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भगवान जगन्नाथ की यात्रा 1
Updated Sat, 14 Jul 2018 11:16 PM IST
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गाजे-बाजे के साथ निकाली गई भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा
फोटो के साथ
मेंहदावल। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया शनिवार को कुबेरस्थान मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। यह यात्रा नगर पंचायत के आसपास गांवों में होते हुए नगर पंचायत के विभिन्न मोहल्लों से होते हुए पुन: कुबेरस्थान मंदिर परिसर में समाप्त हो गई।
मंदिर के पुजारी पंडित दयाशंकर चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ विष्णु के 10 वें अवतार हैं। जो 16 कलाओं से परिपूर्ण हैं। पुराणों में जगन्नाथधाम की काफी महिमा है। इसे धरती का बैकुंठ भी कहा गया है। यहां पर भगवानजगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। उन्हें जगन्नाथ (जगत के नाथ) यानी संसार का नाथ कहा जाता है। यात्रा में जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की पूजा होती है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का नगरवासियों के साथ आसपास के गांवों के लोगों को वर्ष भर इंतजार रहता है। इस दिन हमें भगवान जगन्नाथ के कृपा से क्षेत्रवासियों को स्वागत-सेवा और पूरा अर्चना करने का अवसर मिलता है। यह यात्रा मंदिर से शुरू होकर मिश्रौलिया पंडित, कांटीं, अछियां, टड़वरिया, बसडीला, टेड़ुआं, बीमापार, इमलीडीहां, मरवटियां, नगरा, झलवां, सोनौरां, एकला शुक्ल, बाराखाल, बनकटा समेत कई गांवों में होते हुए नगर पंचायत के विभिन्न मोहल्लों में होते हुए पुन: पूजा-अर्चना के साथ कुबेरस्थान मंदिर परिसर में उनकी स्थापना के साथ समाप्त हो गई। यात्रा में पंडित विंध्याचल चतुर्वेदी भी मौजूद रहें।
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मेंहदावल। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया शनिवार को कुबेरस्थान मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। यह यात्रा नगर पंचायत के आसपास गांवों में होते हुए नगर पंचायत के विभिन्न मोहल्लों से होते हुए पुन: कुबेरस्थान मंदिर परिसर में समाप्त हो गई।
मंदिर के पुजारी पंडित दयाशंकर चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ विष्णु के 10 वें अवतार हैं। जो 16 कलाओं से परिपूर्ण हैं। पुराणों में जगन्नाथधाम की काफी महिमा है। इसे धरती का बैकुंठ भी कहा गया है। यहां पर भगवानजगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। उन्हें जगन्नाथ (जगत के नाथ) यानी संसार का नाथ कहा जाता है। यात्रा में जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की पूजा होती है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का नगरवासियों के साथ आसपास के गांवों के लोगों को वर्ष भर इंतजार रहता है। इस दिन हमें भगवान जगन्नाथ के कृपा से क्षेत्रवासियों को स्वागत-सेवा और पूरा अर्चना करने का अवसर मिलता है। यह यात्रा मंदिर से शुरू होकर मिश्रौलिया पंडित, कांटीं, अछियां, टड़वरिया, बसडीला, टेड़ुआं, बीमापार, इमलीडीहां, मरवटियां, नगरा, झलवां, सोनौरां, एकला शुक्ल, बाराखाल, बनकटा समेत कई गांवों में होते हुए नगर पंचायत के विभिन्न मोहल्लों में होते हुए पुन: पूजा-अर्चना के साथ कुबेरस्थान मंदिर परिसर में उनकी स्थापना के साथ समाप्त हो गई। यात्रा में पंडित विंध्याचल चतुर्वेदी भी मौजूद रहें।
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