बाढ़ से प्रभावित गांवों में इंडिया मार्का हैंड पंपों का मरम्ममत कराने, पशु पालकों को भूसा वितरित करने के साथ उन्हें अनाज समेत अन्य सामान देने तथा मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए दवा का छिड़काव कराने, दवा वितरित करने और सभी की स्वास्थ्य जांच कराने का दावा प्रशासन भले ही कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। गुनवतिया गांव निवासी रामचंदर, श्रीराम, पारस, फेकू, गायघाट के रहने वाले गंगा प्रसाद, रामजीयावन, बालेंद्र, किसन, चकदहा निवासी लालचंद, नरसिहं, रामअशीष, रामदयाल, भौव्वापार , सरैया, खरैया निवासी बलिराम, अरुण, प्रभावती, दयाराम आदि का कहना है कि एक दाना राहत सामग्री नही मिली और न ही पशुओं को खिलाने के लिए चारा, इतना ही नहीं स्वास्थ्य परीक्षण, दवा का वितरण और दवा का छिड़काव करने की बात तो दूर स्वाथ्य विभाग की टीम बाढ़ हटने के बाद गांव में आई ही नहीं। जब लोग बंधे पर रह रहे थे, उसी समय दवा वितरित की गई थी। गांव वालों का कहना है कि जिस तरह इस वर्ष बाढ़ पीड़ितों की उपेक्षा प्रशासन ने किया, उस तरह कभी भी बाढ़ पीड़ित उपेक्षित नहीं हुए थे। गांव में गंदगी के चलते अब जब लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आकर सर्दी, जुखाम, बुखार , खांसी से पीड़ित हो रहे हैं तो नजदीकी झोला छाप डाक्टरों से इलाज कराने को विवश हैं। गांव में लगाए गए इंडिया मार्का हैंड पंप बेमतलब बने हुए हैं, जबकि एसडीएम रामजीवन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग,पशु पालन विभाग और सफाई कर्मियों की टीमें लगातार गांवों में पहुंच रही है और प्रभावित लोगों व पशुओं को लाभ पहुंचा रही है। ड्रेनेज खंड के एक्सईएन आर एन सिंह यादव ने बताया कि राप्ती खतरे के निशान से 90 सेंटीमीटर नीचे तो घाघरा एक मीटर नीचे बह रही है। कहीं भी बांध को अब कोई खतरा नहीं रह गया है। बावजूद इसके भी राप्ती के करमैनी- बेलौली और घाघरा के एमबीडी बांध की सतत निगरानी कराई जा रही है।
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धनघटा तहसील क्षेत्र के घाघरा और एमबीडी बांध के बीच बसे 22 गांवों के लोग प्रभावित हुए थे। घरों में पानी घुस जाने के कारण करीब 1000 परिवार एमबीडी बांध पर जगह- जगह शरण लेकर करीब 15 दिनों तक गुज बसर किए। उसके बाद नदी का जल स्तर घटा तो लोग अपने घरों को लौट गए। बाढ़ से प्रभावित गांवों में इंडिया मार्का हैंड पंपों का मरम्ममत कराने, पशु पालकों को भूसा वितरित करने के साथ उन्हें अनाज समेत अन्य सामान देने तथा मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए दवा का छिड़काव कराने, दवा वितरित करने और सभी की स्वास्थ्य जांच कराने का दावा प्रशासन भले ही कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। गुनवतिया गांव निवासी रामचंदर, श्रीराम, पारस, फेकू, गायघाट के रहने वाले गंगा प्रसाद, रामजीयावन, बालेंद्र, किसन, चकदहा निवासी लालचंद, नरसिहं, रामअशीष, रामदयाल, भौव्वापार , सरैया, खरैया निवासी बलिराम, अरुण, प्रभावती, दयाराम आदि का कहना है कि एक दाना राहत सामग्री नही मिली और न ही पशुओं को खिलाने के लिए चारा, इतना ही नहीं स्वास्थ्य परीक्षण, दवा का वितरण और दवा का छिड़काव करने की बात तो दूर स्वाथ्य विभाग की टीम बाढ़ हटने के बाद गांव में आई ही नहीं। जब लोग बंधे पर रह रहे थे, उसी समय दवा वितरित की गई थी। गांव वालों का कहना है कि जिस तरह इस वर्ष बाढ़ पीड़ितों की उपेक्षा प्रशासन ने किया, उस तरह कभी भी बाढ़ पीड़ित उपेक्षित नहीं हुए थे। गांव में गंदगी के चलते अब जब लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आकर सर्दी, जुखाम, बुखार , खांसी से पीड़ित हो रहे हैं तो नजदीकी झोला छाप डाक्टरों से इलाज कराने को विवश हैं। गांव में लगाए गए इंडिया मार्का हैंड पंप बेमतलब बने हुए हैं, जबकि एसडीएम रामजीवन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग,पशु पालन विभाग और सफाई कर्मियों की टीमें लगातार गांवों में पहुंच रही है और प्रभावित लोगों व पशुओं को लाभ पहुंचा रही है। ड्रेनेज खंड के एक्सईएन आर एन सिंह यादव ने बताया कि राप्ती खतरे के निशान से 90 सेंटीमीटर नीचे तो घाघरा एक मीटर नीचे बह रही है। कहीं भी बांध को अब कोई खतरा नहीं रह गया है। बावजूद इसके भी राप्ती के करमैनी- बेलौली और घाघरा के एमबीडी बांध की सतत निगरानी कराई जा रही है।
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