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Sambhal News: दूसरे दिन भी मृतकों के घरों में नहीं जला चूल्हा
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धनारी (संभल)। थाना क्षेत्र के गांव दो सगे भाइयों सहित चार युवाओं की मौत के बाद गांव में गम का माहौल रहा। दूसरे दिन भी घरों में चूल्हे नहीं जले। रह रहकर घरों से सिसकियों की आवाज आती रही। परिजनों, रिश्तेदारों का आना लगा रहा है। जैसे ही कोई रिश्तेदार पहुंचता, गली मोहल्ले से रूदन सुनाई देने लगती। सभी परिजनों को ढांढस बंधाते रहे।
थाना क्षेत्र के गढ़ा निवासी चार युवकों की डिबाई थाना क्षेत्र के दानपुर के पास हुए हादसे में मौत हो गई। सोमवार की रात दो बजे ईको कार से धनारी गांव निवासी पुष्पेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार, दो भाई नीरज कुमार और प्रमोद कुमार की मौत हो गई। दो मृतक परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर नहीं है। एक मजदूरी करता था, तो दो सगे भाई नोएडा में रहकर ऑटो चलाते थे। परिवार के पालन पोषण में पिता का हाथ बंटाते थे। गांव में चार युवकों की मौतों से गम का माहौल है। मृतकों के घर व आसपास में दूसरे दिन भी चूल्हे नहीं जले। पूरा गांव शोक में डूब गया। गांव की गलियों में रुक रुक सिसकियां सुनाई दे रहीं हैं। गांव की गलियां वीरान नजर आ रहीं हैं। मृतकों के घर पर रिश्तेदारों का आना जाना लगा हुआ है। हर कोई नियति का फेर बताकर परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहा है। बाहर से किसी रिश्तेदार के घर आते ही, परिजनों का मन विचलित हो उठता है। फिर से रुदन सुनाई देने लगता है।
ग्रामीणों में रोष, हादसे में चार मौत के बाद भी नहीं पहुंचा कोई प्रशासनिक अधिकारी
गांव में चार मौत हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। गांव में अभी तक तहसील प्रशासन से न तो कोई अधिकारी और न ही कोई कर्मचारी पहुंचा है। इसको लेकर ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति रोष भी है।
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थाना क्षेत्र के गढ़ा निवासी चार युवकों की डिबाई थाना क्षेत्र के दानपुर के पास हुए हादसे में मौत हो गई। सोमवार की रात दो बजे ईको कार से धनारी गांव निवासी पुष्पेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार, दो भाई नीरज कुमार और प्रमोद कुमार की मौत हो गई। दो मृतक परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर नहीं है। एक मजदूरी करता था, तो दो सगे भाई नोएडा में रहकर ऑटो चलाते थे। परिवार के पालन पोषण में पिता का हाथ बंटाते थे। गांव में चार युवकों की मौतों से गम का माहौल है। मृतकों के घर व आसपास में दूसरे दिन भी चूल्हे नहीं जले। पूरा गांव शोक में डूब गया। गांव की गलियों में रुक रुक सिसकियां सुनाई दे रहीं हैं। गांव की गलियां वीरान नजर आ रहीं हैं। मृतकों के घर पर रिश्तेदारों का आना जाना लगा हुआ है। हर कोई नियति का फेर बताकर परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहा है। बाहर से किसी रिश्तेदार के घर आते ही, परिजनों का मन विचलित हो उठता है। फिर से रुदन सुनाई देने लगता है।
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ग्रामीणों में रोष, हादसे में चार मौत के बाद भी नहीं पहुंचा कोई प्रशासनिक अधिकारी
गांव में चार मौत हो गई। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। गांव में अभी तक तहसील प्रशासन से न तो कोई अधिकारी और न ही कोई कर्मचारी पहुंचा है। इसको लेकर ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति रोष भी है।
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