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करवा चौथ पर रखा व्रत
Updated Sun, 28 Oct 2018 12:50 AM IST
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करवा चौथ पर सुहागिनों ने रखा व्रत
फोटो
गौरी-शिव गणेश, कार्तिकेय के पूजन के बाद चंद्रमा को दिया अर्घ्य
पति के दीर्घायु, संतान के जीवन में सुख शांति के लिए की प्रार्थना
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। करवाचौथ पर जनपद के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की सुहागिन महिलाओं ने शनिवार को दिन भर निर्जल व्रत रहकर सायंकाल के समय शिव गौरी, गणेश, कार्तिकेय का पूजन किया। इसके बाद देव मंदिरों में जाकर भगवान का दर्शन करने के बाद रात में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के दीर्घायु, संतान के जीवन में सुख-शांति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना की।
खलीलाबाद पब्लिक स्कूल परिसर में सायंकाल एकत्र हुईं अनुराधा खन्ना, अन्नू, पल्लवी होरा, रानी होरा, पूजा रूंगटा, वैशाली, रधिका खेतान, गुंजन छापड़िया, कीर्ति, एकता, रूचि छापड़िया आदि महिलाओं ने बताया कि परंपरा के अनुसार शनिवार को दिन भर निर्जल व्रत करने के बाद आसपास की महिलाएं सौभाग्य सूचक वस्त्र एवं आभूषण धारण कर एक जगह पर एकत्र होती हैं। देवी-देवताओं के पूजन के बाद व्रत की महिमा की कथा सुनती हैं। सायंकाल चंद्रमा के निकलने अक्षत, लाल चंदन से अर्घ्य देंगी। इसके बाद करवा में चावल, उड़द चूड़ी, कंघी, सिंदूर आदि भरकर सास के चरण छूकर दान करती हैं। फिर पति के मुख का दर्शन कर जल ग्रहण करती हैं।
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गौरी-शिव गणेश, कार्तिकेय के पूजन के बाद चंद्रमा को दिया अर्घ्य
पति के दीर्घायु, संतान के जीवन में सुख शांति के लिए की प्रार्थना
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। करवाचौथ पर जनपद के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की सुहागिन महिलाओं ने शनिवार को दिन भर निर्जल व्रत रहकर सायंकाल के समय शिव गौरी, गणेश, कार्तिकेय का पूजन किया। इसके बाद देव मंदिरों में जाकर भगवान का दर्शन करने के बाद रात में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के दीर्घायु, संतान के जीवन में सुख-शांति और परिवार के कल्याण की प्रार्थना की।
खलीलाबाद पब्लिक स्कूल परिसर में सायंकाल एकत्र हुईं अनुराधा खन्ना, अन्नू, पल्लवी होरा, रानी होरा, पूजा रूंगटा, वैशाली, रधिका खेतान, गुंजन छापड़िया, कीर्ति, एकता, रूचि छापड़िया आदि महिलाओं ने बताया कि परंपरा के अनुसार शनिवार को दिन भर निर्जल व्रत करने के बाद आसपास की महिलाएं सौभाग्य सूचक वस्त्र एवं आभूषण धारण कर एक जगह पर एकत्र होती हैं। देवी-देवताओं के पूजन के बाद व्रत की महिमा की कथा सुनती हैं। सायंकाल चंद्रमा के निकलने अक्षत, लाल चंदन से अर्घ्य देंगी। इसके बाद करवा में चावल, उड़द चूड़ी, कंघी, सिंदूर आदि भरकर सास के चरण छूकर दान करती हैं। फिर पति के मुख का दर्शन कर जल ग्रहण करती हैं।
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