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खूंखार कुत्तों के हमले में तीन दिन में तीन हिरन हुए मौत का शिकार
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संभल। खूंखार कुत्तों के हमले में तीन दिन में तीन हिरन मारे गए। इसमें दो काले हिरन शामिल थे। पोस्टमार्टम के बाद तीनों हिरन दफनाए गए। लेकिन हिरन पर कुत्तों के हमले बचाने और उनके लिए शुद्ध पेयजल का इंतजाम कराने के लिए कोई पहल नहीं हुई है।
पवांसा क्षेत्र में ठाठी, किसौली, विक्रमपुर, सेमला, देवरी, मल्लाह मुस्तफाबाद, बागड़पुर, सिसौना, लालपुर, कैलादेवी, शकरपुर तारनपुर, सौंधन, निरियावली, रुदायन, नारंगपुर, शाकिन शोभापुर, किरारी, रझेड़ा सलेमपुर से लेकर बल्लमपुर तक करीब 25 गांवों के रेतीले इलाके में अधिक हिरन पाए जाते हैं। इसमें दुर्लभ प्रजाति के 100 से अधिक काले हिरन हैं। क्षेत्र में फसल बचाने के लिए पानी के साथ कीटनाशक भी लगाया जा रहा है।
कीटनाशकयुक्त पानी पीने से हिरन की रफ्तार सुस्त हो जाती है और अगर कोई हिरन अपने झुंड से बिछड़ गया तो उस पर खूंखार कुत्ते हमला कर देते हैं। पवांसा पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज गौतम ने बताया कि तीन दिन में तीन हिरन मौत का शिकार हुए हैं। गांव बागड़पुर छाईया में शनिवार की देर रात मादा हिरन पर खूंखार कुत्तों ने हमला किया था। उसकी गर्दन और पैरों के पास दो गहरे जख्म थे।
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शव का पोस्टमार्टम सुबह 6:30 बजे कर दिया गया। किसानों ने आलू की फसल में कीटनाशक डाला हैं। जब हिरन कीटनाशक युक्त पानी पी लेते हैं तो उनके शरीर में सुस्ती छा जाती है। दौड़ने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। इसी बीच अगर कोई हिरन अपने झुंड से पीछे रह गया तो खूंखार कुत्ते उसे दौड़ा लेते हैं और जब वह भाग नहीं पाता है तो हमला कर देते हैं। जख्मी होने के बाद उसकी मौत हो जाती हैं।
यहां हुए हिरनों पर हमले
- गांव करनपुर कायस्थ में 7 जनवरी की शाम 3:30 बजे खूंखार कुत्तों के हमले में काले हिरन की मौत हो गई।
- गांव सैमला में 9 जनवरी शाम 4:30 बजे जंगल में खूंखार कुत्तों ने अकेले देख काले हिरन पर हमला कर दिया। कुछ देर बाद हिरन ने दम तोड़ दिया।
- गांव बागड़पुर छाईया में 9 जनवरी की देर रात खूंखार कुत्तों के हमले में हिरन की मौत हो गई।
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पवांसा क्षेत्र में ठाठी, किसौली, विक्रमपुर, सेमला, देवरी, मल्लाह मुस्तफाबाद, बागड़पुर, सिसौना, लालपुर, कैलादेवी, शकरपुर तारनपुर, सौंधन, निरियावली, रुदायन, नारंगपुर, शाकिन शोभापुर, किरारी, रझेड़ा सलेमपुर से लेकर बल्लमपुर तक करीब 25 गांवों के रेतीले इलाके में अधिक हिरन पाए जाते हैं। इसमें दुर्लभ प्रजाति के 100 से अधिक काले हिरन हैं। क्षेत्र में फसल बचाने के लिए पानी के साथ कीटनाशक भी लगाया जा रहा है।
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कीटनाशकयुक्त पानी पीने से हिरन की रफ्तार सुस्त हो जाती है और अगर कोई हिरन अपने झुंड से बिछड़ गया तो उस पर खूंखार कुत्ते हमला कर देते हैं। पवांसा पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज गौतम ने बताया कि तीन दिन में तीन हिरन मौत का शिकार हुए हैं। गांव बागड़पुर छाईया में शनिवार की देर रात मादा हिरन पर खूंखार कुत्तों ने हमला किया था। उसकी गर्दन और पैरों के पास दो गहरे जख्म थे।
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शव का पोस्टमार्टम सुबह 6:30 बजे कर दिया गया। किसानों ने आलू की फसल में कीटनाशक डाला हैं। जब हिरन कीटनाशक युक्त पानी पी लेते हैं तो उनके शरीर में सुस्ती छा जाती है। दौड़ने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। इसी बीच अगर कोई हिरन अपने झुंड से पीछे रह गया तो खूंखार कुत्ते उसे दौड़ा लेते हैं और जब वह भाग नहीं पाता है तो हमला कर देते हैं। जख्मी होने के बाद उसकी मौत हो जाती हैं।
यहां हुए हिरनों पर हमले
- गांव करनपुर कायस्थ में 7 जनवरी की शाम 3:30 बजे खूंखार कुत्तों के हमले में काले हिरन की मौत हो गई।
- गांव सैमला में 9 जनवरी शाम 4:30 बजे जंगल में खूंखार कुत्तों ने अकेले देख काले हिरन पर हमला कर दिया। कुछ देर बाद हिरन ने दम तोड़ दिया।
- गांव बागड़पुर छाईया में 9 जनवरी की देर रात खूंखार कुत्तों के हमले में हिरन की मौत हो गई।