{"_id":"5bddee03bdec2269af649616","slug":"111541271043-sant-kabir-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला प्रशासन ने भेजा है प्रस्ताव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला प्रशासन ने भेजा है प्रस्ताव
Updated Sun, 04 Nov 2018 12:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नमामि गंगे में आमी नदी को शामिल करने को भेजा प्रस्ताव
संतकबीर से जुड़ी होने के कारण कबीरपंथियों के लिए गंगा समान पवित्र है आमी
136 किलोमीटर लंबी इस नदी के अस्तित्व पर मंडरा रहा है खतरा
बढ़ते प्रदूषण व पानी की कमी के चलते नदी गंदे नाले जैसी हो गई है जीवनदायिनी आमी
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। संत कबीर से जुड़ी होने के कारण कबीरपंथियों के लिए गंगा के समान पवित्र आमी नदी को प्रदूषण मुक्त कराकर फिर निर्मल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने नए सिरे से कवायद शुरू की है। लोक आस्था से जुड़ी इस नदी के पुनरुद्घार के लिए प्रशासन ने केंद्र सरकार के नमामि गंगे परियोजना में इसे शामिल करने का प्रस्ताव भेजा है। अगर प्रस्ताव मंजूर हुआ तो सफाई व जल प्रवाह बनाए रखने के लिए करोड़ों रुपये का बजट मिल जाएगा। ऐसा संभव हुआ तो लाखों लोगों की आस्था से जुड़ी यह नदी फिर पहले जैसी बन सकती है।
सिद्घार्थनगर जिले के सिकोहरा ताल से निकली आमी नदी की कुल लंबाई 136 किलोमीटर है। इसमें से 70 किलोमीटर हिस्सा संतकबीरनगर जिले में आता है। नदी के दोनों तरफ 100 से अधिक गांव बसे हैं। महज तीन दशक पहले तक इस नदी के मीठे जल का उपयोग अगल-बगल के गांवों के लोग पीने व अन्य पूजा के अलावा खेत की सिंचाई के लिए करते थे, लेकिन उद्योगों के रसायन युक्त पानी व शहरों के गंदे नालों के पानी ने इस नदी के निर्मल जल को मटमैला बना दिया। इधर बारिश कम होने का असर यह हुआ कि नदी में पानी कम होता चला गया। इस वर्ष तो बरसात खत्म होते ही नदी पतले नाले में सिमट गई। नदी का बहाव धीमा होने से इसमें गंदगी बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने इसके पुनरुद्घार की योजना बनाते हुए केंद्र सरकार के नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा है। इसके तहत नदी में जलप्रवाह बनाए रखने एवं प्रदूषण समाप्त करने के लिए औद्योगिक इकाइयों व शहरी क्षेत्र के सीवरेज के पानी के शोधन के लिए संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है।
आमी बचाओ मंच ने भी रखी थी मांग
आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने आमी नदी को नमामि गंगे परियोजना में शामिल कराकर प्रदूषण मुक्त कराने की मांग की थी। उन्होंने इसके लिए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, उमा भारती व नीतिन गडकरी के अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र भेजा था। उनके अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस प्रस्ताव पर विचार के लिए नमामि गंगे मंत्रालय को पत्र भेजा था।
विज्ञापन
बिना बजट के नहीं हो सकता पुनरुद्घार
जल निगम के अधिशासी अभियंता वीपी सिंह का कहना है कि आमी नदी के पुनरुद्घार के लिए इसे नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। नदी को फिर से पहले जैसी स्थिति में लाने के लिए बड़े बजट की जरूरत है।
अगले चरण में होगा चयन : सांसद
सांसद शरद त्रिपाठी ने बताया कि इस नदी को नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने के लिए उन्होंने उमा भारती व नीतिन गडकरी से मुलाकात की थी। पत्र भी लिखा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया है कि नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने के लिए नदियों को कई श्रेणी में बांटा गया है। आमी नदी को अगले चरण में शामिल करने का आश्वासन दिया गया है। इस परियोजना में शामिल होने के बाद यह नदी फिर तीन दशक पहले जैसी निर्मल हो जाएगी।
