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अब 31 दिसम्बर तक ओडीएफ होगा जिला
Updated Sat, 15 Dec 2018 12:10 AM IST
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ओडीएफ की राह नहीं दिखती आसान, अफसर परेशान
अभी तक 793 में से 611 ग्राम पंचायतों की मिली है रिपोर्ट
कई ग्राम पंचायतों में अभी शुरू हुआ है काम
एमआईएस व जियो टैगिंग में समानता पर मिलेगा ओडीएफ सर्टिफिकेट
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले को संपूर्ण रूप से खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए पूरा जिला प्रशासन महीने भर से कवायद कर रहा है लेकिन हालात बदल ही नहीं रहे। जिले को 31 दिसंबर तक हर हाल में ओडीएफ किया जाना है और अभी तक शत प्रतिशत गांवों की सत्यापन रिपोर्ट भी नहीं मिल पाई है, जिन गांवों की रिपोर्ट आई है वह भी संतोषजनक नहीं है। कई गांवों में अभी काम शुरू ही हुआ है।
जिले के तीन लाख 33 हजार में से दो लाख 34 हजार घरों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शौचालय का निर्माण होना है। पंचायतीराज विभाग के एमआईएस डॉटा के अनुसार निर्माण हो चुका है लेकिन जियो टैगिंग (निर्माण की फोटो) अभी करीब डेढ़ लाख शौचालयों की ही हो पाई है। इसके चलते ही जिला ओडीएफ घोषित नहीं हो पा रहा है। बीते 19 नवम्बर को मंडलायुक्त ने मीटिंग में अफसरों को फटकार लगाई तब जाकर निगरानी में तेजी आई। इसके बाद से ही डीपीआरओ समेत पूरा विभाग गांव-गांव घूमकर शौचालय निर्माण की जमीनी हकीकत देख रहा है। बावजूद इसके लक्ष्य अभी दूर है। ओडीएफ घोषित करने के लिए जरूरी जिला स्तरीय सत्यापन का कार्य भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है। शुक्रवार तक जिले की 793 में से 611 ग्राम पंचायतों की ही सत्यापन रिपोर्ट मिल सकी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो आई रिपोर्ट में भी कई ग्राम पंचायतों को लेकर आपत्तियां हैं जिनको दूर किया जा रहा है।
डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि वे प्रतिदिन किसी न किसी ग्राम पंचायत का निरीक्षण कर रहे हैं। इसके अलावा सभी एडीओ पंचायत व ग्राम पंचायत अधिकारी भी अपने-अपने क्षे त्र में मॉनीटरिंग कर रहे हैं। जल्दी ही जिले को ओडीएफ घोषित करा दिया जाएगा।
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सीडीओ हाकिम सिंह का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम शौचालय बन तो गए हैं लेकिन जियो टैगिंग नहीं होने से दिक्कत आ रही है। इसीलिए कर्मचारियों को जियो टैगिंग में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही लोगों को शौचालय प्रयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसका अच्छा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।
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अभी तक 793 में से 611 ग्राम पंचायतों की मिली है रिपोर्ट
कई ग्राम पंचायतों में अभी शुरू हुआ है काम
एमआईएस व जियो टैगिंग में समानता पर मिलेगा ओडीएफ सर्टिफिकेट
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले को संपूर्ण रूप से खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए पूरा जिला प्रशासन महीने भर से कवायद कर रहा है लेकिन हालात बदल ही नहीं रहे। जिले को 31 दिसंबर तक हर हाल में ओडीएफ किया जाना है और अभी तक शत प्रतिशत गांवों की सत्यापन रिपोर्ट भी नहीं मिल पाई है, जिन गांवों की रिपोर्ट आई है वह भी संतोषजनक नहीं है। कई गांवों में अभी काम शुरू ही हुआ है।
जिले के तीन लाख 33 हजार में से दो लाख 34 हजार घरों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शौचालय का निर्माण होना है। पंचायतीराज विभाग के एमआईएस डॉटा के अनुसार निर्माण हो चुका है लेकिन जियो टैगिंग (निर्माण की फोटो) अभी करीब डेढ़ लाख शौचालयों की ही हो पाई है। इसके चलते ही जिला ओडीएफ घोषित नहीं हो पा रहा है। बीते 19 नवम्बर को मंडलायुक्त ने मीटिंग में अफसरों को फटकार लगाई तब जाकर निगरानी में तेजी आई। इसके बाद से ही डीपीआरओ समेत पूरा विभाग गांव-गांव घूमकर शौचालय निर्माण की जमीनी हकीकत देख रहा है। बावजूद इसके लक्ष्य अभी दूर है। ओडीएफ घोषित करने के लिए जरूरी जिला स्तरीय सत्यापन का कार्य भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है। शुक्रवार तक जिले की 793 में से 611 ग्राम पंचायतों की ही सत्यापन रिपोर्ट मिल सकी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो आई रिपोर्ट में भी कई ग्राम पंचायतों को लेकर आपत्तियां हैं जिनको दूर किया जा रहा है।
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डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि वे प्रतिदिन किसी न किसी ग्राम पंचायत का निरीक्षण कर रहे हैं। इसके अलावा सभी एडीओ पंचायत व ग्राम पंचायत अधिकारी भी अपने-अपने क्षे त्र में मॉनीटरिंग कर रहे हैं। जल्दी ही जिले को ओडीएफ घोषित करा दिया जाएगा।
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सीडीओ हाकिम सिंह का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम शौचालय बन तो गए हैं लेकिन जियो टैगिंग नहीं होने से दिक्कत आ रही है। इसीलिए कर्मचारियों को जियो टैगिंग में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही लोगों को शौचालय प्रयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसका अच्छा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।