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कम हुआ घाघरा का जलस्तर, तेज हुई कटान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Jul 2018 11:43 PM IST
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घाघरा कर रही तेजी से कटान।
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हैंसर। घाघरा नदी के जल स्तर में सोमवार की शाम से ही कमी आने लगी है। नदी का पानी कम होने के साथ कटान तेज हो गई है। किसान फसल व जमीन नदी में समाता देखकर परेशान है और उनकी चिंता बढ़ती ही जा रही है।
लोगों का कहना है कि इस साल हो रही कटान से लगता है कि अब दियारा में न तो खेती योग्य जमीन रहेगी और न ही रहने के लिए घर बचेगा।
भौवापार निवासी नरसिंह, छबिलाल, रामअचल, रामराज, अमरजीत, सर्वजीत, रामचेत, रामकिशुन, इंद्रासन आदि का कहना है कि नदी की कटान से अब तक कई बीघा फसल नदी में समा गई है।
भौंवापार, गुनवतिया, गायघाट, ढोलबजा, चकदहा गांव निवासी 40 किसानों की सैकड़ों बीघा खेती कट गई। अब इन लोगों के पास एक भी विश्वा जमीन खेती योग्य नहीं रह गई है। नदी के जलस्तर में दो दिनों से कमी आ रही है तो कटान और तेजी के साथ होने लगा है।
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भौंवापार समेत कई गांवों के करीब तक नदी की धारा पहुंच चुकी है। जिस तरह कटान हो रही है, उससे यही लग रहा है कि अब गांव भी नदी में समा जाएंगे। खेती कटने से अन्न के लाले पड़ने वाले हैं। जब बेघर हो जाएंगे तो कहां जाएंगे? इसी चिंता में नींद नहीं आ रही है।
एसडीएम बाबूराम का कहना है कि नदी के कटान पर नजर रखी जा रही है। कटान को देख गांव के लोगों को गांव खाली करने के लिए कहा जा रहा है। लेकिन अभी वह घर छोड़ने को तैयार नहीं है।
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लोगों का कहना है कि इस साल हो रही कटान से लगता है कि अब दियारा में न तो खेती योग्य जमीन रहेगी और न ही रहने के लिए घर बचेगा।
भौवापार निवासी नरसिंह, छबिलाल, रामअचल, रामराज, अमरजीत, सर्वजीत, रामचेत, रामकिशुन, इंद्रासन आदि का कहना है कि नदी की कटान से अब तक कई बीघा फसल नदी में समा गई है।
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भौंवापार, गुनवतिया, गायघाट, ढोलबजा, चकदहा गांव निवासी 40 किसानों की सैकड़ों बीघा खेती कट गई। अब इन लोगों के पास एक भी विश्वा जमीन खेती योग्य नहीं रह गई है। नदी के जलस्तर में दो दिनों से कमी आ रही है तो कटान और तेजी के साथ होने लगा है।
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भौंवापार समेत कई गांवों के करीब तक नदी की धारा पहुंच चुकी है। जिस तरह कटान हो रही है, उससे यही लग रहा है कि अब गांव भी नदी में समा जाएंगे। खेती कटने से अन्न के लाले पड़ने वाले हैं। जब बेघर हो जाएंगे तो कहां जाएंगे? इसी चिंता में नींद नहीं आ रही है।
एसडीएम बाबूराम का कहना है कि नदी के कटान पर नजर रखी जा रही है। कटान को देख गांव के लोगों को गांव खाली करने के लिए कहा जा रहा है। लेकिन अभी वह घर छोड़ने को तैयार नहीं है।