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ढाबों पर बचे भोजन गोशाला तक पहुंचा रहे सामाजिक कार्यकर्ता
Sat, 15 Jun 2019 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
Santkabirnagar
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 15 Jun 2019 11:45 PM IST
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पशुओं को रोटी खिलाते समाजसेवी।
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। गोवंशीयों के संरक्षण व भूख मिटाने के लिए सरकार के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी आगे आने लगे हैं। शनिवार को ऐसे ही युवाओं की एक टोली ने शहर के मड़या गोशाला में करीब दो हजार रोटी पहुंचाई। यह रोटी विभिन्न ढाबों पर बची हुई थी। जिसे कूड़ा में फेंककर गंदगी फैलाने की बजाय बेजुबानों तक पहुंचाने का कार्य इन युवाओं ने किया।
खलीलाबाद शहर तथा फोरलेन पर शहर के नजदीक करीब 20 ढाबे संचालित होते हैं। इन ढाबों पर हर दिन बचा खाना कूड़े में फेंका जाता है। सामाजिक संगठन ‘अनोखी पहल’ के कार्यकर्ताओं ने इस बचे हुए भोजन का सदुपयोग करने का प्रयास किया। संस्था के अध्यक्ष गुरदीप सिंह बिट्टू ने बताया कि शनिवार की सुबह उन लोगों ने कई ढाबों पर जाकर बचे हुए भोजन को एकत्रित किया। संस्था ने यह निर्णय लिया है की हर दिन ढाबों पर बचे हुए भोजन को नजदीक के गोशाला तक पहुंचाई जाएगी। इस काम से भोजन की बर्बादी भी नहीं होगी और गोशाला में आश्रय पाए हुए पशुओं का पेट भी भर जाएगा। शनिवार को संस्था की तरफ से मड़या स्थित गोशाला में करीब दो हजार रोटियां गोवंशीय पशुओं को खिलाई गईं। इस कार्य को करने में गुरदीप सिंह बिट्टू, विकास उपाध्याय, अमित वर्मा, कृष्ण कुमार राय, मनोज सिंह, शिव कुमार सिंह, महेशधर द्विवेदी, अवधेश कसौधन आदि लगे हैं।
‘फेंके नहीं हमें दे’
संस्था ने होटल व ढाबा मालिकों से बचा भोजन फेंकने की बजाय एकत्रित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि इस तरह एकत्रित भोजन की सूचना संस्था के मोबाइल नंबर 9919950010 पर दें। संस्था के सदस्य भोजन उठाकर गोशाला तक पहुंचा देंगे। संस्था के महासचिव विकास उपाध्याय ने कहा कि थोड़े से प्रयास से सामाजिक कार्य के साथ-साथ धार्मिक आस्था की भी पूर्ति हो सकती है। इसलिए लोग इस कार्य में खुलकर मदद करें।
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खलीलाबाद शहर तथा फोरलेन पर शहर के नजदीक करीब 20 ढाबे संचालित होते हैं। इन ढाबों पर हर दिन बचा खाना कूड़े में फेंका जाता है। सामाजिक संगठन ‘अनोखी पहल’ के कार्यकर्ताओं ने इस बचे हुए भोजन का सदुपयोग करने का प्रयास किया। संस्था के अध्यक्ष गुरदीप सिंह बिट्टू ने बताया कि शनिवार की सुबह उन लोगों ने कई ढाबों पर जाकर बचे हुए भोजन को एकत्रित किया। संस्था ने यह निर्णय लिया है की हर दिन ढाबों पर बचे हुए भोजन को नजदीक के गोशाला तक पहुंचाई जाएगी। इस काम से भोजन की बर्बादी भी नहीं होगी और गोशाला में आश्रय पाए हुए पशुओं का पेट भी भर जाएगा। शनिवार को संस्था की तरफ से मड़या स्थित गोशाला में करीब दो हजार रोटियां गोवंशीय पशुओं को खिलाई गईं। इस कार्य को करने में गुरदीप सिंह बिट्टू, विकास उपाध्याय, अमित वर्मा, कृष्ण कुमार राय, मनोज सिंह, शिव कुमार सिंह, महेशधर द्विवेदी, अवधेश कसौधन आदि लगे हैं।
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‘फेंके नहीं हमें दे’
संस्था ने होटल व ढाबा मालिकों से बचा भोजन फेंकने की बजाय एकत्रित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि इस तरह एकत्रित भोजन की सूचना संस्था के मोबाइल नंबर 9919950010 पर दें। संस्था के सदस्य भोजन उठाकर गोशाला तक पहुंचा देंगे। संस्था के महासचिव विकास उपाध्याय ने कहा कि थोड़े से प्रयास से सामाजिक कार्य के साथ-साथ धार्मिक आस्था की भी पूर्ति हो सकती है। इसलिए लोग इस कार्य में खुलकर मदद करें।
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