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क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने नहीं पहुंच रहे किसान

Sun, 16 Jun 2019 10:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sun, 16 Jun 2019 10:47 PM IST
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क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने नहीं पहुंच रहे किसान
खुले आसमान के नीचे टैंक्टर टाली पर लदा गेहूं।
संतकबीरनगर जिले में सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद की रफ्तार सुस्त है। वजह यह कि बाजार में गेहूं का मूल्य और सरकार की तरफ से घोषित समर्थन मूल्य में अधिक अंतर नहीं है। किसान सरकारी क्रय केंद्र का चक्कर लगाने की बजाय अपना गेहूं व्यापारी को बेचकर तत्काल पैसा पा जा रहे हैं। अमर उजाला ने शनिवार को मेंहदावल व मगहर क्षेत्र में गेहूं खरीद की स्थिति का जायजा लिया।
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चार जून के बाद नहीं आया कोई किसान
मेंहदावल। शनिवार को कुसुम्हा स्थित गेहूं क्रय केंद्र पर किसान नहीं दिखे। प्रभारी विपणन निरीक्षक सुरेंद्र राव अपने पल्लेदारों के साथ बैठे थे। उन्होंने बताया कि चार जून के बाद से कोई किसान अब तक गेहूं बेचने नहीं पहुंचा है। क्रय प्रभारी कहते हैं कि कुछ किसानों से संपर्क किया गया तो वे समर्थन मूल्य के बराबर पैसा बाजार में सीधे मिलने की बात कह रहे हैं।
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6713 क्विंटल हुई है खरीद
सांथा। ब्लॉक मुख्यालय के हाट शाखा धोबहा में गेहूं खरीदारी का लक्ष्य आठ हजार क्विंटल है। अभी तक 6713 क्विंटल की खरीदारी हुई है। क्रय केंद्र प्रभारी शिशिर सिंह के अनुसार क्रय केंद्र पर दिनभर इंतजार के बाद भी किसान गेहूं बेंचने नहीं पहुंच रहे हैं। शासन ने लक्ष्य पूरा करने के लिए 10 दिन का समय बढ़ा दिया है। प्रयास किया जा रहा है कि सभी किसानों का गेहूं खरीदा जाए।
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मगहर में 80 किसानों ने बेंचा है गेहूं
मगहर। किसान सेवा समिति सेमरा मगहर क्रय केंद्र पर भी शनिवार को गेहूं बेंचने कोई किसान नहीं पहुंचा। क्रय केंद्र पर मौजूद समिति के सचिव बृजकिशोर तिवारी ने बताया कि अब तक राम सिंह, मिथिलेश यादव, कमलेश, ओमकार यादव, मसलाहुद्दीन, सुरजन सिंह, रजनीश सहित कुल 80 किसानों से 2650 क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। पिछले दो तीन दिनों से कोई भी किसान केंद्र पर गेहूं बिक्री के लिए नहीं पहुंचा है। समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं का मार्केट रेट और सरकारी रेट लगभग बराबर चल रहा है। इसलिए किसान रुचि नहीं दिखा रहे हैं।


नियमों से परेशान हैं किसान
मेंहदावल। किसानों का कहना है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर इतनी लंबी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है कि व्यापारी को बेंचना ही आसान लगता है। सांड़े खुर्द के कमलेश सिंह, छपिया अंगद के अजय तिवारी, देवेंद्र ऊर्फ पप्पू तिवारी, परसा पांडेय के कौशलेंद्र पांडेय, भैंसामाफी के इशरार अहमद आदि का कहना है कि अपना गेहूं बेचने के लिए रजिस्ट्रेेशन करवाने, सामान की ढुलाई के साथ पल्लेदारी देने आदि की समस्या से जूझना पड़ता है। जबकि व्यापारी दरवाजे पर आकर गेहूं खरीद रहा है और सरकारी रेट के बराबर ही मूल्य भी मिल जा रहा है।
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