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बाल स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम के तहत हुई जांच में सामने आया सच
Updated Sat, 01 Dec 2018 11:56 PM IST
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परिषदीय स्कूलों के 3134 बच्चे अस्वस्थ
फोटो
एनएचएम के तहत चलाया जा रहा है बाल स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम
हर ब्लॉक की सीएचसी पर कार्य करती हैं दो टीमें
स्कूलों जाकर बच्चों की करते हैं जांच, रिपोर्ट सीएमओ के माध्यम से जाती है शासन को
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम के तहत जिले भर के स्कूलों में स्वास्थ्य टीम की ओर से किए गए परीक्षण में 3134 बच्चे विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मिले हैं। इनके अभिभावक को नजदीकी सीएचसी पर नियमित जांच व इलाज की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य ठीक नहीं होने की वजह से ये बच्चे नियमित स्कूल भी नहीं आ रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पिछले कई वर्षों से स्कूली बच्चों की स्वास्थ्य की भी नियमित जांच होती है। इसके लिए हर ब्लॉक की सीएचसी में दो स्वास्थ्य टीमें कार्य करती हैं। अपने क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूलों में यह टीमें जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करती हैं। इन टीमों की तरफ से जिले भर की जो रिपोर्ट एकत्रित की गई है वह चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार जांच के दौरान परिषदीय स्कूलों में नामांकित 132146 बच्चों में से 65980 बच्चे ही मौजूद हुए। इनमें से 3134 बच्चे बीमार हैं। इनमें खून की कमी के अलावा आंख व दांत संबंधी दिक्कत अधिक है। टीमों ने बच्चों के विधिवत जांच व नियमित इलाज के लिए अपने क्षेत्र की सीएचसी के लिए रेफर किया है। शुक्रवार की शाम को सीडीओ की अध्यक्षता में हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इस मामले पर चर्चा भी की गई। सीडीओ हाकिम सिंह ने इस रिपोर्ट पर चिंता जताते हुए कहा कि जब सभी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के जरिए बच्चों को पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है तब भी इस तरह की बीमारियों का सामने आना गंभीर मामला है। वहीं डॉक्टरों का तर्क था कि अधिकांश बच्चे अत्यंत निर्धन परिवारों से ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने आते हैं लिहाजा उनके सामाजिक परिवेश, सफाई, भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन व अन्य खनिज पदार्थों की कमी इसका मुख्य कारण हो सकता है। बच्चे कुछ दिन के सामान्य उपचार के बाद पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे। बैठक में यह भी बताया गया कि अस्वस्थता की वजह से ही तमाम बच्चे नियमित स्कूल नहीं आते और इसका असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ता है। सीडीओ हाकिम सिंह ने कहा कि बैठक में यह चौंकाने वाला प्रकरण सामने आया था। इस पर संबंधित विभाग के जिम्मेदारों को गंभीरता से कार्रवाई का निर्देश दिए गए हैं। हालांकि ये बच्चे किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित नहीं हैं। पौष्टिक भोजन व नियमित इलाज से जल्द स्वस्थ हो जाएंगे।
रिपोर्ट देखकर होगी कार्रवाई : बीएसए
बीएसए सत्येंद्र कुमार सिंह का कहना है कि बाल स्वास्थ्य गारंटी स्कीम के तहत स्वास्थ्य टीमें स्कूलों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सीएमओ को देती हैं। वहां से रिपोर्ट की कॉपी मिलती है। जिन बच्चों को अस्वस्थ बताया गया है, उनकी नियमित जांच के लिए संबंधित सीएचसी को भेजा जाएगा। रिपोर्ट मिलते ही इस पर कार्रवाई होगी।
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एनएचएम के तहत चलाया जा रहा है बाल स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम
हर ब्लॉक की सीएचसी पर कार्य करती हैं दो टीमें
स्कूलों जाकर बच्चों की करते हैं जांच, रिपोर्ट सीएमओ के माध्यम से जाती है शासन को
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम के तहत जिले भर के स्कूलों में स्वास्थ्य टीम की ओर से किए गए परीक्षण में 3134 बच्चे विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मिले हैं। इनके अभिभावक को नजदीकी सीएचसी पर नियमित जांच व इलाज की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य ठीक नहीं होने की वजह से ये बच्चे नियमित स्कूल भी नहीं आ रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पिछले कई वर्षों से स्कूली बच्चों की स्वास्थ्य की भी नियमित जांच होती है। इसके लिए हर ब्लॉक की सीएचसी में दो स्वास्थ्य टीमें कार्य करती हैं। अपने क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूलों में यह टीमें जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करती हैं। इन टीमों की तरफ से जिले भर की जो रिपोर्ट एकत्रित की गई है वह चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार जांच के दौरान परिषदीय स्कूलों में नामांकित 132146 बच्चों में से 65980 बच्चे ही मौजूद हुए। इनमें से 3134 बच्चे बीमार हैं। इनमें खून की कमी के अलावा आंख व दांत संबंधी दिक्कत अधिक है। टीमों ने बच्चों के विधिवत जांच व नियमित इलाज के लिए अपने क्षेत्र की सीएचसी के लिए रेफर किया है। शुक्रवार की शाम को सीडीओ की अध्यक्षता में हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इस मामले पर चर्चा भी की गई। सीडीओ हाकिम सिंह ने इस रिपोर्ट पर चिंता जताते हुए कहा कि जब सभी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के जरिए बच्चों को पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है तब भी इस तरह की बीमारियों का सामने आना गंभीर मामला है। वहीं डॉक्टरों का तर्क था कि अधिकांश बच्चे अत्यंत निर्धन परिवारों से ही सरकारी स्कूलों में पढ़ने आते हैं लिहाजा उनके सामाजिक परिवेश, सफाई, भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन व अन्य खनिज पदार्थों की कमी इसका मुख्य कारण हो सकता है। बच्चे कुछ दिन के सामान्य उपचार के बाद पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे। बैठक में यह भी बताया गया कि अस्वस्थता की वजह से ही तमाम बच्चे नियमित स्कूल नहीं आते और इसका असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ता है। सीडीओ हाकिम सिंह ने कहा कि बैठक में यह चौंकाने वाला प्रकरण सामने आया था। इस पर संबंधित विभाग के जिम्मेदारों को गंभीरता से कार्रवाई का निर्देश दिए गए हैं। हालांकि ये बच्चे किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित नहीं हैं। पौष्टिक भोजन व नियमित इलाज से जल्द स्वस्थ हो जाएंगे।
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रिपोर्ट देखकर होगी कार्रवाई : बीएसए
बीएसए सत्येंद्र कुमार सिंह का कहना है कि बाल स्वास्थ्य गारंटी स्कीम के तहत स्वास्थ्य टीमें स्कूलों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सीएमओ को देती हैं। वहां से रिपोर्ट की कॉपी मिलती है। जिन बच्चों को अस्वस्थ बताया गया है, उनकी नियमित जांच के लिए संबंधित सीएचसी को भेजा जाएगा। रिपोर्ट मिलते ही इस पर कार्रवाई होगी।
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