{"_id":"5c719688bdec224db852767c","slug":"131550947976-sant-kabir-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की नई पहल--","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की नई पहल--
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अब मत्स्य पालकों को भी मिलेगा किसान क्रेडिट कार्ड
एक हेक्टेयर के तालाब पर दो लाख तक की ऋण सीमा होगी
प्रथम चरण में जिले के 60 मत्स्य पालकों की स्वीकृति की गई पत्रावली
संतकबीरनगर। सरकार ने मत्स्य पालकों को भी अन्य कृषकों की तरह अपने कार्य को बेहतर बनाने के लिए कम ब्याज दर पर ऋण की व्यवस्था कराई है। मत्स्य पालन करने वाले किसानों को भी किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। 24 फरवरी को गोरखपुर में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में इसकी भी शुरुआत होगी। प्रथम चरण में जिले के 60 मत्स्य पालकों को केसीसी के लिए पत्रावली स्वीकृत कर दी गई है।
सरकार किसानों को खेती के ऋण के लिए केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) देती है। इस पर किसानों को सस्ते दर पर कर्ज मिलता है। कर्जमाफी और अनुदान की योजनाओं के लिए भी केसीसी को आधार माना जाता है। अब सरकार ने मछली पालन करने वालों को भी केसीसी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रति हेक्टेयर तालाब पर किसान को दो लाख रुपये तक की ऋण सीमा स्वीकृत होगी। इस ऋण पर मत्स्य पालक को वैसे तो नौ प्रतिशत ब्याज देना होगा, लेकिन अगर ऋण की किस्त जमा करने की स्थिति ठीक है तो उसे अंत में तीन प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसके अलावा दो प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाएगी। इस तरह उसे नौ की बजाय केवल चार प्रतिशत ब्याज ही देना होगा। इस नए कार्यक्रम की शुरुआत रविवार को गोरखपुर में प्रधानमंत्री के हाथों होने जा रहे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के साथ ही होगी। इसके लिए जिले के 60 मत्स्य पालक किसानों का चयन करते हुए उनकी पत्रावली भी स्वीकृत करा दी गई है।
पुरानी केसीसी पर बढ़ेगी ऋण सीमा
अगर कोई मत्स्य पालक व्यक्ति सामान्य कृषक है और उसके पास पहले से ही केसीसी है तो भी वह इस नई योजना में शामिल किया जाएगा। परंतु उसके लिए नया केसीसी स्वीकृत करने की बजाय पुराने केसीसी पर ही ऋण सीमा बढ़ा दी जाएगी। ऐसे मत्स्य पालक किसान को प्रति हेक्टेयर तीन लाख रुपये की ऋण सीमा मिलेगी।
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जिले के एक हजार तालाबों में होता है मछली पालन
जिले में मछली पालन का कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है। मत्स्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 789 तालाब ऐसे हैं जिनका राजस्व विभाग ने पट्टा कर रखा है। इसके अलावा 30 तालाब किसानों ने खुद के खर्च से बनाया है। इसके अलावा लगभग 200 तालाब ऐसे हैं जिनमें लोग मछली पालन तो करते हैं लेकिन उनका बहुत व्यवसायिक उपयोग नहीं हो रहा है। जिले में प्रति हेक्टेयर 30 से 35 क्विंटल मछली उत्पादन होता है।
मत्स्य पालकों को होगा लाभ
जिले के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य बीपी सिंह ने बताया कि मछली पालकों के लिए शुरू हुई केसीसी स्कीम से जिले के मत्स्य पालकों को बहुत फायदा होगा। वजह यह कि ग्रामीण क्षेत्र में राजस्व विभाग ने जिन तालाबों को पट्टा पर दिया है वह गरीब मछुआरे हैं। धन के अभाव में वे तालाबों में बेहतर तरीके से मछली पालन नहीं कर पा रहे हैं। केसीसी से मिले ऋण से उन्हें कारोबार को बेहतर बनाने में सहूलियत होगी जिससे मछली उत्पादन बढ़ेगा।
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एक हेक्टेयर के तालाब पर दो लाख तक की ऋण सीमा होगी
प्रथम चरण में जिले के 60 मत्स्य पालकों की स्वीकृति की गई पत्रावली
संतकबीरनगर। सरकार ने मत्स्य पालकों को भी अन्य कृषकों की तरह अपने कार्य को बेहतर बनाने के लिए कम ब्याज दर पर ऋण की व्यवस्था कराई है। मत्स्य पालन करने वाले किसानों को भी किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। 24 फरवरी को गोरखपुर में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में इसकी भी शुरुआत होगी। प्रथम चरण में जिले के 60 मत्स्य पालकों को केसीसी के लिए पत्रावली स्वीकृत कर दी गई है।
सरकार किसानों को खेती के ऋण के लिए केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) देती है। इस पर किसानों को सस्ते दर पर कर्ज मिलता है। कर्जमाफी और अनुदान की योजनाओं के लिए भी केसीसी को आधार माना जाता है। अब सरकार ने मछली पालन करने वालों को भी केसीसी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रति हेक्टेयर तालाब पर किसान को दो लाख रुपये तक की ऋण सीमा स्वीकृत होगी। इस ऋण पर मत्स्य पालक को वैसे तो नौ प्रतिशत ब्याज देना होगा, लेकिन अगर ऋण की किस्त जमा करने की स्थिति ठीक है तो उसे अंत में तीन प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसके अलावा दो प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाएगी। इस तरह उसे नौ की बजाय केवल चार प्रतिशत ब्याज ही देना होगा। इस नए कार्यक्रम की शुरुआत रविवार को गोरखपुर में प्रधानमंत्री के हाथों होने जा रहे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के साथ ही होगी। इसके लिए जिले के 60 मत्स्य पालक किसानों का चयन करते हुए उनकी पत्रावली भी स्वीकृत करा दी गई है।
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पुरानी केसीसी पर बढ़ेगी ऋण सीमा
अगर कोई मत्स्य पालक व्यक्ति सामान्य कृषक है और उसके पास पहले से ही केसीसी है तो भी वह इस नई योजना में शामिल किया जाएगा। परंतु उसके लिए नया केसीसी स्वीकृत करने की बजाय पुराने केसीसी पर ही ऋण सीमा बढ़ा दी जाएगी। ऐसे मत्स्य पालक किसान को प्रति हेक्टेयर तीन लाख रुपये की ऋण सीमा मिलेगी।
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जिले के एक हजार तालाबों में होता है मछली पालन
जिले में मछली पालन का कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है। मत्स्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 789 तालाब ऐसे हैं जिनका राजस्व विभाग ने पट्टा कर रखा है। इसके अलावा 30 तालाब किसानों ने खुद के खर्च से बनाया है। इसके अलावा लगभग 200 तालाब ऐसे हैं जिनमें लोग मछली पालन तो करते हैं लेकिन उनका बहुत व्यवसायिक उपयोग नहीं हो रहा है। जिले में प्रति हेक्टेयर 30 से 35 क्विंटल मछली उत्पादन होता है।
मत्स्य पालकों को होगा लाभ
जिले के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य बीपी सिंह ने बताया कि मछली पालकों के लिए शुरू हुई केसीसी स्कीम से जिले के मत्स्य पालकों को बहुत फायदा होगा। वजह यह कि ग्रामीण क्षेत्र में राजस्व विभाग ने जिन तालाबों को पट्टा पर दिया है वह गरीब मछुआरे हैं। धन के अभाव में वे तालाबों में बेहतर तरीके से मछली पालन नहीं कर पा रहे हैं। केसीसी से मिले ऋण से उन्हें कारोबार को बेहतर बनाने में सहूलियत होगी जिससे मछली उत्पादन बढ़ेगा।