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एनजीटी के हाईपॉवर कमेटी के चेयरमैन ने दिए निर्देश

Tue, 30 Oct 2018 11:55 PM IST
Updated Tue, 30 Oct 2018 11:55 PM IST
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एनजीटी के हाईपॉवर कमेटी के चेयरमैन ने दिए निर्देश
फिर से आचमन और वजू लायक बनेगी कबीर की अमिया
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आमी नदी में प्रदूषण की जांच के लिए एनजीटी ने गठित की है हाई पॉवर कमेटी
न्यायमूर्ति डीपी सिंह की अगुवाई वाली टीम ने अफसरों के साथ बैठक की
15 दिन के अंदर कार्ययोजना मांगी, तीन किलोमीटर के दायरे में होगा पौधरोपण
अगल-बगल के जलाशयों को भी पुनर्जिवित करने का दिया गया सुझाव
उदयभान त्रिपाठी
संतकबीरनगर। पांच सौ वर्ष पहले मगहर क्षेत्र को जीवन देने वाली आमी नदी अब प्रदूषित पानी व कचरा के चलते गंदा नाला बन चुकी है, लेकिन एनजीटी की नजर पड़ने के बाद एक बार फिर इस जीवनदायिनी को संजीवनी मिलने के आसार बढ़ गए हैं। एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी के चेयरमैन ने 15 दिन के अंदर इस नदी के पुनरुद्घार के लिए कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिए हैं।
सिद्घार्थनगर जिले के सिकोहरा ताला से निकली आमी नदी गोरखपुर जिले में घाघरा नदी में मिलती है। इसी के किनारे मगहर में संत कबीर की निर्वाण स्थली है। संत कबीर से जुड़ी यह नदी जिले की विशिष्ट पहचान है, लेकिन बस्ती के रुधौली चीनी मिल तथा संतकबीरनगर के कई मिलों व शहरों का गंदा पानी इसमें गिरने की वजह से नदी का पानी प्रदूषित हो चुका है। कई बार आंदोलन के बाद यह पूरा मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के हवाले है। बरसात खत्म होते ही नदी का जलस्तर बेहद कम हो गया है। मगहर के पास नाला जैसी दिख रही नदी का पानी भी मटमैला हो चुका है। मिलों का पानी बहने पर नदी का पानी पूरी तरह से काला हो जाता है और मछलियां मरने लगती हैं। मंगलवार को एनजीटी की तरफ से गठित हाईपॉवर कमेटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति डीपी सिंह की अगुवाई में एक टीम इसकी जांच करने आई थी। न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने दोपहर में खलीलाबाद के लोकनिर्माण विभाग के डाकबंगले में अफसरों के साथ बैठक कर नदी को पुनर्जिवित करने व प्रदूषण रोकने के उपायों पर हो रही कार्रवाई की जानकारी ली। उन्होंने इस नदी का अस्तित्व बचाने के लिए कार्ययोजना बनाने का भी निर्देश दिए।
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पौधरोपण व जलाशयों का पुनरुद्घार होगा
आमी नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष कर रहे आमी बचाओ मंच के अगुवा विश्व विजय सिंह ने बताया कि हाईपॉवर कमेटी के साथ उनकी बैठक हुई है। इस बैठक में नदी में प्रदूषण रोकने के साथ-साथ पर्याप्त पानी की व्यवस्था करने के उपायों पर भी चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि नदी के दोनों तरफ खाली जमीनों पर पौधरोपण के अलावा पांच किलोमीटर क्षेत्र में आम, पीपल, महुआ आदि के पौधे लगाने तथा पुराने जलाशयों का जिर्णाद्घार कराया जाए। इसके अलावा नदी में पानी का प्रवाह बनाए रखने के लिए अन्य जलस्रोतों तथा बारिश का पानी रोकने के उपाय किया जाए।
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