फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sant Kabir Nagar News ›   42 years later the village was ready to give land

गांव तो था, 42 साल बाद अब ‘जमीन’ देने की तैयारी

Mon, 08 Jan 2018 12:24 AM IST
Sant Kabir Nagar
Sant Kabir Nagar Updated Mon, 08 Jan 2018 12:24 AM IST
विज्ञापन
42 years later the village was ready to give land
जमीन - फोटो : Amar ujala
संतकबीरनगर। 
विज्ञापन

बनगवा मेंहदावल तहसील का गांव तो था लेकिन करीब 42 साल से उसके पास अपना कहने को एक इंच जमीन न थी। है न हैरान कर देने वाली खबर। ऐसा इसलिए हुआ कि करीब चार दशक से इस गांव के सभी राजस्व और भू अभिलेख गुम रहे। ऐसे में लोग जमीन होते हुए भी वह उनकी है, का कोई प्रमाण नहीं दे पा रहे थे। गांव के लोगों के लिए यह अच्छी खबर है कि अब सभी राजस्व अभिलेख नए सिरे से तैयार कर लिए गए हैं। यह मौजूदा डीएम की पहल और चकबंदी और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम की मेहनत का नतीजा है। प्रशासन जल्द ही इनका प्रकाशन कराने वाला है। 

यूं गुम हुए अभिलेख
 बस्ती मंडल के दो अन्य जिलों के अस्तित्व में आने से पहले बनगवा गांव बस्ती के बांसी तहसील में शामिल था। 1974- 75 में चकबंदी हुई। इस गांव के अभिलेख बस्ती और बांसी के अभिलेखागार में जमा करा दिए गए। वर्ष 1989 में सिद्घार्थनगर जिले का सृजन हुआ तो बनगवा को भी इसमें शामिल कर लिया गया। तहसील बांसी ही बना रहा। जिला बदलने के दौरान बनगवा गांव के राजस्व अभिलेख गायब हो गए। 1997 में संतकबीरनगर जिला बना तो बनगवा गांव यहां की मेंहदावल तहसील में शामिल कर दिया गया। जिला बदला लेकिन बनगवा का नाम सिर्फ राजस्व गांवों की सूची में रहा। अभिलेख गुम थे। 
विज्ञापन

यूं शुरू हुई नई पहल
वर्ष 2012 में तत्कालीन डीएम राजेश कुमार ने गांववालों की शिकायत पर संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर चकबंदी और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम ने बनगवा के राजस्व अभिलेख तैयार करने की कवायद शुरू की। यह बीच में ठप हो गया। मौजूदा डीएम मार्कंडेय शाही ने यह काम पूरा करने के निर्देश दिए। जिला बंदोबस्त अधिकारी विक्रमादित्य वर्मा की देखरेख में सहायक चकबंदी अधिकारी चंद्रिका प्रसाद शुक्ल और तहसीलदार राजेश गुप्ता की संयुक्त टीम ने बनगवा गांव का अद्यतन राजस्व अभिलेख तैयार किया। 29 हेक्टेयर 361 एयर जमीन इस गांव में है। यहां बरईपार,बौरब्यास और अमरहा गांव के भी कुछ किसानों की जमीनें है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

नहीं मिल पाता था ऋण 
 ग्राम पंचायत बरईपार के प्रधान वीरेंद्र दूबे ने बताया कि खतौनी नहीं होने की वजह से गांव के लोग न वरासत करा पाते हैं और न ही अपनी जमीन को बेच पाते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बन रहा। फसली ऋण नहीं ले पाते। बता दें, 300 की आबादी वाला बनगवा बरईपार ग्राम पंचायत का राजस्व गांव है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed