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सड़क पर खड़े होकर बसों का इंतजार करने की मजबूरी
Updated Sun, 10 Dec 2017 12:03 AM IST
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संतकबीरनगर। यात्री सुविधाओं को लेकर परिवहन निगम गंभीर नहीं है। स्थिति यह है कि अभी तक जिले में डिपो की स्थापना नहीं हो सकी है। इसके कारण यात्रियों को मेंहदावल बाईपास चौराहे पर सड़क के किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। यहां न तो यात्रियों के बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही शौचालय व अन्य सुविधाएं।
वर्ष 1997 में संतकबीरनगर जिले का गठन हुआ था। तभी से परिवहन निगम डिपो के लिए जमीन की तलाश कर रहा है। कई बार प्रस्ताव बना और जमीन भी देखी गई, लेकिन अब तक जमीन फाइनल नहीं हो सकी है। इसका असर यात्रियों पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि यात्रियों को मुसीबत झेलना पड़ रहा है। खुले आसमान के नीचे बसों के इंतजार में घंटो यात्रियों को खड़ा रहना पड़ता है। शेड के अभाव में यात्री ओवरब्रिज के नीचे खड़े होने को मजबूर हो रहे हैं। बसों के आने के बाद बस पकड़ने के लिए लोगों को सड़क पार कर आना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
डिपो की स्थापना न होने से सर्वाधिक दिक्कत महिला यात्रियों को उठानी पड़ रही है, क्योंकि बाईपास पर जहां बसों का ठहराव होता है वहां शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में महिला यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है, लेकिन किसी को भी इसकी चिंता नहीं है। डॉ. संध्या राय ने कहा कि परिवहन निगम यात्रियों को सुविधा देने में नाकाम साबित हो रहा है। शेड न होने से खुले आसमान तले खड़ा होकर बस का इंतजार करना पड़ रहा है। इसी प्रकार अजय वर्मा ने कहा कि जिला गठन हुए करीब 20 साल हो गए, लेकिन अभी तक डिपो की स्थापना नहीं हुई, जिससे मुसीबत झेलनी पड़ रही है।
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ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर कब डिपो की स्थापना होगी और अब समस्या से निजात मिलेगी। जाबिर अली अजीजी ने कहा कि कम से कम पानी का इंतजाम तो परिवहन निगम को करना ही चाहिए। प्यास लगने पर पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है, जबकि गुड्डू ने कहा कि प्रशासन को इस दिशा में गंभीर होने की जरूरत है।
वर्ष 1997 में संतकबीरनगर जिले का गठन हुआ था। तभी से परिवहन निगम डिपो के लिए जमीन की तलाश कर रहा है। कई बार प्रस्ताव बना और जमीन भी देखी गई, लेकिन अब तक जमीन फाइनल नहीं हो सकी है। इसका असर यात्रियों पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि यात्रियों को मुसीबत झेलना पड़ रहा है। खुले आसमान के नीचे बसों के इंतजार में घंटो यात्रियों को खड़ा रहना पड़ता है। शेड के अभाव में यात्री ओवरब्रिज के नीचे खड़े होने को मजबूर हो रहे हैं। बसों के आने के बाद बस पकड़ने के लिए लोगों को सड़क पार कर आना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
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डिपो की स्थापना न होने से सर्वाधिक दिक्कत महिला यात्रियों को उठानी पड़ रही है, क्योंकि बाईपास पर जहां बसों का ठहराव होता है वहां शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में महिला यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है, लेकिन किसी को भी इसकी चिंता नहीं है। डॉ. संध्या राय ने कहा कि परिवहन निगम यात्रियों को सुविधा देने में नाकाम साबित हो रहा है। शेड न होने से खुले आसमान तले खड़ा होकर बस का इंतजार करना पड़ रहा है। इसी प्रकार अजय वर्मा ने कहा कि जिला गठन हुए करीब 20 साल हो गए, लेकिन अभी तक डिपो की स्थापना नहीं हुई, जिससे मुसीबत झेलनी पड़ रही है।
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ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर कब डिपो की स्थापना होगी और अब समस्या से निजात मिलेगी। जाबिर अली अजीजी ने कहा कि कम से कम पानी का इंतजाम तो परिवहन निगम को करना ही चाहिए। प्यास लगने पर पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है, जबकि गुड्डू ने कहा कि प्रशासन को इस दिशा में गंभीर होने की जरूरत है।