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पशु आश्रय गृहों में नहीं पहुंचे छुट्टा पशु, डीएम नाराज
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आश्रय गृहों में नहीं पहुंचे छुट्टा पशु, डीएम नाराज
सांथा, बेलहर, सेमरियावां और मेंहदावल ब्लॉक की प्रगति खराब
नाराज डीएम ने लापरवाह अधिकारियों को दी कार्रवाई की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। शासन छुट्टा पशुओं को पशु आश्रय गृहों में रखने के लिए चाहे जितना सख्त आदेश दे लेकिन स्थानीय स्तर पर इसका अनुपालन ठीक तरह से सुनिश्चित नहीं हो रहा है। जिलाधिकारी ने समीक्षा की तो सांथा, बेलहर, सेमरियावां और मेंहदावल ब्लॉक की प्रगति रिपोर्ट सबसे खराब मिली। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी दी है।
छुट्टा पशु किसानों की फसल बर्बाद कर रहे हैं। इनके भय से किसान खेतों में धान का बेहन डालने तक से कतरा रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने प्रत्येक न्याय पंचायत में स्थायी/अस्थायी पशु आश्रय बनवाने का निर्देश दिया है। पशु आश्रय स्थलों में चारा-पानी से लगायत पशु सेवक तक रखे जा रहे हैं। इसके बावजूद छुट्टा पशुओं की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। वजह यह कि अधिकारी छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर इन आश्रय स्थलों में नहीं भेज पा रहे हैं। शासन स्तर से इसकी मानीटरिंग की जा रही है। अब इसकी समीक्षा हो रही है तो वस्तुस्थिति सामने आ रही है।
जिलाधिकारी रवीश गुप्त ने बताया कि सांथा, बेलहर, सेमरियांवा और मेंहदावल ब्लॉक में एक सप्ताह में एक भी छुट्टा पशु आश्रय स्थल पर नहीं भेजा गया है। इससे स्पष्ट है कि इन ब्लॉकों के अधिकारी व कर्मचारी इस कार्य में बिल्कुल रुचि नहीं ले रहे हैं। वहीं, खलीलाबाद ब्लॉक में 10, बघौली में चार, हैंसर में 13, नाथनगर में 19 और पौली ब्लॉक में 25 छुट्टा पशु पकड़कर पशु आश्रय स्थल तक लाए गए हैं। जबकि खेतों व सड़कों पर घूम रहे छुट्टा पशुओं की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। जिलाधिकारी ने बताया कि हर ब्लॉक में प्रतिदिन 15 पशु पकड़कर आश्रय स्थल तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। एक सप्ताह में स्थिति नहीं सुधरी तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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सांथा, बेलहर, सेमरियावां और मेंहदावल ब्लॉक की प्रगति खराब
नाराज डीएम ने लापरवाह अधिकारियों को दी कार्रवाई की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। शासन छुट्टा पशुओं को पशु आश्रय गृहों में रखने के लिए चाहे जितना सख्त आदेश दे लेकिन स्थानीय स्तर पर इसका अनुपालन ठीक तरह से सुनिश्चित नहीं हो रहा है। जिलाधिकारी ने समीक्षा की तो सांथा, बेलहर, सेमरियावां और मेंहदावल ब्लॉक की प्रगति रिपोर्ट सबसे खराब मिली। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी दी है।
छुट्टा पशु किसानों की फसल बर्बाद कर रहे हैं। इनके भय से किसान खेतों में धान का बेहन डालने तक से कतरा रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने प्रत्येक न्याय पंचायत में स्थायी/अस्थायी पशु आश्रय बनवाने का निर्देश दिया है। पशु आश्रय स्थलों में चारा-पानी से लगायत पशु सेवक तक रखे जा रहे हैं। इसके बावजूद छुट्टा पशुओं की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। वजह यह कि अधिकारी छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर इन आश्रय स्थलों में नहीं भेज पा रहे हैं। शासन स्तर से इसकी मानीटरिंग की जा रही है। अब इसकी समीक्षा हो रही है तो वस्तुस्थिति सामने आ रही है।
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जिलाधिकारी रवीश गुप्त ने बताया कि सांथा, बेलहर, सेमरियांवा और मेंहदावल ब्लॉक में एक सप्ताह में एक भी छुट्टा पशु आश्रय स्थल पर नहीं भेजा गया है। इससे स्पष्ट है कि इन ब्लॉकों के अधिकारी व कर्मचारी इस कार्य में बिल्कुल रुचि नहीं ले रहे हैं। वहीं, खलीलाबाद ब्लॉक में 10, बघौली में चार, हैंसर में 13, नाथनगर में 19 और पौली ब्लॉक में 25 छुट्टा पशु पकड़कर पशु आश्रय स्थल तक लाए गए हैं। जबकि खेतों व सड़कों पर घूम रहे छुट्टा पशुओं की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। जिलाधिकारी ने बताया कि हर ब्लॉक में प्रतिदिन 15 पशु पकड़कर आश्रय स्थल तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। एक सप्ताह में स्थिति नहीं सुधरी तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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