विज्ञापन
संतकबीर से जुड़ी होने के कारण कबीरपंथियों के लिए गंगा समान पवित्र है आमी
136 किलोमीटर लंबी इस नदी के अस्तित्व पर मंडरा रहा है खतरा
बढ़ते प्रदूषण व पानी की कमी के चलते नदी गंदे नाले जैसी हो गई है जीवनदायिनी आमी
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। संत कबीर से जुड़ी होने के कारण कबीरपंथियों के लिए गंगा के समान पवित्र आमी नदी को प्रदूषण मुक्त कराकर फिर निर्मल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने नए सिरे से कवायद शुरू की है। लोक आस्था से जुड़ी इस नदी के पुनरुद्घार के लिए प्रशासन ने केंद्र सरकार के नमामि गंगे परियोजना में इसे शामिल करने का प्रस्ताव भेजा है। अगर प्रस्ताव मंजूर हुआ तो सफाई व जल प्रवाह बनाए रखने के लिए करोड़ों रुपये का बजट मिल जाएगा। ऐसा संभव हुआ तो लाखों लोगों की आस्था से जुड़ी यह नदी फिर पहले जैसी बन सकती है।
सिद्घार्थनगर जिले के सिकोहरा ताल से निकली आमी नदी की कुल लंबाई 136 किलोमीटर है। इसमें से 70 किलोमीटर हिस्सा संतकबीरनगर जिले में आता है। नदी के दोनों तरफ 100 से अधिक गांव बसे हैं। महज तीन दशक पहले तक इस नदी के मीठे जल का उपयोग अगल-बगल के गांवों के लोग पीने व अन्य पूजा के अलावा खेत की सिंचाई के लिए करते थे, लेकिन उद्योगों के रसायन युक्त पानी व शहरों के गंदे नालों के पानी ने इस नदी के निर्मल जल को मटमैला बना दिया। इधर बारिश कम होने का असर यह हुआ कि नदी में पानी कम होता चला गया। इस वर्ष तो बरसात खत्म होते ही नदी पतले नाले में सिमट गई। नदी का बहाव धीमा होने से इसमें गंदगी बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने इसके पुनरुद्घार की योजना बनाते हुए केंद्र सरकार के नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा है। इसके तहत नदी में जलप्रवाह बनाए रखने एवं प्रदूषण समाप्त करने के लिए औद्योगिक इकाइयों व शहरी क्षेत्र के सीवरेज के पानी के शोधन के लिए संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है।
विज्ञापन
आमी बचाओ मंच ने भी रखी थी मांग
आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने आमी नदी को नमामि गंगे परियोजना में शामिल कराकर प्रदूषण मुक्त कराने की मांग की थी। उन्होंने इसके लिए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, उमा भारती व नीतिन गडकरी के अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र भेजा था। उनके अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस प्रस्ताव पर विचार के लिए नमामि गंगे मंत्रालय को पत्र भेजा था।
विज्ञापन
बिना बजट के नहीं हो सकता पुनरुद्घार
जल निगम के अधिशासी अभियंता वीपी सिंह का कहना है कि आमी नदी के पुनरुद्घार के लिए इसे नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। नदी को फिर से पहले जैसी स्थिति में लाने के लिए बड़े बजट की जरूरत है।
अगले चरण में होगा चयन : सांसद
सांसद शरद त्रिपाठी ने बताया कि इस नदी को नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने के लिए उन्होंने उमा भारती व नीतिन गडकरी से मुलाकात की थी। पत्र भी लिखा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया है कि नमामि गंगे परियोजना में शामिल करने के लिए नदियों को कई श्रेणी में बांटा गया है। आमी नदी को अगले चरण में शामिल करने का आश्वासन दिया गया है। इस परियोजना में शामिल होने के बाद यह नदी फिर तीन दशक पहले जैसी निर्मल हो जाएगी।